
70 वर्षीय बुजुर्ग अपने बेटे के साथ मिलकर बनाते आ रहे हैं यह खास मूर्तियां
डॉ.संदीप उपाध्याय/जांजगीर-चाम्पा. भीमराव रामजी आंबेडकर को संविधान निर्माता के नाम से जाना जाता है। बाबा साहब का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। बाबा साहब के जन्म दिवस के अवसर पर हम जांजगीर चांपा से महज 12 किलोमीटर दूर एक छोटे से गांव बुड़ेना के निवासी हरनारायण की कहानी को बताने जा रहे हैं।
बिलासपुर , रायगढ़ औऱ रायपुर जैसे शहरों में लगाई गई हैं। इसके अलावा वह जम्मू कश्मीर में भी मूर्ति बनाने जा चुके हैं।
[typography_font:18pt;" >हरनारायण 70 साल की उम्र में भी बाबा साहब की मूर्ति उतनी ही लगन से बनाते हैं जितनी कि वह 30 साल पहले बनाते थे। हरनारायण सूर्यवंशी की उंगलियां बाबा साहब की प्रतिमा बनाते समय ऐसे चलती हैं कि प्रतिमा बनने के बाद बोलने सी लगती है। हरनारायण की पहचान भले ही अब तक राज्य में या जिले के बाहर ना हो पाई हो लेकिन राज्य के हर जिले में उनके द्वारा बनाई गईं बाबा साहब की मूर्तियां आज भी उनका मान बढ़ा रही हैं।
70 वर्षीय बुजुर्ग की पहचान और उनकी प्रतिभा को सबके सामने लाने के लिए जब पत्रिका की टीम बुड़ेना गांव पहुंची तो वहां एक बुजुर्ग बाबा साहब की प्रतिमा में रंग रोगन करने के बाद उसे चमकाने में लगे हुए थे। पूछने पर उन्होंने अपना नाम हरनारायण सूर्यवंशी बताया। उनके चश्मे का नंबर इतना ज्यादा था कि शायद उसे पहन कर वह सुई में धागा न डाल पाएं, लेकिन बाबा साहब के प्रति लगन इतनी अधिक है कि उंगलियां अपने आप ही उनकी मूर्तियां बनाने लगती हैं। हरनारायण अब काफी बुजुर्ग हो गए हैं तो उनकी मदद के लिए उनका बेटा राजकुमार सूर्यवंशी (35) भी उनके साथ मूर्तियां बनाने लगा है। दोनों बाप बेटे मिलकर पूरे राज्य सहित राज्य के बाहर भी मिलने वाले ऑर्डर पर बाबा साहब की प्रतिमा तैयार करते हैं और उन्हें भेजते हैं। इन मूर्तियों को बनाने से इनकी आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी तो नहीं हो पाई है, लेकिन दो जून की रोजी-रोटी अच्छे से चल जाती है।
लाभ तो दूर पहचान भी नहीं दे सका शासन-प्रशासन
हरनारायण व उनके बेटे राजकुमार सूर्यवंशी का कहना है कि बाबा साहब की मूर्तियां बनाने में उन्हें विशेष महारत हासिल है। उनकी मूर्तियां बनाने को लेकर वह पूरी तरह से समर्पित हैं,
लेकिन आज तक उन्हें शासन-प्रशासन से न तो किसी योजना का लाभ मिला है और ना ही किसी बड़े आयोजन में उनका मान-सम्मान करके उनका नाम आगे लाया गया है। इससे वह काफी दुखी हैं। उनका कहना है कि पैसे वाले लोगों के छोटे-छोटे कामों को ख्याति देने के लिए बड़े आयोजनों में उनको पुरस्कृत कर दिया जाता है, लेकिन आज तक शासन प्रशासन ने उन्हें किसी भी बड़े आयोजन में उन्हें सम्मानित नहीं किया है।
Published on:
14 Apr 2018 04:18 pm
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