27 अक्टूबर 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

योजना के तहत न तो स्कूलों की साफ सफाई पर जोर दी गई और न ही शिक्षा की गुणवत्ता पर रही पैनी नजर, परिणाम…

- सरकार द्वारा बनाई गई योजना चंद सालों में ही दम तोड़ दी।
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जांजगीर चंपा

•

image

Shiv Singh

•

Updated: 25 Jun 2018, 5:53 PM IST

योजना के तहत न तो स्कूलों की साफ सफाई पर जोर दी गई और न ही शिक्षा की गुणवत्ता पर रही पैनी नजर, परिणाम...

योजना के तहत न तो स्कूलों की साफ सफाई पर जोर दी गई और न ही शिक्षा की गुणवत्ता पर रही पैनी नजर, परिणाम...

जांजगीर-चांपा. शिक्षा अधिकारी, सांसद, विधायक के अलावा अन्य विभाग के बड़े अफसरों को पांच-पांच स्कूल गोद लेकर आदर्श स्कूल बनाने की योजना दम तोड़ते दिखाई दे रही है। ऐसे स्कूलों का रिजल्ट क्या रहा और योजना कितने दिनों तक चली यह शिक्षा अधिकारियों को ही पता नहीं है। हद तो तब हो गई जब योजना के तहत परिणाम क्या निकले यह भी अधिकारी बता पाने से घबरा रहे हैं। दो साल पहले जिला शिक्षा अधिकारी, विकासखंड शिक्षाधिकारी, सांसद विधायक के अलावा बीआरसी अपने क्षेत्र के पांच-पांच स्कूलों को गोद लेकर उन स्कूलों को आदर्श स्कूल बनाए गए थे।

Read More : इतने हजार मिडिल व हाई स्कूलों में फर्नीचर नहीं, छात्रों को फिर जमीन पर बैठकर लेनी होगी तालीम
इन स्कूलों में न केवल शिक्षा की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखनी थी बल्कि इन स्कूलों आमूलचूल परिवर्तन लाने के अलावा उस स्कूल के रिजल्ट भी टॉप पर लाने जोर आजमाईश करना था। ताकि योजना के तहत गोद लिए स्कूलों में कायाकल्प हो जाए, लेकिन सरकार द्वारा बनाई गई यह योजना चंद सालों में ही दम तोड़ दी। आदर्श स्कूल में हर काम नाम के अनुरूप होना था, लेकिन यह योजना केवल कागजों तक ही सीमित हो गया।

मैदानी अमले ने योजना को न तो मंजिल तक पहुंचाया और न ही इसका कोई रिजल्ट पता चला। शासन की यह योजना बेहद कारगर थी। यदि मैदानी अमला इस पर बखूबी पहल करते तो निश्चित ही जिले का रिजल्ट बेहद ऊंचा उठता। मजेदार बात यह है कि योजना के तहत न तो स्कूलों की साफ सफाई पर जोर दी गई और न ही अधिकारी शिक्षा की गुणवत्ता पर विशेष नजर रख पाए।

शिक्षा अधिकारियों ने न तो स्कूलों की मॉनिटरिंग की और न ही स्कूलों का दौरा करने रुचि ली। अधिकारियों के मुताबिक जांजगीर व सक्ती शैक्षणिक जिले को मिलाकर 9 विकासखंड हैं। जिसमें 9 बीईओ, 9 बीआरसी, 9 एबीओ के अलावा डीईओ के पांच स्कूल मिलाकर तकरीबन 140 स्कूल आदर्श स्कूल के दायरे में लाना था। इन स्कूलों को आदर्श स्कूल का दर्जा देना था, लेकिन योजना केवल कागजों तक ही सीमित रह गई।

यह रहा रिजल्ट
पिछले तीन सालों में यदि दसवीं बारहवीं का रिजल्ट देखा जाए तो जिले के पौने दो सौ स्कूलों में किसी भी स्कूल के छात्रों ने बोर्ड में अपना नाम रोशन नहीं किया है। जिले के हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों को औसत रिजल्ट देखा जाए तो किसी भी स्कूलों का रिजल्ट 70 प्रतिशत से आगे नहीं बढ़ा है, जिसें एकाध छात्रों को छोड़कर किसी छात्रों ने 90 प्रतिशत से आगे भी नहीं बढ़ पाए हैं, जिसे देखकर साफ जाहिर होता है कि शासन योजना केवल कागजों में बनाती है, मैदानी स्तर में योजना रद्दी की टोकरी में चला जाता है।

गौरतलब है कि जिले में बीते शिक्षा सत्र में 54 हजार छात्रों ने बोर्ड की परीक्षा में अपनी किस्मत आजमाया था, लेकिन 54 हजार छात्रों में एक भी छात्र आदर्श नहीं बन पाए और न ही एक भी शिक्षा अधिकारी अपने गोद लिए स्कूलों को आदर्श का दर्जा दे पाए।

डीईओ के पांच स्कूल, किसी का परिणाम बेहतर नहीं
तत्कालीन जिला शिक्षाधिकारी आरएन हीराधर ने जिले के पांच विकासखंड के पांच स्कूलों का चयन कर अपने नाम दर्ज कराया था। जिसमें नवागढ़ ब्लाक के कन्हाईबंद, बनारी, पामगढ़ ब्लाक के सलखन, बलौदा ब्लाक के करमंदा के अलावा एक और स्कूल का नाम शामिल था। उन्होंने मौजूदा वित्तीय वर्ष में न तो किसी स्कूल का रिजल्ट मुड़कर देखा और न ही इन स्कूलों का बेहतर परीक्षा परिणाम आया। इतना ही नहीं डीईओ के किसी भी स्कूल का रिजल्ट बेहतर नहीं आया था, जिसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि योजना केवल कागजों तक ही सीमित थी।

मूलभूत सुविधाओं पर पर नजरअंदाज
गोद लिए आदर्श स्कूलों में जिम्मेदार अधिकारी उन स्कूलों के मूलभूत सुविधाओं पर भी नजर रखनी थी। उस स्कूल में शिक्षकों की कमी न हो और खेल गतिविधियों में रूझान पर विशेष कार्ययोजना बनाना था। इतना ही नहीं स्कूल में बिजली, पानी की व्यवस्था पर भी ध्यान दिया जाना था, लेकिन योजना दो साल के भीतर ही दम तोड़ दी। अब इन स्कूलों की मॉनिटरिंग तो दूर दो साल में रिजल्ट कैसा था किसी ने मुड़कर नहीं देखा। इसके चलते शासन की योजना धरी की धरी रह गई।

-शिक्षा विभाग के अफसर समेत अन्य विभाग के अधिकारियों व सांसद विधायकों ने स्कूलों को गोद लिया है। ऐसे स्कूलों में शिक्षा की क्या स्थिति है मॉनिटरिंग नहीं कर पाए हैं। जानकारी लेकर इस संबंध में कुछ कहा जा सकता है- जीपी भास्कर, डीईओ

बड़ी खबरें

View All

जांजगीर चंपा

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग