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इस अस्पताल में कराना है मलहम-पट्टी तो अपने साथ लेकर आएं सारे सामान, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी

Health News: मरीजों को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ, मरीज परेशान

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इस अस्पताल में कराना है मलहम-पट्टी तो अपने साथ लेकर आएं सारे सामान, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी

इस अस्पताल में कराना है मलहम-पट्टी तो अपने साथ लेकर आएं सारे सामान, नहीं तो बढ़ सकती है परेशानी

जांजगीर.चाम्पा. अचानक आपकी सेहत बिगड़ जाए या सड़क दुर्घटना का शिकार हो जाएं तो इस अस्पताल में जाने से पहले अपने साथ इलाज के सारे सामान ले जाएं, नहीं तो परेशानी में पड़ सकते हैं। जी हां नवागढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का हाल बेहाल है। यहां जख्म पर पट्टी करने के लिए या टांका लगाने के लिए धागा, सुई, रूई से लेकर मलहम तक भी बाहर से खरीदकर लाना होता है, तब जाकर इलाज हो पाता है। अस्पताल में इलाज के लिए किसी प्रकार की व्यवस्था नहीं है।

ऐसा ही एक नजारा गुरुवार को देखने को मिला। नवागढ़ जनपद में कार्यरत इंजीनियर नीतू शुक्ला आफिस जा रही थी, इसी दौरान पोड़ीराछा के पास बाइक से गिर गई। इससे उसके सिर, ओठ व चेहरे पर गंभीर चोटें आई। आसपास के लोगों ने उसे तत्काल सीएचसी नवागढ़ ले जाकर भर्ती कराया गया। यहां डॉक्टरों द्वारा उसका प्राथमिक इलाज करना शुरू किया गया। मरीज को टांका लगाना था, लेकिन टांका लगाने का कोई भी सामान अस्पताल में नहीं था।

मरीज के परिजन व स्टॉफ जब पहुंचे तो उसे टांका लगाने के लिए सुई, धागा, मलहम सहित अन्य सामान को बाहर मेडिकल स्टोर्स से लाने के लिए कहा गया। इस दौरान वह दर्द से कराहती रही। जब घायल के परिजन पूरा सामान लेकर अस्पताल पहुंचे तब डॉक्टरों द्वारा इलाज शुरू किया गया।

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एक तरफ सरकार प्रदेश के स्वास्थ्य सुविधा सुधारने के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है। इसके बाद भी मरीजों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जिले में बदहाल स्वास्थ्य सुविधा को लेकर नवागढ़ सीएसची हमेशा सुर्खियों में रहता है। चाहे वह कार्यालयीन समय में डॉक्टर के अनुपस्थिति को लेकर हो या समय में मरीजों के सही उपचार नहीं होने को लेकर।

प्रायवेट में कराएंगे इलाज
गुरुवार को नवागढ़ सीएचसी में घायल को लेकर अस्पताल पहुंचे जितेन्द्र का कहना है कि घायल को अस्पताल लेकर गए थे, एक दवाई सहित अन्य टांका का पूरा सामान बाहर से खरीदने के लिए कहा गया। जब बाहर से ही पैसा देकर दवा खरीदनी है तो फिर सरकारी अस्पताल का क्या फायदा है। इससे अच्छा तो प्रायवेट अस्पताल में ही इलाज कराएंगे।

फोड़ा-फूंसी तक का आपरेशन नहीं
जिले में 9 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र चल रहे हैं। मेजर और माइनर ओटी की भी सुविधा है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि यहां आज तक फोड़ा-फूंसी तक का ऑपरेशन नहीं होता। इसके अलावा जिले में प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है। यहां मरीज तो आते हैं लेकिन डॉक्टर कभी-कभार ही मिलते हैं।

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जांजगीर चंपा

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