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अफसरों का जवाब ही नहीं.. ऑफिस में ही बैठकर बर्बाद फसलों को बता दिया सही, किसानों की बढ़ी चिंता

Chhattisgarh News : मैदानी इलाके में निरीक्षण करने टीम पहुंची ही नहीं है और कह रहे हैं कि स्थिति सामान्य है, अब धान की फसलें संभल गई है।

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FARMER-DISCOM MEETING----किसानों का आंदोलन 1 तक टला, क्यों टला आंदोलन, पढि़ए पूरी खबर

FARMER-DISCOM MEETING----किसानों का आंदोलन 1 तक टला, क्यों टला आंदोलन, पढि़ए पूरी खबर

पेनिकल माइट (अदृश्य मकड़ी) का हमला धान के फसलों पर होने की खबर प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग ने जांच टीम गठित की, साथ ही सप्ताह भर के अंदर रिपोर्ट सौंपने कहा गया। निरीक्षण टीम कागजों में ही जांच कर अफसर को रिपोर्ट सौंप दिया है।

मैदानी इलाके में निरीक्षण करने टीम पहुंची ही नहीं है और कह रहे हैं कि स्थिति सामान्य है, अब धान की फसलें संभल गई है। जबकि अधिकांश किसानों का कहना है कि 30 से 40 प्रतिशत फसल इस मकड़ी के प्रकोप से बर्बाद हो गया है।

जिले में 2 लाख 54 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगाई है, लेकिन इस बार किसान अंतिम समय खड़ी फसल होने के बाद भी किसानों की चिंता बढ़ी हुई है। क्योंकि धान के फसलों पर एक अद्श्य मकड़ी ने हमला कर दिया है। इसका साइंटिफिक नेम पेनिकल माइट है, जो बालियां को इस तरह से शिकार बनाती है कि किसानों को पता नहीं चलता और खड़ी-खड़ी फसल काली-भूरी हो जा रही है। इसकी खबर पत्रिका ने प्रमुखता से 3 नवंबर के अंक में प्रकाशित किया। इसके बाद कृषि विभाग की टीम निरीक्षण टीम गठित की। इसमें सहायक संचालक कृषि इलेक्जेंडर कुजूर नोडल अधिकारी, रंजीत मोदी कृषि वैज्ञानिक, एसएस यादव वरिष्ठ कृषि अधिकारी सहित अन्य शामिल है। टीम को धान के कीट, व्याधि से ग्रसित फसलों का निरीक्षण कर प्रति सप्ताह रिपोर्ट प्रतिवेदन के माध्यम से अवगत कराने निर्देशित किया गया। पहले सप्ताह टीम आफिस में ही बैठकर रिपोर्ट तैयार कर लिए और कृषि उपसंचालक को सौंप दिए। जिसमें कहा गया कि कहीं कोई नुकसान नहीं हुआ है, साथ ही फसलें संभल गई है, अब तो फसलें पककर तैयार हो गया है। जबकि जिले के नवागढ़, पामगढ़, डभरा, सक्ती, अकलततरा के किसानों का कहना है कि निरीक्षण टीम फसलों की जांच के लिए पहुंचे ही नहीं है। पहली बार कीट व्याधि से इस प्रकार का बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है। इसके पहले कभी ऐसा नुकसान नहीं हुआ था।

क्या कहते हैं किसान
नवागढ़ विकासखंड के गांव गौद निवासी रेशमलाल सूर्यवंशी का कहना है कि 7 से 8 एकड़ फसल में बोनी किया हूं। इसमें दो एकड़ फसल ठेका में लेकर बोनी किया हूं, जिसमें बहुत ज्यादा मकड़ी का प्रकोप है, इसमें लगभग 5 से 7 बोरा ही धान निकल पाएगा। बाकी फसलें पूरी तरह से बर्बाद हो गई। इसी तरह भोजराम प्रधान का कहना है कि उनका भी 50 प्रतिशत फसल मकड़ी के प्रकोप से बर्बाद हो गई है।

फसल बर्बाद, अब कृषि विभाग दे रहा सलाह
कृषि विभाग की निरीक्षण टीम दूसरे सप्ताह में मेहंदा व सेवई गांव में फसलों का निरीक्षण करने पहुंचे। पहली सप्ताह केवल कागजों में रिपोर्ट तैयार कर सौंप दिया गया। अब जिले के लगभग सभी किसानों का लगभग 30 से 40 प्रतिशत फसल बर्बाद हो गई तो किसानों को कृषि विभाग सलाह दे रहे हैं। जिसमें अब कह रहे हैं मकड़ी के प्रकोप से बचने दलहनी, तिलहनी फसल लगाएं, एक ही किस्म का लगातार उपयोग न करें, पौधे की उचित दूरी रखें।

कृषि उपसंचालक एमडी मानकर ने कहा कि पेनिकल माइट के लिए निरीक्षण दल का गठन किया गया है। पहली सप्ताह जांच रिपोर्ट टीम ने सौंपी है। इसमें अब फसलें संभलने, कहीं कोई ज्यादा नुकसान नहीं होने की बात कही गई है। जहां इसका ज्यादा प्रकोप है, वहां फिर से टीम को भेजी जाएगी।