सड़क पर दौड़ रहे 140 सवारी बसों में किसी में भी नहीं लगा जीपीएस सिस्टम, कागजों तक सिमट कर रह गए बने आदेश
जांजगीर-चांपा. महिलाओं के विरूद्ध यौन अपराधों की रोकथाम एवं इसके निदान के लिए बनाए गए कड़े कानून केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। नियमों का पालन कराने न तो अफसर रुचि दिखा रहे हैं और न ही लोगों में जागरूकता नजर आ रही है। खासकर दिल्ली दुष्कर्म कांड के बाद शासन महिला उत्पीडऩ कानून में बड़ा संसोधन किया है। जिसके तहत बसों में शख्त निगरानी रखना चाह रही है। बसों में जीपीएस सिस्टम लगाना चाह रही, लेकिन अब तक जिले के अंदर चलने वाली एक भी बसों में जीपीएस सिस्टम नहीं लग पाया है। जिसके चलते शासन के द्वारा बनाए गए नियम केवल कागजों तक ही सीमित है।
Read More : गोली चलाने वाला आरोपी गिरफ्तार, अपने ही घर में छिपा हुआ था ये आरोपी, पढि़ए खबर कैसे पहुंची पुलिस यहां तक
पुलिस हमेशा बस मालिकों की बैठक लेकर यात्री वाहनों में जारी परमिट शर्तों का पालन गंभीरता से करने की शख्त हिदायत देती है। बस मालिकों को कहा जाता है कि वे वाहन की बैठक क्षमता की 25 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए चिन्हांकित करें। इनकी सीटों में स्पष्ट लिखे बोर्ड होनी चाहिए। यदि किसी बस में बैठते समय किसी महिला के विरूद्ध अभद्र व्यवहार छेड़छाड़ या दुव्र्यहार की घटना होती है, उनकी लज्जा भंग होती है तो उस वाहन के कर्मचारियों द्वारा तत्काल पुलिस को सूचना दी जाए।
इसके अलावा बस चालक, कंडक्टर या हेल्पर द्वारा पीसीआर वेन पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी जाए। लेकिन बस संचालकों द्वारा पुलिस के द्वारा दिए गए फरमान का पालन नहीं करते। अब भी बसों व कारों से काला शीशा नहीं हटाया गया है और न ही बस के अंदर सहजदृश्य स्थान पर व्यतिरेक रंग में चालक का विवरण नाम पता बैज नंबर स्पष्ट अक्षरों में लिखी गई है। जबकि बस मालिक का टेलीफोन नंबर आरटीओ का फोन नंबर वाहन का पंजीयन क्रमांक स्पष्ट अक्षरों में बसों में ही लिखी होनी चाहिए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना घटने की स्थिति में बस में सवार यात्रियों को जरूरत के हिसाब से सुविधा के लिए किसी तरह की परेशानी न हो।
बस मालिकों से इन सभी नियमों का पालन करने के लिए पुलिस एवं आरटीओ के अधिकारियों ने आदेश दे दिया है। बस मालिकों को अल्टीमेटम भी दिया गया है। इसके बाद भी बस संचालक नियमों का पालन करने कोताही बरत रहे हैं।
जिले में 140 बसें संचालित हो रही। ये बसें जिले से बिलासपुर, कोरबा, शिवरीनारायण, बलौदा, केरा, बिर्रा, हसौद सहित आसपास के जिले को कव्हर करते हुए सवारी ढोते हैं।
इन शर्तों का करना है पालन
- वाहन स्वामी का नाम पता बसों में लिखे हों
- बसों में वाहन स्वामी का फोन, मोबाइल नंबर हो
- अनुज्ञा पत्र क्रमांक व प्रकार
- अनुज्ञा पत्र की वैद्यता
- पुलिस हेल्पलाइन नंबर
- महिला हेल्पलाइन नंबर
- चालक कंडक्टर का नाम व पता
- महिलाओं के लिए 25 प्रति सीट सुरक्षित हो
Published on:
26 Jun 2018, 2:14 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.