
जांजगीर-चांपा. संजीवनी व महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारियों ने सोमवार को एक दिन के लिए काम बंद कर दिया। वेतन सहित अन्य मांगों को लेकर कर्मचारियों ने कचहरी चौक के सामुदायिक भवन में धरने पर बैठकर प्रदर्शन करते रहे, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं था। इधर कर्मचारियों के काम बंद करने के बाद प्रबंधन ने नौसीखि, कर्मचारियों से किसी तरह काम कराया। कई वाहन अपने-अपने स्थानों में ही खड़ी रही, जिसके चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा।
संजीवनी व महतारी एक्सप्रेस के कर्मचारी वेतन सहित अन्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। पिछले दो सालों से कर्मचारी जैसे-तैसे न्यूतम मजदूरी में काम करने विवश हैं। वे पिछले एक सालों से लगातर धरना प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों का ज्ञापन स्वास्थ्य मंत्री एवं मुख्यमंत्री को सौंपते आ रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर विचार नहीं हो रहा। जिसके चलते कर्मचारियों ने सोमवार को फिर एक दिवसीय धरने पर बैठ गए।
कर्मचारियों ने सोमवार को कचहरी चौक के सामने सामुदायिक भवन में धरना प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी करते रहे। लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई। कर्मचारियों का कहना है कि शासन के श्रम विभाग द्वारा अप्रैल 2017 से न्यूनतम मजदूरी दर में वृद्धि किया गया है। इसका भी लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं कर्मचारियों को समय पर वेतन भी नहीं दिया जा रहा है। जिसके चलते कर्मचारी खून के आंसू रोने मजबूर हैं। इस दौरान जीवीके कंपनी व कर्मचारियों के बीच सकारात्मक चर्चा जरूर होती है, लेकिन कंपनी केवल आश्वासन देकर काम पर लौटा देती है।
कंपनी द्वारा न्यूनतम मजदूरी दर शासन के निर्देशानुसार भी लागू करने राजी नहीं हो रही है। जिसके चलते कर्मचारियों को मजदूरी से बदतर जीवन यापन करना पड़ रहा है। चार-पांच साल काम करते हो गए। अब दूसरे स्थान में भी उन्हें काम नहीं मिल रहा है। जिसके चलते कर्मचारी परेशान हैं। सोमवार को सभी कर्मचारियों ने धरना प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी तरह नजरें इनायत नहीं की। जिसके चलते कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।
नहीं मिला लोगों को सुविधा का लाभ
कर्मचारियों के हड़ताल में जाने के बाद जिले के लोगों को संजीवनी व महतारी योजना का लाभ एक दिन के लिए नहीं मिला। मरीज संजीवनी व महतारी एक्सप्रेस को फोन लगाते थक गए, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल पा रहा था। कई स्थानों की संजीवनी को नौसीखिया कर्मचारियों से चलाए जाने की सूचना मिली, लेकिन यह सुविधा भी न के बराबर थी। आखिरकार सोमवार को जिले के लोगों को भटकना पड़ गया। लोगों ने मरीजों को खुद के साधन से अस्पताल तक पहुंचाया। सबसे बदतर स्थिति जिला अस्पताल में थी। जिला अस्पताल के मरीज खुद के साधन से आ जा रहे थे।
Published on:
01 Jan 2018 05:44 pm
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