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इस खबर को पढ़ते ही आप हो जाएंगे सन्न, आखिर चूहे और दीमक ने मिलकर ऐसा कर दिया, जानें बस एक क्लिक में…

- भरपाई कहां से होगी इसके लिए राज्य स्तर से ली जा रही है सलाह

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इस खबर को पढ़ते ही आप हो जाएंगे सन्न, आखिर चूहे और दीमक ने मिलकर ऐसा कर दिया, जानें बस एक क्लिक में...

39 हजार क्ंिवटल धान दीमक और चूहे कर गए चट, धान शार्टेज की भरपाई के लिए जुटे मार्कफेड अफसर

जांजगीर-चांपा. जिले के पांच संग्रहण केंद्र में रखे 39 हजार क्ंिवटल धान का शार्टेज हो गया। इतने धान को या तो दीमक चट गया या चूहे कुतर गए। इस बात को लेकर मार्कफेड अफसर अच्छे खासे परेशान हैं। इतनी बड़ी मात्रा में धान शार्टेज की भरपाई के लिए मार्कफेड अफसर जुटे हुए हैं, लेकिन भरपाई कहां से होगी इसके लिए सलाह राज्य स्तर से ली जा रही है।

जिले में धान की बंपर पैदावारी हुई है। धान खरीदी में समूचे प्रदेश में जांजगीर चांपा जिले का नाम अव्वल है। जिले के २०६ समितियों से ६९ लाख क्ंिवटल धान की रिकार्ड खरीदी हुई है। 69 लाख क्ंिवटल धान में 31 लाख क्ंिवटल धान को शासन ने जिले के पांच संग्रहण केंद्र में जमा कराया था। वहीं 38 लाख क्ंिवटल धान को मिलर्स को उपलब्ध कराया गया था।

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संग्रहण केंद्र में रखे 31 लाख क्ंिवटल धान का उठाव 31 मार्च तक हो जाना था, लेकिन ट्रांसपोर्टरों ने धान का उठाव समय रहते नहीं कर पाए। जिसके चलते धान सुखद की भेंट चढ़ गया। अलबत्ता 31 लाख क्ंिवटल धान में शासन को 30 लाख 70 हजार क्ंिवटल धान का हिसाब मिल पाया। शेष 39 हजार 900 क्ंिवटल धान का हिसाब नहीं मिल पा रहा है। जिससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी मात्रा में रखे धान को या तो दीमक चट कर गया या फिर चूहे कुतर गए। यानी 39 हजार 900 क्ंिवटल धान की कीमत 1500 रुपए प्रति क्ंिवटल के हिसाब से छह करोड़ रुपए से अधिक का आंकड़ा पार कर रहा है। जिसकी भरपाई करने मार्कफेड अफसर जुटे हुए हैं।

यह हो सकती है वजह
जिले के संग्रहण केंद्र में अव्यवस्था का आलम रहता है। बीते वर्ष बड़ी तादात में धान की चोरी हुई थी। वहीं बड़ी तादात में धान जल भी गए थे। हालांकि मौजूदा वित्तीय वर्ष इस तरह की शिकायत नहीं मिली है, लेकिन चोरी से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके अलावा रखरखाव के अभाव में धान शार्टेज की भी संभावना बनती है। बहुत से धान मवेशी भी चट कर जाते हैं। वहीं दीमक व चूहे के चट करने से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इतना ही नहीं भीषण गर्मी में तीन-तीन माह तक खुले में रखे धान सूखते भी हैं। बीच बीच में बारिश की वजह से धान सड़ भी जाते हैं। जिससे सुखद आंकड़ा १.२७ प्रतिशत पहुंच चुका है।

आधे प्रतिशत की रहती है छूट
बताया जा रहा है कि संग्रहण केंद्र में धान के सूखत की आधे प्रतिशत की गुंजाइश रहती है। शासन आधे प्रतिशत तक सूखत माफ करती है। क्योंकि चार महीने तक संग्रहण केंद्र में रखा धान सूख चुका होता है। जिसकी छूट का लाभ विभागीय अधिकारी को मिलता है, लेकिन १.२ प्रतिशत की सूखत मापदंड से अधिक हो रहा है। इसके लिए राज्य शासन से गाइडलाइन मांगी जा रही है। यदि सरकार ठोस कार्रवाई कर दे तो संग्रहण केंद्र प्रभारियों की मुश्किलें बढ़ सकती है। बताया जा रहा है कि पूरे प्रदश भर में आधे प्रतिशत सुखत की रिपोर्ट आई है। कहीं कहीं आधे प्रतिशत से भी कम सूखत की रिपोर्ट मिली है। इस हिसाब से प्रदेश भर का आंकड़ा एकजाई किया जाए तो जांजगीर के सूखद के आंकड़े अडजस्ट हो सकता है।

फैक्ट फाइल
जिले में समिति 206
संग्रहण केंद्र 05
कुल खरीदी 69 लाख क्ंिवटल
मिलर्स को दिया धान 38 लाख क्ंिवटल
संग्रहण केंद्र में 31.10 लाख क्ंिवटल
सूखत की सूचना 39.90 क्ंिटल
प्रतिशत में 1.27 प्रतिशत
सूखत राशि में 6 करोड़

-जिले के पांच संग्रहण केंद्रों में 31.10 लाख क्ंिवटल धान रखा गया था। जिसमें 1.27 प्रतिशत सूखत की रिपोर्ट मिल रही है। समितियों में धान समय रहते नहीं उठा पाए। जिससे सूखत की अधिक संभावना बनी। इसकी रिपोर्ट राज्य शासन को भेजा गया है- केपी कर्ष डीएमओ