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CG Ajab Gajab : इस स्कूल की अजब कहानी, पांच क्लास के सात बच्चे एक कमरे में बैठकर लेते हैं तालीम, देखिए वीडियो…

कक्षा पहली से पांचवीं तक के क्लास में मात्र 14 छात्रों का पंजीयन है, लेकिन हर रोज स्कूल पांच से सात छात्र ही पहुंचते हैं।

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CG Ajab Gajab : इस स्कूल की अजब कहानी, पांच क्लास के सात बच्चे एक कमरे में बैठकर लेते हैं तालीम, देखिए वीडियो...

CG Ajab Gajab : इस स्कूल की अजब कहानी, पांच क्लास के सात बच्चे एक कमरे में बैठकर लेते हैं तालीम, पढि़ए खबर...

जांजगीर.चांपा. नवागढ़ ब्लाक के नवीन प्राथमिक शाला जहां पांच क्लास के सात बच्चे एक कमरे में बैठकर तालीम ले रहे हैं। स्कूल में इन सात बच्चों की शिक्षा के लिए सरकार सालाना लाखों रुपए बहा रही है। ऐसा नहीं है कि इस गांव में और भी स्कूल नहीं है। चार कदम दूर एक और भी प्राइमरी स्कूल है जहां यहां की दर्ज संख्या कुछ अधिक है।

स्कूल के रजिस्टर में दर्ज संख्या भले ही 14 छात्र बताई जा रही है, लेकिन आधे छात्र या तो पलायन कर गए हैं और आधे छात्र आते जिसे शिक्षक एक कमरे में बिठाकर जैसे-तैसे पढ़ाई कराते हैं। शिक्षा अधिकारी को इस बात की जानकारी है, लेकिन युक्तियुक्तकरण शासन स्तर की बात है कहकर गेंद शासन के पाले में डालकर जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं।

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जिले के शिक्षा विभाग में शिक्षा के नाम पर भद्दा मजाक चल रहा है। शासन हर तीन किलोमीटर में स्कूल तो खोल रही है, लेकिन स्कूल में न तो शिक्षक हैं और न ही पढ़ाई करने वाले छात्र। कुछ इसी तरह की कहानी नवागढ़ ब्लाक के धनेली में देखने को मिली है। यहां गांव के बीच नवीन प्राथमिक शाला है जहां गिनती के छात्र पढ़ाई के लिए स्कूल पहुंच रहे हैं।

कक्षा पहली से पांचवीं तक के क्लास में मात्र 14 छात्रों का पंजीयन है, लेकिन हर रोज स्कूल पांच से सात छात्र ही पहुंचते हैं। हर रोज की तरह गुरूवार को पत्रिका रिपोर्ट ने रिपोर्टिंग के लिए पहुंचा तब स्कूल के एक कमरे में सात बच्चे पढ़ाई कर रहे थे। इन सात बच्चों में दो छात्र कक्षा पहली का था तो एक छात्र दूसरी का व दो चौथी मिलाकर कुल पांच क्लास में कुल सात छात्र मौजूद थे। इनकी शिक्षा दीक्षा के लिए दो शिक्षाकर्मियों की यहां नियुक्ति हुई है।

एक शिक्षाकर्मी विजय सिंह राठौर स्कूल में मौजूद था तो वहीं हेडमास्टर सरिता राठौर पिछले दो दिन से स्कूल से नदारद थीं। रजिस्टर में न तो उनका छुट्टी का आवेदन लिखा था और न ही उसने विधिवत छुट्टी ली थी। एक शिक्षक सात बच्चों को प्राइमरी स्कूल की प्रारंभिक शिक्षा दे रहा था। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि एक स्कूल में सात बच्चों की पांच क्लास एक साथ लगाकर शिक्षा का स्तर कैसे उपर उठाया जा सकता है।

पलायन कर जाते हैं छात्र
शिक्षक विजय सिंह राठौर ने बताया कि स्कूल में पढ़ाई के लिए बच्चे ढूंढना पड़ता है। बड़ी मुश्किल से दो-चार बच्चे स्कूल की दहलीज में पहुंचते हैं। उनका नाम लिखा जाता है फिर उनके मां-बाप जब पलायन कर जाते हैं तब अपने बच्चों को भी ले जाते हैं। इसके चलते स्कूल में दर्ज संख्या नहीं के समान रहती है। कुछ जागरूक अभिभावक हैं जो अपने बच्चों को निजी स्कूल में भेज देते हैं। इसके कारण स्कूल में दर्ज संख्या प्रभावित है।

टेबलेट बिगड़ा, मेडम अपने घर ले गई
स्कूलों में दर्ज संख्या और ऑनलाइन रिपोर्टिंग के लिए शासन ने इसी साल से प्रत्येक स्कूलों में टेबलेट प्रदान की है। जिसमें शिक्षकों की उपस्थिति और अन्य जानकारी शासन को ऑनलाइन भेजना है, लेकिन शासन का दिया हुआ टेबलेट बिगड़ गया है, जिसे मेडम सरिता राठौर अपने घर ले गई हंै। इसके चलते शासन हाईटेक सिस्टम ठप पड़ा है। टेबलेट बनवाने की दिशा में हेडमास्टर ने क्या किया यह भी अंधेरे में है।

शासन को लग रहा सालानों लाखों का चूना
एक स्कूल के संचालन के लिए शासन को सालाना लाखों रुपए खर्च आता है। यदि इस स्कूल में दो शिक्षाकर्मी है दोनों को यदि सरकार 25-25 हजार रुपए भी वेतन दे रही है तो साल भर में वेतन के नाम पर 6 लाख रुपए खर्च हो रहा है। इसके अलावा स्कूल मेंटेंनेंस का खर्च मध्यान्ह भोजनए स्कालशिपए स्पीपरए रसोइया सहित तकरीबन 7 से 8 लाख रुपए खर्च कर रही है। वहीं शिक्षा गिनती के बच्चों को दिया जा रहा है। यदि आरटीई के तहत इन सात बच्चों को शासन निजी स्कूल में पढ़ाती तो सालाना 7 हजार रुपए प्रति छात्र के हिसाब से सात छात्रों का 49 हजार रुपए खर्च आता।
- ऐसे स्कूलों का तीन साल पहले युक्तियुक्तकरण किया गया था। इसके बाद भी ऐसे कई स्कूल बच गए हैं जहां छात्र संख्या बेहद कम हैं और शिक्षक अधिक हैं। इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा जाता है। युक्तियुक्तकरण शासन स्तर की बात है- जीपी भास्कर, डीईओ