जांजगीर-चांपा. छत्तीसगढ़ राज्य आदिवासी राज्य कहा जाता है, लेकिन यहां शासन प्रशासन की लचर व्यवस्था के चलते उन्हीं के साथ मजाक हो रहा है। इसका जीता जागता उदाहरण बलौदा विकासखंड अंतर्गत पंतोरा में संचालित शासकीय अनुसूचित जाति कन्या आश्रम है। यहां की छात्रावास अधीक्षिका प्रतिभा माथुर का दावा है परीक्षा के बाद महज एक-दो हफ्ते हुए हैं सभी छात्राएं अपने घर चली गई हैं। इससे पहले तक हॉस्टल पूरी तरह फुल था, यहां दूर दराज क्षेत्र से आई आदिवासी वर्ग की बच्चियां रहकर पढ़ाई करती हैं। जबकि पत्रिका की टीम ने जब 19 अप्रैल को यहां का औचक निरीक्षण किया तो हॉस्टल की स्थिति देखकर कोई भी बता सकता है कि यहां कई महीने से कोई भी नहीं रह रहा होगा। डॉ.संदीप उपाध्याय व हितेश गौरहा की रिपोर्ट-
गद्दों का नहीं खुला है कवर
छात्रावास में आदिवासी विकास विभाग के द्वारा सभी सुविधाएं बच्चों को उपलब्ध कराई जाती हैं। इसी कड़ी में पंतोरा आश्रम में विभाग ने काफी समय पहले छात्राओं के लेटने के लिए पलंग व गद्दे स्प्लाई किए थे। निरीक्षण के दौरान यहां पाया गया कि गद्दे जिस कवर में सप्लाई किए गए उसका कवर तक नहीं खोला गया। इससे साफ है कि इनका उपयोग ही नहीं हुआ है।
जर्जर हुई छत, गिर रहा प्लास्टर
पंतोरा आदिवासी छात्रा आश्रम की कई कमरे काफी जर्जर हालत में हैं। यहां एक कमरे की छत का प्लास्टर गिर रहा है। वहां भारी मात्रा में टूटी हुई कुर्सी और टेबल पड़े हुए थे। चपरासी ने बताया कि यह कमरा जर्जर हो गया है तो यहां कबाड़ रख दिया गया है। इतने बड़े पैमाने पर टूटी पड़ी नई कर्सियां व टेबल भी यह संदेह जताती हैं कि वह एक साथ कैसे टूट गईं।

लाखों का प्यूरीफिकेशन प्लांट खा रहा धूल
आश्रम में रहने वाली बच्चियों को शुद्ध पेय जल मिले इसके लिए विभाग ने लाखों रुपए की लागत से बना एक बड़ा वाटर प्यूरी फिकेशन प्लांट तक यहां सप्लाई किया है, लेकिन इसे देखकर साफ पता चलता है कि इसका उपयोग महीनों से नहीं किया गया। यह प्लांट हॉस्टल ग्राउंड में रखा हुआ धूल खा रहा है। हॉस्टल के चपरासी को यह तक पता नहीं कि वह सही या खराब।
केयर टेकर ने यह बताई सच्चाई
सूने हॉस्टल में एक गांव का ही अधेड़ युवक रखवाली करता हुआ मिला। उसने बताया कि माथुर मैडम ने उसे यहां की देखरेख के लिए रखा है। छात्राओं के बारे में उसने बताया कि उसने 55 छात्राओं के रहने की बात सुनी है, लेकिन कभी देखा नहीं है। उसका कहना है कि वह यहां मैडम के बुलाने पर ही रखवाली करने के लिए आता है। आगे उसे कुछ पता नहीं है।
सालों से उपयोग नहीं हुआ शौचालय का
पंतोरा अनुसूचित जाति शासकीय जाति कन्या आश्रम की हालत यह है कि यहां बने सभी शौचालय पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं। यहां धूल, मिट्टी, पेड़-पौधों के अवशेष की एक मोटी परत जमी पड़ी थी। चपरासी से पूछने पर उसने बताया कि शौचालय की हालत तो सालों से इसी तरह की है। जब उससे पूछा गया तो उसने बताया कि यहां छात्राएं रहती हैं कि नहीं उसे नहीं पता। अधीक्षिका मैडम उसे अपने खर्च पर हॉस्टल की निगरानी करने के लिए छोड़कर गई हैं, जो कि वह कर रहा है। इस बारे में जब हॉस्टल अधीक्षिका प्रतिभा माथुर से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हॉस्टल में मरम्मत कार्य के लिए लिखा गया है। कुछ काम हुआ है और कुछ काम फंड की कमी से रुका हुआ है।
उन्होंने बताया कि यहां छात्राएं रहती हैं और उन्हें शासन की योजना के मुताबिक ही सभी सुविधाएं दी जाती हैं। अब इसमें कितनी सच्चाई है यह जांच का विषय है, लेकिन पत्रिका की टीम जब हॉस्टल में पहुंची तो स्थिति देखकर यह स्पष्ट पता चलता है कि यहां कई महीनों से कोई नहीं रहता होगा। इसका अंदाजा शौचालय व अन्य जगहों की ली गई तस्वीरों से भी लगाया जा सकता है। सबसे अहम बात तो यह है कि करोड़ों की संपत्ति खर्च करके संचालित किया गया हॉस्टल यहां के स्टॉफ एक प्राईवेट आदमी के भरोसे कैसे छोड़ सकता है।
-छात्राएं परीक्षा के बाद अपने-अपने घर चली गई हैं। छात्रावास काफी जर्जर हालत में है, इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है। मरम्मत कराया जाएगा- प्रतिभा माथुर, आधीक्षिका
