जिले में लगातार बढ़ रहे उद्योग, बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने विभाग नाकाम, जिला मुख्यालय सहित एक दर्जन से अधिक गांव प्रभावित

आसपास के एक दर्जन गांवों के घरों में धीरे-धीरे धुआं व राखड़ जमने लगा है। बताया जा रहा है कि मड़वा प्लांट में धुआं नियंत्रित करने ईएसपी लगाया गया है, लेकिन उसे ज्यादातर बंद रखा जाता है

By: Shiv Singh

Published: 30 Dec 2018, 09:29 PM IST

जांजगीर-चांपा. जिले में पॉवर प्लांटों एवं अन्य उद्योगों से निकलने वाले काले धुएं के कारण लोगों का जीना मुहाल हो गया है। संबंधित कारखानों में धुआं से होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए र्ईएसपी नहीं लगाने के कारण जांजगीर, चांपा सहित एक दर्जन से अधिक गांवों में लोग प्रदूषित जीवन जीने मजबूर हैं। इस संबंध में ग्रामीणों की शिकायत पर ध्यान नहीं देने से उनमें आक्रोश बढ़ रहा है।

जिले के औद्योगिकीकरण का दुष्प्रभाव अब सामने आने लगा है। हालांकि शासन ने औद्योगिकीकरण से होने वाले नाकारात्मक प्रभावों को खत्म करने बहुत से नियम व प्रावधान किए हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन की कमजोरी के चलते संबंधित कारखानों में नियमों की अनदेखी हो रही है। जिला मुख्यालय जांजगीर से लगे ग्राम मड़वा, तेंदूभांठा, बसंतपुर, लछनपुर, कुदरी, दर्राभांठा की सीमाओं में ५००-५०० मेगावाट की शासन की योजना मड़वा-तेंदूभांठा परियोजना संचालित है। इसके साथ ही और भी कई पावर प्लांट भी संचालित है, जो भूसा आधारित प्लांट है, जिसमें संचालक कोयले का धड़ल्ले से उपयोग कर रहे हैं। इन दोनों की कारखानों से निकलने वाले धुएं के कारण लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है।

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आसपास के एक दर्जन गांवों के घरों में धीरे-धीरे धुआं व राखड़ जमने लगा है। बताया जा रहा है कि मड़वा प्लांट में धुआं नियंत्रित करने ईएसपी लगाया गया है, लेकिन उसे ज्यादातर बंद रखा जाता है, लेकिन कई प्लांट में तो ईएसपी लगाना ही उचित नहीं समझा गया है। इससे धुएं के साथ भूसे की राखड़ उड़कर घरों में जमने लगी है। प्लांट के धुएं व राखड़ से परेशान संबंधित गांवों के लोगों ने जिला प्रशासन सहित पर्यावरण संरक्षण मंडल को भी शिकायत पत्र प्रेषित किया है, लेकिन विगत दो माह के दौरान अधिकारियों द्वारा आश्वासन ही दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने बताया कि इस क्षेत्र के लोगों में कुछ विशेष तरह की बीमारियां सामने आने लगी है, जिसके कारण डॉक्टरों ने धुआं को बताया है। कोयला व भूसा जलने से धुआं व राखड़ आबोहवा में जहर घोल रहे हैं।

राइस मिलरों पर भी नहीं हुई कार्रवाई
राइस मिलों के खिलाफ भी जिला मुख्यालय के लोगों ने पर्यावरण विभाग के अधिकारियों से शिकायत की थी। जिस पर अधिकारियों ने आज तक नजरें इनायत नहीं की है। जिसके चलते लोगों का गुस्सा फूट रहा है। गौरतलब है कि केरा रोड जांजगीर के लोगों ने आसपास के राइस मिलों से निकल रहे धुएं को लेकर कलेक्टर एवं पर्यावरण के अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन पर्यावरण के अधिकारी आज तक लोगों को आश्वासन देते रहे कि इस मामले की जांच कराई जाएगी, पर आज तक कर्मचारियों ने इधर ध्यान नहीं दिया।

-जिले के कई पावर प्लांट व राइस मिलर्स द्वारा अत्यधिक धुआं व राखड़ उत्सर्जन करने की शिकायत मिली है। कारखाना प्रबंधक को धारा ३१ क के तहत नोटिस जारी किया गया है। व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर कार्रवाई के साथ अन्य प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
अनिता सावंत, क्षेत्रिय अधिकारी पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड

Shiv Singh Desk
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