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अधिक कमाने के लालच में ठेकेदार उड़ा रहे नियम-कायदों की धज्जियां, खनिज व जिला प्रशासन भी खुलकर दे रहा साथ, पढि़ए खबर…

अकलतरा से दर्रीटांड के लिए जाने वाली ग्रामीण सड़क के ठीक बगल से ठेकेदार जेसीबी व चेनमाउटेंड मशीन लगाकर मुरुम का अवैध उत्खनन कर रहा है।

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अधिक कमाने के लालच में ठेकेदार उड़ा रहे नियम-कायदों की धज्जियां, खनिज व जिला प्रशासन भी खुलकर दे रहा साथ, पढि़ए खबर...

जांजगीर-चांपा. जिले में ठेकेदार अरबों रुपए की लागत से सड़क बनाने का ठेका तो ले लेते हैं, लेकिन वह अधिक पैसे बचाने की लालच में नियम कायदों का ध्यान नहीं देते हैं। यह हालत जिले में बन रही बिलासपुर अकलतरा से रायगढ़ के लिए बन रही फोरलेन का है।
इस सड़क को बनाने लिए सीजीआरडीसी ने दो-तीन ठेकेदारों को अलग-अलग दूरी की रोड बनाने की जिम्मेदारी है, लेकिन सभी ठेकेदार अवैध मुरुम खोदकर रायल्टी की चोरी कर उसे मानक सीबीआर की मिट्टी बताकर सड़क में पाट रहे हैं।उनके इस काले कारोबार में खनिज व जिला प्रशासन भी खुलकर साथ दे रहा है। सबसे बुरी हालत अकलतरा और जांजगीर की है। अकलतरा से दर्रीटांड के लिए जाने वाली ग्रामीण सड़क के ठीक बगल से ठेकेदार जेसीबी व चेनमाउटेंड मशीन लगाकर मुरुम का अवैध उत्खनन कर रहा है।

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ठेकेदार अकलतरा में सीसीआई की जमीन सहित अन्य गांव में तालाब व खाली पड़ी शासकीय भूमि के मैदान को धड़ल्ले से खोद रहा है। अवैध उत्खनन का यह कार्य दिन दहाड़े खुलेआम होने के बाद भी न तो इस ओर राजस्व विभाग के अधिकारी ध्यान दे रहे हैं और न खनिज विभाग के अधिकारियों को कोई चिंता है। लोगों का तो यहां तक कहना है कि इस कार्य के लिए विभाग ने ठेकेदार को खुली छूट दे रखी है और यह बस कमीशन का खेल है।

इस अवैध उत्खनन में भले ही सरकार को लाखों रुपए की रायल्टी का नुकसान हो जाएए लेकिन अधिकारियों की जेब भारी हो जाती तो सभी कमियां दूर हो जाती है। पत्रिका द्वारा लगातार इस मुद्दे को लेकर खबर प्रकाशन के संबंध में न तो कलेक्टर और न खनिज अधिकारी ने इस ओर एक भी कार्रवाई की है। इससे साफ है कि ठेकेदार को कहीं न कहीं प्रशासनिक अधिकारियों का सह प्राप्त है। यदि ऐसा नहीं तो कलेक्टर के टीएल बैठक में भी यह मुद्दा उठता और इसे लेकर खनिज अधिकारी ने क्या कार्रवाई की यह भी सामने आ जाता।

कार्य प्रगति का दे रहे हवाला
खनिज अधिकारियों से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होने माना कि यह गलत हो रहा हैए लेकिन वह लोग कार्य प्रगति का हवाला दे रहे हैं। उनका कहना है कि विकास कार्य को देखते हुए कलेक्टर ने खुद उन्हें जल्द से जल्द सकड़ बनाने में मदद करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में यदि ठेकेदार को कुछ छूट नहीं दी जाएगी तो कार्य कैसे होगा।