
आधी-अधूरी तैयारियों के बीच सोमवार से खुलेंगे स्कूलों के पट, गूंजेंगी बच्चों की किलकारियां
जांजगीर-चांपा. आधी-अधूरी तैयारी के बीच सोमवार से नए शिक्षा सत्र की शुरूआत होने जा रही है। शासन के द्वारा शिक्षा के नाम पर पानी की तरह पैसा बहाए जाने के बाद भी एक बार फिर अभावों के बीच शासकीय स्कूलों के लाखों बच्चे भविष्य गढऩे जाएंगे। छात्रों के पास न तो गणवेश है, न पाठ्यपुस्तक, न पौष्टिक मध्यान्ह भोजन और न ही सिर छिपाने के लिए मजबूत भवन। आज भी जिले में दो दर्जन ऐसे जर्जर भवन में तालीम लेने को बच्चे मजबूर हैं जहां की छत न जाने कब सिर पर टपक जाए। व्यवस्था चाहे जैसी भी हो सोमवार की सुबह 7 बजे से डेढ़ माह से बंद हुई स्कूलों के पट खुलेंगे। वहीं बच्चों की किलकारियां गूंजेंगी।
शिक्षा विभाग ने नए शिक्षा सत्र की तैयारी पूरी कर ली है। नए शिक्षा सत्र की शुरूआत 18 जून से होने जा रही है। डेढ़ माह की गर्मी छुट्टी बिताने के बाद स्कूलों में सोमवार से किलकारियां गूंजेगी। शिक्षा विभाग स्कूल खुलने की तैयारी कर चुकी है। जिले के 1612 प्राईमरी व 793 मिडिल स्कूल के अलावा 134 हाई व 143 हायरसेकंडरी स्कूल संचालित है।
जिले भर में प्राइमरी व मिडिल स्कूल मिलाकर चार दर्जन ऐसे स्कूल भवन हैं जो पूरी तरह से जर्जर हैं। ब्रिटिशकालीन खपरैला वाले भवन में बच्चे जान जोखिम में डालकर भविष्य गढऩे मजबूर हैं। इन भवनों को डिस्मेंटल कर पक्के भवन बनाने के आदेश शिक्षा विभाग कर चुकी है। कई स्कूल भवनों का निर्माण चल रहा है। तो कई भवन बनने के बाद हैंडओवर के बाट जो रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब भवन बनने के बाद भी छोटी-छोटी तकनीकि खामियों के कारण हैंडओवर नहीं हो पा रहा।
खासकर सर्व शिक्षा विभाग के स्कूलों की हालत खराब है। अब भी एक दर्जन हाईस्कूल भवन को खुद का भवन नहीं मिल पाया है। नए भवन होने के बावजूद पुराने भवनों को ही उपयोग किया जा रहा है। बच्चे जान जोखिम में डालकर भविष्य गढऩे मजबूर हैं। जबकि आए दिन भवन गिरने की सूचना मिलते रहती है। बावजूद प्रशासन को बच्चों के भविष्य से कोई सरोकार नहीं रहता।
आरटीई के तहत नहीं हुई भर्ती
इस वर्ष शासन ने आरटीई के तहत ऑनलाइन भर्ती की शुरूआत की है। जिले के निजी स्कूल आरटीई के तहत गरीब बच्चों को प्रवेश लेने आनाकानी कर रहे हैं। जिले के एक हजार से अधिक निजी स्कूलों को तीन हजार छात्रों को प्रवेश देने टारगेट दिया गया है, लेकिन अब तक दो हजार छात्रों की ही भर्ती ली गई है। निजी स्कूल संचालक गरीब बच्चों को भर्ती लेने में आनाकानी कर रहे हैं। गरीब बच्चों को हिला हलावा करके भर्ती नहीं ली जा रही है। जबकि निजी स्कूल संचालकों को शासन गरीब बच्चों की फीस के लिए करोड़ो रुपए का भुगतान करती है।
शिक्षकों की कमी बरकरार
स्कूलों में अभी भी सैकड़ों शिक्षकों की कमी बरकरार है। भले ही इसके लिए भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन अभी भी दो दर्जन से अधिक स्कूल एकल शिक्षकीय है। हद तो तब हो जा रही है जब हाई एवं हायरसेकंडरी स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की कमी बरकरार है। जितने शिक्षक हैं उन्हीं से जैसे तैसे काम लिया जा रहा है। सरकार एक तरफ शिक्षा गुणवत्ता वर्ष मना रही है तो वहीं दूसरी तरफ स्कूलों में शिक्षकों की कमी गुणवत्ता की पोल खोल रही।
नहीं बटीं किताबें
जिले के शासकीय स्कूलों में तो किताबों का वितरण हो चुका हैए लेकिन निजी स्कूलों में किताबों का वितरण अब तक नहीं हो पाया है। लक्ष्य के मुताबिक 414 स्कूलों को 17 जून तक निरूशुल्क किताबों का वितरण किया जाना था, लेकिन अब तक मात्र 200 निजी स्कूलों तक ही पुस्तक वितरण हो पाई है। शासन इस वर्ष पुस्तक वितरण की प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दी है। इसके चलते स्कूल संचालक पुस्तक उठाव के लिए डीईओ का चक्कर काट रहे हैं। बड़ी मुश्किल से उन्हें पुस्तक किया जा रहा है।
फैक्ट फाइल
पेयजल विहीन 90
विद्युत विहीन 42
अहाता 105
फर्नीचर विहीन 140
भवन विहीन 25
जर्जर स्कूल 20
सीधी बात : जीपी भास्कर, डीईओ
सवाल : स्कूलों के पट कल से खुलेंगे तैयारी कैसी है?
जवाब : कलेक्टर द्वारा सभी प्राचार्यों की बैठक लेकर तैयारी का जाएजा लिया गया है।
सवाल : स्कूलों में गणवेश नहीं बटा है?
जवाब : गणवेश के लिए प्रपोजल बनाकर भेज दिया गया है।
सवाल :निजी स्कूलों तक किताबें भी नहीं पहुंची है?
जवाब : सरकारी स्कूलों तक किताबें पहुंच चुकी, निजी स्कूलों में वितरण किया जा रहा।
सवाल : शिक्षकों की कमी बरकरार है?
जवाब : ये शासन स्तर की बात है, फिर भी बहुत कम स्कूलों में शिक्षकों की कमी है।
सवाल : दो दर्जन स्कूल जर्जर, एक दर्जन भवन निहीन स्कूल है?
जवाब:ऐसे स्कूलों की रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है।
Published on:
17 Jun 2018 08:54 pm

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