
CG Assembly Elections : चुनाव आयोग ने खर्च की सीमा की तय, एक-एक समोसे व पानी पाउच का भी देना होगा हिसाब
जांजगीर-चांपा. शनिवार से चुनाव आचार संहिता लगने के बाद विधानसभा चुनाव की बिगुल बज गई है। विभिन्न राजनैतिक पार्टियों के हाथ पांव फूलने लगे हैं। पार्टी के पदाधिकारी एक ओर अपनी सीट पक्की करने के लिए सारी कवायद कर रहे हैं वहीं चुनाव आयोग भी चुनाव की तैयारी के लिए नित नए नियम बनाकर लोगों के सामने परोस रही है। ताकि सही सलामत चुनाव संपन्न हो सके। विधानसभा चुनाव के प्रत्याशियों के लिए चुनाव आयोग ने खर्च की सीमा भी तय कर दी है। प्रत्येक प्रत्याशियों को चुनाव से पहले एक नया बैंक अकाउंट खुलवाकर चुनाव के खर्च का ब्योरा देना होगा।
प्रत्येक प्रत्याशी 28 लाख रुपए से अधिक खर्च नहीं कर सकेंगे। पिछले विधानसभा चुनाव में खर्च की सीमा 20 लाख थी। उन्हें चुनाव के दौरान प्रचार-प्रसार करते वक्त अपने मतदाताओं को रिझाने के लिए यदि एक समोसा खिलाकर पानी का पाउच पिला रहे हैं तो इसकी गिनती की जाएगी और आयोग को खर्च का हिसाब देना पड़ेगा। इसके लिए चुनाव आयोग की पैनी नजर रहेगी। चुनाव प्रचार के सभा के दौरान छोटे एवं बड़े पंडालों की खर्च सीमा भी तय कर दी गई है। प्रत्येक खर्च का हिसाब तय कर दी गई है। यदि सीमा से अधिक खर्च हुआ तो प्रत्याशियों पर गाज गिर सकती है।
शनिवार को चुनाव-आचार संहिता लगने के बाद जांजगीर चांपा जिले में दूसरे चरण में यानी 20 नवंबर को मतदान होना है। इसके लिए प्रशासनिक कवायद शुरू हो चुकी है। प्रत्याशियों को जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बैठक लेकर खर्च की सीमा सहित अन्य जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही है। प्रत्याशियों को यह बताया जा रहा है कि किस मद में कितना खर्च करना है।
पोस्टर, बैनर, होर्डिंग्स की साइज सहित हर खर्च के लिए दर निर्धारित कर दी गई है। प्रचार प्रसार के दौरान वाहनों की संख्या व इसके लिए खर्च का ब्योरा सहित सारी जानकारी प्रत्याशियों को बताई जा रही है। यहां तक कि समोसे की कीमत 10 रुपए से अधिक नहीं दर्शा सकते। जलेबी 50 ग्राम खिलाया जा रहा है तो इसकी कीमत 10 रुपए से अधिक नहीं बता सकते। चाय के लिए प्रति कप पांच रुपए निर्धारित किया गया है। इससे अधिक की राशि का ब्योरा दिया तो समझो नेताजी संदेह के दायरे में आ जाएंगे।
इसी तरह वॉल पेंटिंग, स्वागत के लिए माला, टी-शर्ट, कपड़े, गुलदस्ता, बैंड बाजा, टोपी, चप्पल, छाता, साड़ी सहित चुनाव प्रचार के लिए जितने भी सामान इस्तेमाल किया जा रहा है इसकी जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी। इसके अलावा पंडाल की साइज, लाइट, पंखा, टेबल, जनरेटर, ट्यूब लाइट, बेरिकेट्स, बांस, बल्ली की गिनती के खर्च का ब्योरा देना होगा। सारे खर्च के लिए चुनाव आयोग की टीम पैनी नजर लगाए रहेगी।
सोशल मीडिया पर खर्च का भी हिसाब रखी जाएगी
विधानसभा प्रत्याशियों के द्वारा सोशल मीडिया पर कितना खर्च किया जा रहा है इस पर भी खर्च की नजर रखी जाएगी। टीवी चैनलों की मॉनिटरिंग, अखबर में विज्ञापनों की साइज एवं उनके दर निर्धारित कर दिए गए हैं। जिस पर आयोग की नजर रहेगी।
शराब भट्ठी पर भी रहेगी पैनी नजर
चुनाव के दौरान में शबाब व कवाब का खेल अधिक रहता है। रातों रात शराब बांटी जाती है। पिछले चुनाव में तो ठेका पद्धति से शराब की बिक्री की जाती थी, इससे प्रत्याशियों को ब्लैक में थोक के भाव में शराब उपलब्ध हो जाता था, लेकिन इस बार के चुनाव में प्रत्याशियों को अपने मतदाताओं को लुभाने व अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए शराब नहीं मिल पाएगी। क्योंकि सरकार व चुनाव आयोग शराब की एक-एक बूंद का हिसाब रखेगी। जिसे देखते हुए इस बार के चुनाव में प्रत्याशियों को महौल बनाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
Published on:
07 Oct 2018 07:13 pm
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