
सरकारी इमारत सुरक्षित नहीं, कभी भी हो सकती है बड़ी दुर्घटना
जांजगीर-चांपा. बारिश के मौसम में आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है और यदि भवन पर बिजली गिरती है तो उनके ढहने का खतरा भी बना रहता है। इसकी रोकथाम के लिए तडि़त चालक कारगर साबित होता है। लेकिन शहर के कलेक्टोरेट कार्यालय को छोड़कर किसी भी सरकारी कार्यालय भवनों पर सुरक्षा यंत्र नहीं लगे है। वहीं प्रशासन भी इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।
जिले के सरकारी इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज किया जा रहा है। शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में तडि़त चालक की अवहेलना हो रही है। वहीं अधिकांश दफ्तरों में आग से बचाव के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। जिले में सरकारी या गैरसरकारी कार्यालयों में तडि़त चालक लगाने प्रति लोगों का रूख सकारात्मक नहीं दिखाई दे रहा है।
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शहर के सरकारी भवनों, जिला चिकित्सालय, जिला पंचायत, तहसील कार्यालय, नगरपालिका भवन सहित जिले के शासकीय व निजी बहुमंजिला इमारतों में ये नजर नहीं आ रहे हैं। ये सभी ऐसे स्थान हैं जहां हर दिन बड़ी तादाद में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। हालांकि क्षेत्र में बिजली गिरने की घटना में कमी आई है लेकिन एहतियात के तौर पर तडि़त चालक का उपयोग सभी भवनों में किया जाना जरूरी है।
गाज को रोकने कुछ हद तक बिजली के खंभे भी मददगार होते हैं। खंभों में लगे इंसुलेटर आकाशीय बिजली (Lightning) को आकर्षित कर लेते हैं। यही वजह है कि शहरी क्षेत्रों में गाज गिरने की खबरें कम मिलती है। इसके विपरीत वनांचल क्षेत्रों में गाज गिरने की घटनाएं ज्यादा होती है। जानकारों के अनुसार हरे-भरे ऊंचे पेड़ और ऊंची इमारतें आकाशीय बिजली को ज्यादा आकर्षित करते है।
शहर के ज्यादतर सरकारी इमारतों में आग से बचने के लिए कोई सुरक्षा इंतजाम नहीं किए हैं। इसके चलते अचानक शार्ट सर्किट या अन्य कारणों से लगी आग पर काबू पाने केवल दमकल कर्मियों का सहारा होता है। जिला शिक्षाधिकारी कार्यालय, बीआरसी भवन, पोस्ट आफिस, तहसील कार्यालय, थाना, नगरपालिका, रोजगार कार्यालय, जिला परिवहन कार्यालय सहित एक दर्जन कार्यालय में अगिनशामक की व्यवस्था नहीं है। इन कार्यालयों में है तो वह भी एक्सपायरी हो गया है। जिला मुख्यालय की संवेदनशील भवन ही असुरक्षित हैं तो इनके मातहत कार्यालयों और ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी भवनों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
तडि़त चालक गांव में ज्यादा जरूरी
अमूमन देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों में ही आकाशीय बिजली (Lightning) गिरने से लोगों को मौत का सामना करना पड़ता है। इससे कभी उन्हें खुद की जान से हाथ धोना पड़ता है तो कभी मवेशियों की जान चली जाती है। ऐसे में जरूरी है कि ग्रामीण इलाकों में बने भवनों में तडि़त चालक यंत्र लगें।
क्यों लगाना चाहिए तडि़त चालक
लोहे की वस्तु बिजली का आकर्षित कर धरती में अर्थ कर देती है। आकाशीय बिजली (Lightning)का असर ऊंचे मकानों पर न पड़े इसके लिए मकान के ऊपर एक त्रिशुलनुमा तांबे की पट्टी लगाकर उसे जमीन के भीतर खोदे गए गड्ढे से कनेक्ट कर दिया जाता है। गड्ढे में नमी के लिए नमक और कायेले के अलावा कापर प्लेट रहती है। जो आसमानी विद्युत आवेश को अर्थ करने की क्षमता रखता है और गाज से भवन बच जाता है।
बर्न यूनिट नहीं
जिले की सबसे बड़ी विडम्बना यह है कि यहां बर्न यूनिट नहीं है। बिजली गिरने या आग से झुलसे व्यक्ति के लिए जिला अस्पताल में बर्न यूनिट ही नहीं है। इसकी वजह से गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को दूसरी जगह जाते-जाते जान से हाथ धोना पड़ता है। तडि़त चालक और अग्रिशामक के आभाव के चलते कभी भी कोई भी हादसा हो सकता है। ऐसे में समय पर उपचार न हो पाने से लोगों को जान गंवानी पड़ सकती है।
बचाव के उपाय
- इस दौरान पेड़ के नीचे खड़े न हो।
- बिजली के खंभो के पास न रहे
-धात्विक वस्तुओं से दूरी बना रखे
- आपातस्थिति को छोड़कर मोबाइल, टेलीफोन का उपयोग न करें
- किसी जलस्त्रोत में तैर या नहा रहे हों तो निकल कर भूमि पर आ जाएं
- बिजली से बचाव के लिए भवनों, सार्वजनिक इमारतों के ऊपर तडि़त चालक जरूर लगवाना चाहिए।
Published on:
24 Aug 2019 05:52 pm
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