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महामाया स्कूल के प्रचार्य के सामने प्रशासन की जांच भी पड़ गई छोटी

जांच करने की जगह अधिकारी परेशान कर रहे शिकायकर्ता को

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जांच करने की जगह अधिकारी परेशान कर रहे शिकायकर्ता को

जांच करने की जगह अधिकारी परेशान कर रहे शिकायकर्ता को

पामगढ़. गत 31 मई से दो जून तक एनईओएस के द्वारा कराई गई डीएलएड की परीक्षा के दौरान परीक्षा केंद्र शासकीय महामाया उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पामगढ़ में हुई नकल को लेकर की गई शिकायत के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने विद्यालय के प्रचार्य राजेंद्र शुक्ला के खिलाफ जांच को शुरू कर दी, लेकिन यह महज खानापूर्ति ही दिख रही है।

हालत यह कि सच की लड़ाई लड़ रहे मुरली मनोहर शर्मा ने जो आडियो कॉल रिकार्डिंग अधिकारियों को सौंपी है वह उसे भी मानने से मना कर रहे हैं। जबकि अधिकारियों को चाहिए कि वह इस रिकार्डिंग की फोरेंसिक जांच करवाएं। शर्मा का आरोप है क अधिकारी सही जांच करने की जगह उल्टा उसे ही परेशान करने में लगे हैं,

जिससे की वह अपनी शिकायत वापस ले ले। हालत यह है कि वर्तमान में मुरली शर्मा के पास रोजी-रोटी चलाने के लिए जो नौकरी थी वह छूट चुकी है और वह अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए भी लोगों से सहयोग मांग रहा है। इतनी विषम परिस्थित में भी शर्मा का कहना है कि वह अंतिम सांस तक लड़ाई लड़ेगा।


इस मामले की जांच जिला शिक्षा अधिकारी जीपी भास्कर सहित पामगढ़ एसडीएम सागर राज कर रहे हैं। एसडीएम की कोर्ट में 29 जुलाई को मामले की सुनवाई भी होनी है। इस मामले में मुरली मनोहर शर्मा का कहना है कि एसडीएम द्वारा उनसे कहा गया है कि वह शिकायत को सही बताने वाले कोई और गवाह लेकर आए क्योंकि ऑडियो रिकार्डिंग साक्ष्य के लिए पर्याप्त नहीं हैं।

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ऐसे में मुरली मनोहर का कहना है कि यदि आडियो को एसडीएम सही नहीं मानतो तो भी यह सिद्ध कराएं कि राजेंद्र शुक्ला ने तीन जून को जो उसे कॉल किया वह क्यों किया और उनके बीच नौ मिनट 27 सेकंड तक क्या बात हुई। मुरली का कहना है कि उसने कस्टमर केयर से भी यह डिटेल निकाल लिया है कि तीन जून 2018 को उसके फोन पर महामाया स्कूल के प्राचार्य ने फोन किया था और उसके बीच 9.27 मिनट तक बातचीत हुई है।


नाम गुप्त रखने पर एक गवाह और तैयार
पत्रिका को एक परीक्षार्थी द्वारा वीडियो भेजा गया है, जिसमें उसने नाम व पहचान गोपनीय गोपनीय रखने पर बताया कि मुरली मनोहर शर्मा द्वारा लगाया गया आरोप शतप्रतिशत सही है। परीक्षार्थी का कहना है कि परीक्षा के दौरान कुछ लोगों ने मोबाइल द्वारा नकल किया। पर्यवेक्षकों द्वारा मोबाइल जब्त करने के बाद भी कुछ नहीं किया गया। इतना ही नहीं वहां शुक्ला सर व पर्यवेक्षकों द्वारा अपने अपने लोगों को व्यक्तिगत रूप से नकल कराई गई है। अधिकतर परीक्षार्थियों ने गाइड लेकर परीक्षी दी है।