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हार्वेस्टर से धान कटाई का रेट सुनकर किसानों के छूट रहे पसीने

- समर्थन मूल्य में धान खरीदी हो चुकी है शुरू

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हार्वेस्टर से धान कटाई का रेट सुनकर किसानों के छूट रहे पसीने

हार्वेस्टर से धान कटाई का रेट सुनकर किसानों के छूट रहे पसीने

जांजगीर-चांपा. अंचल के किसानों का पूरा ध्यान अब खेतों में धान की फसल को जल्द से जल्द कटाई करा लेने की ओर है। क्योंकि आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव करीब है। पर हार्वेस्टर से धान कटाई का रेट सुनकर किसानों को पसीने छूटने लगे है। अमूमन गांवों में दीपावली के बाद की कटाई तेज होती है। लेकिन अर्ली वेरायटी के धान पककर तैयार हो चुका है। इस कारण किसान इस धान को खेत में छोडऩा नहीं चाह रहे और कटाई शुरू कर दी हैं। गांवों में इसके लिए हार्वेस्टर पहुंच चुके हैं। पर यह काफी महंगा सौदा होता है।

जिले में समर्थन मूल्य में धान खरीदी शुरू हो चुकी है। जिसे देखकर किसान धान कटाई शुरू कर दिए हैं। ताकि जल्द के मिंजाई करा कर उसे समितियों में बेचा जा सके। कहीं कोई मजदूरों से धान कटाई करवा रहा है तो कहीं कोई हार्वेस्टर से धान कटाई करवा रहा है। पिछले कुछ सालों से संपन्न किसानों का रुझान हार्वेस्टर से धान कटाई कराने की ओर बढ़ा है। इससे एक तो धान की कटाई जल्दी होती है, धान साफ सुथरा रहता है। खेत से ही धान बेचने के लिए ले जाया जा सकता है। जिले में इस साल अभी से इतने हार्वेस्टर आ गए हैं। यदि हार्वेस्टर से धान कटाई कराई जाए तो कुछ ही दिन में कटाई पूरी हो सकती है। इस बार फसल मौसम के कारण अच्छी नहीं है। खासकर अकलतरा, बलौदा विकासखंड में जितना धान होना चाहिए, खेतों में नहीं दिख रहा है। उस पर धान कटाई का रेट ऐसा है कि सुनकर पसीने छूट रहे है।

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किसका, कितना बढ़ गया है रेट
इसका प्रमुख कारण डीजल का रेट बढऩा बताया जा रहा है। किसानों ने बताया कि पिछले साल हार्वेस्टर से धान कटाई प्रति एकड़ 1५00 से 1६00 रुपए था। जो इस साल दो हजार से 2५00 रुपए तक पहुंच गया है। मजदूरों से धान कटाई पिछले साल 1५00 रुपए प्रति एकड़ था। जो इस वर्ष बढ़कर दो हजार रुपए हो गया है। बलौदा के सुरित राम साहू ने कहा कि उसको यह चिंता सता रही है कि बाल बच्चों का पेट कैसे पालेगा।

छोटे किसानों की परेशानी
धान कटाई का रेट उन किसानों के लिए ज्यादा है, जो छोटे या मध्यम किसान हैं। ऐसे किसानों का कहना है कि मौसम में आए उतार चढ़ाव के कारण उनके खेत में कहीं दो बोरा प्रति एकड़, तो कहीं चार बोरा प्रति एकड़ धान हाथ आना है। ऐसे किसान 2000-२५०० रुपए देकर धान कटाई कराने की स्थिति में नहीं है। उनके खेतों में धान की बालियां निकलने से पहले ही पौधे मर चुके थे। वह हार्वेस्टर से धान कटाई का पैसा कैसे दे पाएंगे।

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