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सरकारी स्कूलों की ये है जमीनी हकीकत जर्जर भवन में खतरों के बीच छात्र कर रहे अध्ययन

जर्जर भवन में संचालित हो रहे 100 से अधिक स्कूल

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जर्जर भवन में संचालित हो रहे 100 से अधिक स्कूल

जर्जर भवन में संचालित हो रहे 100 से अधिक स्कूल

जांजगीर-चांपा. जिले में 100 से अधिक स्कूल जर्जर हो चुके हैं। स्कूल के प्रधानपाठकों ने अपने अधिकारियों को पत्र में लिखकर दे चुके हैं। इसके बाद भी ऐसे बदहाल भवनों की क्लास लगाकर बच्चों की जान से सरकार खिलवाड़ करने में आमादा है। प्राइमरी से लेकर हायरसेकंडरी स्कूल खस्ताहाल भवन में संचालित हो रहा। कहीं शासन की इस तरह की उदासीनता बच्चों की जान पर न बन आए। इस बात की चिंता अभिभावकों को सता रही है।


शिक्षा को बढ़ावा देने प्रशासन पूरी ताकत झोंक रही है। सालाना करोड़ो रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं। हर तीन किलोमीटर की दूरी पर शासन स्कूल जरूरत खोल रही है लेकिन स्कूलों के लिए भवन व अन्य संसाधन जुटाने नाकाम साबित हो रही है। वहीं छात्र भगवान भरोसे जर्जर भवन में भविष्य गढऩे मजबूर हैं।

शिक्षा विभाग से मिले आंकड़ों के मुताबिक जिले के 100 से अधिक स्कूल बेहद जर्जर हो चुके हैं। इसके कारण छात्रों को जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करना पड़ता है। जुगाड़ के भवनों में बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है। वहीं छात्रों में सांप बिच्छुओं का भी डर सताते रहता है। इससे छात्रों को जान का खतरा बना रहता है।

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केस वन
बम्हनीडीह ब्लाक के ग्राम मुड़पार में आज भी अंग्रेज जमाने के जर्जर भवन में प्राइमरी स्कूल की क्लास लगती है। बच्चे इसी जर्जर भवन में वर्षों से जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने मजबूर हैं। भवन के छत से बारिश का पानी टपकता है। भवन के चारों ओर घुटने भर पानी भर जाता है। बारिश के दिनों में स्कूल आईलैंड का रूप ग्रहण कर लेता है। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि शासन को कई बार पत्राचार कर चुके, लेकिन आज तक किसी ने इस दिशा में पहल नहीं की। इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शासन खुद बच्चों को मौत के मुंह में झोकना चाहती है।


केस टू
नवागढ़ ब्लाक के हायरसेकंडरी स्कूल अमोदा का आज तक खुद का भवन नहीं बन पाया। हायरसेकंडरी स्कूल के छात्र 30 साल पुराने कर्ज के जर्जर भवन में पढ़ाई करने मजबूर हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है। स्कूल के प्राचार्य जीपी चौरसिया ने बताया कि नए भवन के लिए शासन को कई बार पत्र लिख चुके, लेकिन शासन इस दिशा में अब तक कोई प्रयास नहीं किया। उन्होंने बताया कि बारिश के दिनों में सबसे अधिक परेशानी होती है। क्योंकि छत का प्लास्टर न जाने कब टपक जाए, जिसका डर छात्रों को सताते रहता है।


केस थ्री
बम्हनीडीह ब्लाक के मिडिल स्कूल अफरीद का भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। भवन के छत से बारिश का पानी टपकता है। मिडिल स्कूल के प्रधान पाठक ने जर्जर भवन की मरम्मत या फिर नए भवन की व्यवस्था करने कई बार शासन को पत्राचार कर चुके हैं। इसके बाद भी शासन इस दिशा में ध्यान नहीं दे रही है। इसके चलते बच्चों की जान सांसत में है। बच्चों को इस बात का डर सताते रहता है कि कभी भी प्लाटर सिर पर न गिर जाए।


-खस्ताहाल भवन की रिपोर्ट राज्य शासन को भेजा जा चुका है। शासन के पास बजट नहीं होने से नया भवन के लिए स्वीकृति नहीं मिल पाई है। जर्जर भवन को तोडऩे के लिए आदेशित किया जा चुका है। ऐसे भवनों में क्लास लगाने के लिए मना किया जा रहा है।
-जीपी भास्कर, डीईओ