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VIDEO- पीआईएल के सामने व्हीलचेयर पर बैठ लड़ रहा मजदूरों के हित की लड़ाई

- लगा रहा कई आरोपए दावा प्रबंधन एक भी आरोप झूठ साबित करके दिखाए - पीआईएल ने भेजी लीगल नोटिसए जवाब देने को भी है तैयार

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पीआईएल के सामने व्हीलचेयर पर बैठ लड़ रहा मजदूरों के हित की लड़ाई

जांजगीर-चांपा. प्रकाश इंडस्ट्रीज चांपा के मुख्य द्वार के सामने से गुजरी जिस सड़क से आने-जाने में लोग डरते हैं। जो रोड धूल के गुबार से दिखाई तक नहीं पड़ता है उसी रोड के बगल से तंबू गाड़कर इंटर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक दुबे हड़ताल पर बैठे हैं और पीआईएल के मजदूरों के अंदर उनके अधिकार को मामले की लव जलाने की प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगे।

पत्रिका की टीम हड़ताल की सच्चाई जानने के लिए रात 10.30 बजे जब मौके पर पहुंची, तो वहां पंडाल के नीचे दीपक दुबे अपनी व्हील चेयर पर बैठे मिले और उनके बगल से उनके साथी माइक लेकर पीआईएल आ जा रहे मजदूरों को बता रहे थे कि किस तरह नियम कायदों को ताक में रखकर उनके अधिकारों और हक का शोषण किया जा रहा है।

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इस हड़ताल में राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस प्रकोष्ठ के जिला संयोजक राकेश साहू, एकलव्य चन्द्रा, इंटक जिलाध्यक्ष संतोष प्रधान, इंटक महिला जिलाध्यक्ष बसन्ती गभेल, कन्ट्रक्सन वर्क एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष संजय रत्नाकर असंगठित वर्ग के जिलाध्यक्ष पुष्पेंद्र जायसवाल, इंटक चाम्पा नगर अध्यक्ष बजरंग दास महंत इस शामिल हैं। उन्होंने बताया कि प्रकाश इंडस्ट्रीज लिमिटेड चांपा की जनविरोधी नीति, श्रमिक किसान विरोधी नीति को लेकर 24 घंटे की भूख हड़ताल किया है।

आरोप और प्रबंधन की सफाई
आरोप. यहां औद्योगिक दुर्घटना में अब तक सौ से अधिक श्रमिकों की मौत हो चुकी हैं। सैकड़ों मजदूर अपंग हो चुके हैं। ऐसी घटनाओं की न्यायिक जांच कर पीडि़तों को नियम के मुताबिक मुआवजा दिया जाए।
जवाब. हेल्थ एंड सेफ्टी विभाग में इसकी सूचना दी जाती है और वहीं डिसाइड करता है कि पीडि़त को कितना मुआवजा दिया जाना है। पीआईएल कुछ भी तय नहीं करता है।
आरोप. परियोजना प्रबंधक द्वारा कूट रचना कर ग्रामीणों को नौकरी का लालच देकर 10 रुपए के स्टांप पर भूमि अधिग्रहण कर खरीदी बिक्री की गई और आज तक किसी को नौकरी नहीं मिली। ऐसे लोगों को नौकरी दी जाए।
जवाब. लालच कहना गलत होगा। सरकार का नियम है कि जिसकी जमीन गई उसे नौकरी देना है। नौकरी तभी दी जाएगी जब उस जमीन पर प्लांट लगेगा।
आरोप. सीएसआर मद का भौतिक सत्यापन कराया जाए।
जवाब. सीएसआर मद का भौतिक सत्यापन हर साल कराया जाता है और कलेक्टोरेट को दी जाती है।
आरोप. श्रमिकों को जूता, मोजा, हेलमेट, साबुन, तेल, ईपीएफ़ व ईएसआइ की सुविधा का लाभ दिलाया जाए।
जवाब. कोई भी एक श्रमिक यह कह दे कि उसे सुरक्षा की चीजें नहीं दी जाती हैं तो मैं उसे उसका हक दिलाने को तैयार हूं।
आरोप. पिछले 25 सालों से बिना चुनाव कराए एक ही व्यक्ति मजदूर यूनियन का नेता बन कर उनका शोषण कर रहा है। इस वजह से मजदूरों को 12 घंटा काम करना पड़ रहा है। इसलिए मजदूर यूनियन का चुनाव तीन माह के अंदर प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति कराना चाहिए।
जवाब. बाइलार्ज के मुताबित हर तीन साल में चुनाव कराना अनिवार्य था। यदि ऐसा नहीं होगा तो संघ ही रद्द हो जाएगा।
आरोप. बॉयलर ऑपरेटर के पद पर पूर्ण रूप से प्रशिक्षित व्यक्ति को ही रखा जाना चाहिए। प्रबंधन की इस लापरवाही से गत 20 फरवरी को दो लोगों की फर्निश ब्लास्टिंग से झुलसने से मौत हो गई थी।
जवाब. बायलर ऑपरेटर का पद संबंधित डिग्री धारक और अनुभवी व्यक्ति को ही दिया जाता है। रही बात दो मौत की तो वह इलेक्ट्रीशियन और क्रेन ऑपरेटर की मौत हुई थी। बॉयलर में झुलसने से नहीं हुई।
आरोप. परियोजना प्रबंधक एके चतुर्वेदी व यूनियन नेता संजय सिंह परियोजना के ठेकेदार बसंत बरार से मिलीभगत करके प्लांट को 60 प्रतिशत ठेका पर चला रहे हैं। इनके द्वारा दुर्घटना मौत होने वाले श्रमिक के परिवार को सहायता राशि भी नहीं दी गई। इसके प्रथा को बदला जाए।
जवाब. लेबर कार्यालय में सूची दी गई है। कंपनी के नियम के मुताबिक ही कार्य किया जा रहा है। जो भी आगे होगा वह भी नियम के मुताबिक होगा।

-यह काम ट्रेड यूनियन का नहीं है। वह मजदूरों के हित की बात करें तो बेहतर होगा। रही बात आरोपी की तो यदि उनके आरोपों में प्वाइंट फाइव परसेंट की भी सच्चाई होगी तो मैं हर शर्त हारने को तैयार हूं-उदय सिंह, एजीएम, पीआईएल, चांपा