
जनहित के कार्य में खर्च करने वाली राशि पर कुंडली मार कर बैठे हैं अधिकारी
जांजगीर-चांपा। सेवा, एकता, मानवता सहित ढेर सारे जनहित के कार्य के नाम पर छात्रों से ली गई रेडक्रास की फीस विभागीय दफ्तरों में धूल फांक रही है। जनहित के कार्य में खर्च करने वाली राशि पर अधिकारी कुंडली मार बैठे हुए हैं। बीते पांच सालों में इस फंड में 15 से 20 लाख रुपए से भी अधिक राशि जमा है। जिसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। जबकि इस मद की राशि का सेवा कार्य में खर्च किया जाना है, लेकिन इतनी बड़ी राशि कहां खर्च की जाती है किसी को पता भी नहीं चलता।
शारीरिक स्वास्थ्य की उन्नतिए पीडि़तों की सहायता सहित अन्य उद्देश्यों के लिए 27 मार्च 1920 में समूचे देश में गठित रेडक्रास सोसायटी का जिले में बुरा हाल है। रेडक्रास समिति के नाम पर स्कूली बच्चों से फीस के नाम पर तगड़ी वसूली तो हो रही, लेकिन स्कूली बच्चों के हित के लिए कोई गतिविधि संचालित नहीं की जा रही है। रेडक्रास बच्चों की शाखा है। जो केवल स्कूलों से संबंध रखता है। इस शाखा में 12 से 17 वर्ष आयु वर्ग के छात्र इसके सदस्य होते हैं। इसके लिए हाईस्कूल एवं हायरसेकंडरी स्कूल के बच्चों से फीस लिया जाता है।
Read More : आंधी-तूफान में इस पेड़ के नीचे रहने वाले लोगों को सताता है मौत का डर, जानें वजह...
जानकारी के अनुसार प्रत्येक छात्रों से 75 रुपए से लेकर 100 रुपए तक फीस जमा करते हैं। दुख की बात यह है कि स्कूली छात्र फीस के रूप में मोटी रकम जमा जरूर करते हैं, लेकिन उन्हें इस राशि की फूटी कौड़ी भी इस्तेमाल करने को नहीं मिलता। स्कूलों में न तो खेल सामग्री दी जाती और न ही फस्र्ट एड बाक्स मिलता। आखिरकार यह राशि तीन से चार अधिकारियों के खाते की शोभा बनकर रह जा रही।
चार विभाग में जमा
स्कूलों से ली गई यह फीस चार भाग में बंट जाती है। एक भाग कलेक्टोरेट, दूसरा जिला शिक्षा अधिकारी, तीसरा स्वास्थ्य विभाग व चौथा राज्य कार्यालय में जमा हो जाती है। इस फंड का उपयोग सेवा भावी कार्य के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन जिम्मेदार इस राशि का उपयोग करने की बजाए कुंडली मारे जमे हुए होते हैं। बताया जा रहा है इस मद की राशि का उपयोग जनहित के लिए किया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं।
इसलिए नहीं करते खर्च
विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि इस मद की राशि का उपयोग तब किया जाता है जब रायपुर से या फिर कलेक्टर से कोई विशेष निर्देश आता है। इसके अलावा किसी विशेष दिनों में बैठकें होती है तब इस मद की राशि का उपयोग कर चाय नास्ता सहित अन्य मदों में खर्च किया जाता है। इसके अलावा इस राशि का खर्च करने के लिए कलेक्टर से विशेष निर्देशन मिलता है। या कलेक्टर चाहे तो इस मद का उपयोग कर सकते हैं।
कहां होनी चाहिए खर्च
अनाथ बच्चों की सेवा, रोगियों व वृद्धों की सेवा, अपाहिजों की सेवा, प्राथमिक उपचार प्रशिक्षण, जीवन रक्षा, स्वास्थ्य शिक्षा, रोगों से रक्षा, स्कूली बच्चों का डॉक्टरी परीक्षण, रक्त समूह परीक्षण, पुनर्वास, रक्तदान जागृति, पर्यावरण सुरक्षा
क्या है बुनियादी सिद्यांत
मानवता, निष्पक्षता, तटस्थता, स्वतंत्रता, स्व प्रेरित सेवा, एकता, सार्वभौमिकता।
सीधी बात : जीपी भास्कर, डीईओ
सवाल : रेड क्रास की फीस कहां जमा होती है?
जवाब : कलेक्टोरेट, डीईओ व स्वास्थ्य विभाग में।
सवाल : स्कूलों से शुल्क के नाम पर कितनी राशि आई?
जवाब :10 से 15 लाख रुपए।
सवाल : इस राशि का किस तरह खर्च होना चाहिए?
जवाब : सामाजिक सरोकार पर।
सवाल : पर क्यों नहीं किया जा रहा?
जवाब : कलेक्टर के निर्देशन में काम होता है।
सवाल : कभी किसी को आर्थिक मदद किए?
जवाब : अब तक नहीं।
Published on:
19 May 2018 07:21 pm
बड़ी खबरें
View Allजांजगीर चंपा
छत्तीसगढ़
ट्रेंडिंग
