28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लाइसेंस रिन्यूवल नहीं कराया तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा, अस्पताल संचालकों में मचा हड़कंप

- जिले में ऐसे 53 अस्पताल नर्सिंग होम एक्ट के तहत पात्र पाए गए हैं

2 min read
Google source verification
लाइसेंस रिन्यूवल नहीं कराया तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा, अस्पताल संचालकों में मचा हड़कंप

लाइसेंस रिन्यूवल नहीं कराया तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा, अस्पताल संचालकों में मचा हड़कंप

जांजगीर-चांपा. सरकार के नियमों के तहत संचालित नर्सिंग होम एक्ट के तहत बनाए गए नर्सिंग होम एवं अस्पताल अब रिन्यूवल होंगे। जिन अस्पतालों का लाइसेंस पांच वर्ष की अवधि पूर्ण हो चुका है, ऐसे अस्पतालों को अपना लाइसेंस रिन्यूवल कराना अनिवार्य है। आदेश के तहत नर्सिंग होम एक्ट के तहत संचालित अस्पताल के संचालकों में हड़कंप मच गया है और वे फिर से अपने अस्पतालों के जरूरी दस्तावेज खंगालना शुरू कर दिया है। लाइसेंस रिन्यूवल नहीं होने की स्थिति में ऐसे अस्पतालों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। जिले में ऐसे 53 अस्पताल नर्सिंग होम एक्ट के तहत पात्र पाए गए हैं। जिसमें से 25 फीसदी अस्पताल की अवधि पूरी होने के कगार पर है। ऐसे अस्पताल संचालकों ने पुन: लाइसेंस पाने के लिए गतिविधि तेज कर दी है।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान कराने के लिए सरकार ने पांच साल पहले यानी वर्ष 2013 में नर्सिंग होम एक्ट नियम बनाया था। नियम के तहत मरीजों को अस्पताल में उत्तम सुविधा मुहैय्या कराना था। प्रशिक्षित स्टॉफ के अलावा अस्पताल में सारी सुविधाएं उपलब्ध होनी थी। नियम के चाहे जैसी भी हो अस्पतालों में नर्सिंग होम एक्ट के तहत काफी हद तक नियमों को पालन किया गया। अब सरकार ने ऐसे अस्पतालों का रिन्यूवल कराने का आदेश दे दिया है। जिन अस्पतालों का लाइसेंस पांच साल पूरा हो चुका है। ऐसे अस्पतालों को पुन: नर्सिंग होम एक्ट के तहत लाइसेंस का रिन्यूवल कराना है।

Read More : रसूखदार व्यवसायियों पर नोटिस का कितना असर और नगर पालिका कितना गंभीर, पढि़ए खबर...

डेढ़ सौ हैं कतार में
जिले में ऐसे भी कई नर्सिंग होम व डॉक्टर नर्सिंग होम एक्ट के लाइसेंस के लिए कतार में हैं, लेकिन नियम में शर्तों को पूरी नहीं कर पाने के कारण उनका लाइसेंस अब तक नहीं बन पाया है। आखिरकार ऐसे डॉक्टर झोलाछाप की श्रेणी में रहते हुए अपना क्लीनिक निर्बाध ढंग से संचालित कर रहे हैं। ऐसे अस्पतालों की मॉनिटरिंग प्रशासन नहीं कर रहा है। कई डॉक्टर लाइसेंस के लिए आवेदन जमा किए हैं उसी को आधार मानकर अपनी क्लीनिक संचालित कर रहे हैं। ऐसे डॉक्टरों की मॉनिटरिंग के लिए सीएमएचओ ने सभी बीएमओ को नोडल अधिकारी नियुक्त किया हैए लेकिन बीएमओ समय कम होने का हवाला देते हुए जांच पड़ताल नहीं कर रहे हैं। इसके चलते ऐसे झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिक आबाद है।

करनी पड़ सकती है कवायद
बताया जा रहा है कि नर्सिंग होम एक्ट के तहत संचालकों को दोबारा लाइसेंस के लिए स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। सूत्रों का कहना है कि लाइसेंस रिन्यूवल के लिए अफसर मुह फाड़े बैठे हैं। नियम का हवाला बताते हुए फाइल दरकिनार कर रहे हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि नर्सिंग होम संचालकों से स्वास्थ्य विभाग के अफसरों भेट भलाई की बात कही जा रही है। जब तक भेट भलाई नहीं हो जाती तब लाइसेंस पास करना मुश्किल नजर आ रहा है।

इन्हें मिला है लाइसेंस
डेंटल क्लीनिक-13
एक्सरे-04
पैथोलैब- 02
नर्सिंग होम-23
नेत्रालय- 03
क्लीनिक-06
सोनोग्राफी- 01
फिलियोथेरेपी-01

-नर्सिंग होम संचालन के लिए लाइसेंस रिन्यूवल कराना अनिवार्य है। इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भेट भलाई का आरोप बेबुनियाद है। आरोप लगाने वाले कुछ भी बोल देते हैं- डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ

बड़ी खबरें

View All

जांजगीर चंपा

छत्तीसगढ़

ट्रेंडिंग