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हैंडओवर से पहले ही भवन में सीपेज, 50 फीसदी कमीशन की डंडी मार गए अफसर

हैंडओवर के पहले ही जर्जर होते दिखाई दे रहा है। वहीं मकान के दीवारों में चारों ओर दरारें पड़ गई है।

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हैंडओवर से पहले ही भवन में सीपेज, 50 फीसदी कमीशन की डंडी मार गए अफसर

हैंडओवर से पहले ही भवन में सीपेज, 50 फीसदी कमीशन की डंडी मार गए अफसर

जांजगीर-चांपा. जांजगीर के हसदेव विहार कालोनी में हाउसिंग बोर्ड बीते सालों से इडब्ल्यूएस के 30 मकान बना रहा है। यह मकान अभी निर्माणाधीन है। भवन इतना घटिया स्तर की बनाई जा रही है कि पहली बारिश के बूंदाबांदी भी सहन नहीं कर सका और मकानों में सीपेज आने लगा है।

मकान के चारों ओर दरारें आ गई है। जिसके चलते मकान रहने लायक नहीं है। जबकि अभी मकान हैंडओवर भी नहीं हो पाया है। हाउसिंग बोर्ड के अफसरों की कार्यशैली को देखकर मानों ऐसा प्रतीत हो रहा है कि जिम्मेदार विभागीय अफसरों ने मकान बनाने में आधी रकम भी खर्च नहीं किए हैं और सीधे सीधे 50 फीसदी कमीशन की डंडी मार गए हैंं।

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आदमी अपनी खून पसीने की कमाई का पाई पाई जोड़कर मकान बनाता है। सपनों के मकान में उसकी उम्मीद रहती है कि कम से एक पीढी तो उस मकान में गुजार लेए लेकिन वही मकान जब उसकी उम्मीदों पर खरा न उतरे और शुरूआती दौर में मकान में दरारें और सीपेज आ जाए तो उसकी गाढ़ी मेहनत की कमाई पर पानी फिर जाता है। कुछ इसी तरह का काम हाउसिंग बोर्ड ने किया है।

जनवरी 2017 में हाउसिंग बोर्ड ने जिला मुख्यालय में इडब्ल्यूएस के 30 मकान बनाए हैं। यह मकान अभी तैयार हो रहा है। 90 फीसदी मकान बन चुका है। केवल फिनिसिंग का काम रह गया है। हद तो तब हो गई जब मकान हैंडओवर के पहले ही जर्जर होते दिखाई दे रहा है। वहीं मकान के दीवारों में चारों ओर दरारें पड़ गई है। इतना ही नहीं जांजगीर में एक दिन केवल 15 मिनट बारिश हुई है और मकान में सीपेज आ रहा है। इसके चलते मकान मालिकों को उनका अपना मकान देखकर आंसूं टपक रहा है। उनका कहना है कि अभी मकान हैंडओवर भी नहीं हो पाया है तो आगे मकान की क्या स्थिति होगी अंदाजा लगाया जा सकता है।

फर्स उखड़े सीढिय़ां भी टूटी
मकान में किया गया फर्स अभी से उखडऩे लगा है। मकान के द्वार में जो सीढिय़ां लगाई है वह भी पूरी तरह से टूट चुकी है। मकान में एक मिनट चलने लायक व न रहने लायक है। मकान में वही रह सकता है जो उसकी नए सिरे से फिर से मरम्मत करा सके। 30 मकान के घटिया निर्माण के चलते 30 परिवारों में अच्छा खासा रोष व्याप्त है। सभी मिलकर हाउसिंग बोर्ड का घेराव करने की बात कही है।

चला कमीशन का खेल
बताया जा रहा है कि पूरे मकान को चांपा का मोदी नाक का ठेकेदार बनाया है, जो मानक को ताकपर रख मकान बनाया है। मकान निर्माण में खुलकर भर्राशाही की गई है। मकान की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि मकान को बनाने में दो लाख की भी लागत नहीं आई है। जबकि सरकार यानी हाउसिंग बोर्ड मकान मालिकों से 6 लाख 35 हजार रुपए ली है। हालात को देखते हुए मकान मालिकों के शुरूआती दौर में मोहभंग होने लगा है।

कमीशन लेने आते हैं एसडीओ
हाउसिंग बोर्ड के मकान की मॉनिटरिंग सही सलामत नहीं हो पाती। यही वजह है कि मकान निर्माण में ठेकेदार ने खुलकर भर्राशाही की गई है। बताया जा रहा है कि हाउसिंग बोर्ड का एसडीओपी सिंह अंबिकापुर में रहते हैं और वे केवल जांजगीर तब आते हैं जब उसे ठेकेदार द्वारा कमीशन लेना रहता है। उनके द्वारा न तो आज तक निर्माण स्थल की मॉनिटरिंग की गई है और न ही निर्माणाधीन मकान को झांककर देखा गया है। जिसके चलते मकान शुरूआती दौर में ही जर्जर दिखाई दे रहा है।

-मकान में गुणवत्ता की अनदेखी की शिकायत अभी नहीं मिली है। पहली शिकायत आप से मिली है। यदि मकान में ऐसा है तो मरम्मत कराया जाएगा और ठेकेदार को पनिसमेंट दिया जाएगा- एसपी सिंह, एसडीओ, हाउसिंग बोर्ड

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