
एंबुलेंस की समस्या से जूझ रहा जिला अस्पताल
जांजगीर-चांपा. जिले में हाल ही में स्वास्थ्य विभाग द्वारा दो नई लक्जरी एसी एंबुलेंस स्वीकृत हुई है। जिसे सीएमएचओ ने जिला अस्पताल में रखने की बजाए नवागढ़ और सक्ती के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भेज दिया है। जबकि जिला अस्पताल में ऐसे वाहन की सख्त जरूरत थी।
हद तो तब हो गई जब सीएमएचओ ने नवागढ़ के खटारा एंबुलेंस का जिला अस्पताल में शिफ्ट करवा दिया है। जो भारी भरकम है और हमेशा बिगड़ा रहता है। स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक नई लक्जरी एसी एंबुलेंस की जिला अस्पताल में अधिक जरूरत थी।
जिला अस्पताल में गिनती के तीन-तीन एंबुलेंस है, लेकिन दो ही काम चलाउ है दो पूरी तरह से खटारा हो चुकी है। हाल ही में नवागढ़ से जांजगीर शिफ्ट की गई एंबुलेंस भारी भरकम और खटारा हो चुकी है। जो कौड़ी काम की नहीं है।
समस्या को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने हाल में दो लक्जरी एसी एंबुलेंस (डीप फ्रिजर शव वाहन)स्वीकृत की है। जिसे सीएमएचओ ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए नवागढ़ और सक्ती भेज दिया है।
जिसके चलते जिला मुख्यालय के लोगों में अच्छा खासा रोष व्याप्त है। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में हर रोज आधा दर्जन मरीजों को लाना लेजाना रहता है। यदि बड़ा लक्जरी एसी एंबुलेंस होता तो यहां अधिक उपयोगी साबित होता। लेकिन यहां के मरीजों को खटारा एंबुलेंस ही नसीब हो रहा है। जबकि यहां नई लक्जरी एसी एंबुलेंस (डीप फ्रिजर शव वाहन) की सख्त जरूरत थी।
इसलिए भी आवश्यकता
स्वास्थ्यकर्मियों के मुताबिक नवागढ़ से जांजगीर के जिला अस्पताल में शिफ्ट की गई एंबुलेंस पूरी तरह से खटारा हो चुकी है। इसमें सवारी करना भी मरीजों के जान से खिलवाड़ है। अमूमन जिला अस्पताल में गांव गांव के मरीज अधिक भर्ती होते हैं।
जिन्हें गांव की गलियों तक छोडऩा होता है। खटारा भारी भरकम एंबुलेंस गांव की गलियों तक नहीं जा पाती। जिसके चलते मरीजों को गांव के बाहर ही छोडऩा पड़ता है। इस तरह की तकनीकी कारणों से सीएमएचओ को कोई सरोकार नहीं है। उन्हें तो बस एसी कमरे में बैठकर मनमर्जी से प्लानिंग करना आता है। लोगों की समस्या से कोई सरोकार नहीं है।
डीप फ्रिजर शव बॉक्स भी काम की नहीं
जिला अस्पताल में हाल ही में डीप फ्रिजर शव बॉक्स भी उपलब्ध कराए गए हैं। जिसका इस्तेमाल बखूबी नहीं हो पा रहा है। यह डीप फ्रिजर शव बाक्स भारी भरकम है।
जिसे उठाने में भी पांच से दस लोगों की जरूरत पड़ती है। जब इस बाक्स को ही उठाने में इतने लोगों की जरूरत पड़ रही है तो शव रखकर उठाने में कितने लोगों की जरूरत पड़ेगी अंदाजा लगाया जा सकता है। भारी भरकम इक्युप्मेंट होने के कारण यह उपकरण बेकाम साबित हो रहा है।
वाहनों की आपूर्ति
मांग के हिसाब से वाहनों की आपूर्ति की गई है। नवागढ़ और सक्ती में ऐसे वाहनों की जरूरत थी। जिसे देखते हुए यह व्यवस्था बनाई गई है।
-डॉ. वी जयप्रकाश, सीएमएचओ
Published on:
28 May 2018, 8:19 PM IST
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