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घोषणा के 3 साल बाद भी नैला चौकी को क्यों नहीं मिला थाने का दर्जा? 23 गांवों की सुरक्षा पर दबाव, जानें वजह!

Police Force Shortage: घोषणा के तीन साल बाद भी नैला चौकी को थाने का दर्जा नहीं मिल पाया है। 23 गांवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमित पुलिस बल पर है।
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Chhattisgarh Police

नैला चौकी को क्यों नहीं मिला थाने का दर्जा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Naila Police Chowki: जांजगीर-चांपा जिले की नैला चौकी को थाने का दर्जा देने की घोषणा के तीन साल बाद भी यह कागजों तक ही सीमित है। यह चौकी गिने-चुने कर्मचारियों के बूते करीब दो दर्जन गांवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रही है। तीन साल पहले कांग्रेस शासनकाल में नैला चौकी को थाने का दर्जा देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इसे थाने का दर्जा नहीं मिल पाया है।

विडंबना यह है कि नैला उपथाने में जरूरी सुविधाओं में से आधी भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके कारण गिने-चुने कर्मचारियों को सीमित संसाधनों के साथ दर्जनों गांवों में पुलिसिंग करनी पड़ रही है। रेलवे स्टेशन और नैला की घनी आबादी के साथ 23 बड़े गांवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल 17 से 18 कर्मचारियों के भरोसे है, जो नाकाफी साबित हो रही है।

नैला क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था संभालना सबसे चुनौतीपूर्ण काम है। रेलवे स्टेशन के आसपास चोरी, लूटपाट सहित अवैध कारोबार धड़ल्ले से होता है। इसके कारण यहां पुलिसिंग के लिए अधिक बल की जरूरत पड़ती है। बल की कमी के चलते शहर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी पर्याप्त चौकसी नहीं हो पाती। वहीं, कन्हाईबंद, सरखों, बोड़सरा और सिवनी सहित कई बड़े गांव इस चौकी के अंतर्गत आते हैं। इन गांवों में आए दिन चोरी सहित अन्य बड़ी वारदातें होती रहती हैं। इन मामलों की गुत्थी सुलझाने में पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है।

इसी तरह मड़वा पावर प्लांट क्षेत्र में भी अधिक पुलिस बल की जरूरत होती है। मड़वा प्लांट क्षेत्र में आए दिन लोहे की चोरी, मारपीट और हड़ताल जैसी घटनाओं के कारण नैला पुलिस की मुश्किलें बढ़ जाती हैं। ऐसे में पुलिस बल बढ़ाना जरूरी माना जा रहा है। विडंबना यह है कि यहां दर्ज होने वाले मामलों में एफआईआर की प्रक्रिया दो बार पूरी करनी पड़ती है। पहले चौकी में रिपोर्ट दर्ज होती है, फिर कोतवाली में उसका नंबरीकरण किया जाता है। यानी एफआईआर को दो बार रजिस्टर में दर्ज करना पड़ता है। यदि नैला को स्वतंत्र थाने का दर्जा दे दिया जाए, तो थाना स्वतंत्र रूप से काम कर सकेगा।

नहीं हो पाती पेट्रोलिंग

नैला उपथाना क्षेत्र में 23 बड़े गांव हैं, जहां नियमित पेट्रोलिंग की जरूरत पड़ती है। बोड़सरा, सिवनी, सरखों, मड़वा और कन्हाईबंद को अपराध की दृष्टि से संवेदनशील गांव माना जाता है। इन गांवों में आए दिन गंभीर अपराध होते रहते हैं। बल की कमी के कारण नियमित पेट्रोलिंग नहीं हो पाती, जिससे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण की चुनौती बनी हुई है। इसी तरह नैला के आसपास स्थित शराब भट्ठियों के पास भी आए दिन आपराधिक घटनाएं होती हैं। बीते दिनों यहां हत्या की एक वारदात भी हुई थी।

विवेचकों की कमी

थाने में पुलिस बल के साथ अपराधों की विवेचना करने वाले कर्मचारियों की भी जरूरत होती है। नैला चौकी में अपराधों की विवेचना के लिए केवल एक एएसआई और एक प्रधान आरक्षक हैं। इन्हीं के जिम्मे 23 गांवों में होने वाले अपराधों की विवेचना का काम है। जबकि यहां चार प्रधान आरक्षकों की जरूरत बताई जा रही है। वर्तमान में चार के बजाय केवल दो प्रधान आरक्षक होने से विवेचना के काम में कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

स्वीकृत पुलिस बल

पद - स्वीकृत बल

  • टीआई - 01
  • एसआई - 02
  • एएसआई - 02
  • प्रधान आरक्षक - 04
  • आरक्षक - 20

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