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प्रशिक्षण के नाम पर करोड़ों की राशि का बंदरबाट, डाईट प्राचार्य, संकुल समन्वयक व संकुल प्रभारी सहित अन्य स्टॉफ की मिलीभगत

-संकुल केंद्र धनेली के शैक्षिक समन्वयक ने फर्जी बिल लगाकर निकाली राशि

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प्रशिक्षण के नाम पर करोड़ों की राशि का बंदरबाट, डाईट प्राचार्य, संकुल समन्वयक व संकुल प्रभारी सहित अन्य स्टॉफ की मिलीभगत

जांजगीर-चांपा. जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाईट) जांजगीर में इन दिनों प्रशिक्षण के नाम पर शासकीय राशि का जमकर बंदरबांट किया जा रहा है। इसमें डाईट प्राचार्य से लेकर संकुल समन्वयक व संकुल प्रभारी सहित अन्य स्टॉफ तक की मिलीभगत है। इस खेल का भंडाफोड़ पत्रिका ने करते हुए कई बार खबर प्रकाशित की, लेकिन इस ओर न कलेक्टर ने कई जांच कर कार्यवाही की और न ही शिक्षा विभाग ने।

सभी ने इस सही बताया, लेकिन जब इस मामले पर आरटीआई से जानकारी ली गई तो चौकाने वाली सच्चाई सामने आई। डाईट अंतर्गत संकुल केंद्र धनेली के शैक्षिक समन्वयक लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने फर्जी बिल लगाकर 43 हजार 725 रुपए की राशि आहरित कर ली।

इतना ही नहीं डाईट प्राचार्य ने भी अपने कार्यालय में ही व्ययमांग पत्रक भरवाया और जो बिल मिला उसे लेकर बिना जांच किए ही सेल्फ चेक काट कर दे दिया। इससे साफ है कि यदि नियम के मुताबिक डाईट प्रचार्य एकाउंटपेयी चेक काटतीं तो संकुल प्रभारी का इसमें हस्तक्षेप दिखता और निश्चित ही इस कमीशन के खेल में कमी आती।
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इस तरह दिया फर्जी बिल
संकुल समन्वयक लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने 24 से 27 अक्टूबर 2017 को हुए प्रशिक्षण कार्य के लिए रजनीश बुक डिपो का 4980 और 4755 का बिल लगाया है जबकि उन्हीं के द्वारा दिए गए व्यय मांग पत्रक में स्टेशनरी खर्च 2975 और 3100 रुपए का दिखाया गया है। इससे साफ है कि उन्होंने बाद में फर्जी बिल लगाया है।

खाने का टेंडर फिर लगा दिया बिल
संकुल केंद्र प्रभारी धनेली ने खोखरा के उमा शंकर राठौर को प्रशिक्षण के दौरान भोजन व्यवस्था का टेंडर दिया थाए लेकिन आदेश के बाद भी संकुल समन्वयक लक्ष्मीकांत पाण्डेय ने जांजगीर के अनिश स्वीट्स से 15470 व 16120 रुपए का बिल लगाया है। जबकि शिकायकर्ताओं का दावा है कि अनिश स्वीट्स से भोजन सप्लाई हुआ ही नहीं है।