
जांजगीर-चांपा. नए साल 2018 और हिन्दू संवत्सर 2075 में हिन्दू पंचांग के अनुसार जेठ माह दो बार पड़ रहा है। मान्यता है कि जब भी हिन्दू पंचांग का कोई माह दो बार पड़ता है तो उस माह को पुरुषोत्तम मास या अधिक मास कहा जाता है, जिसे पूजा पाठ की दृष्टि से सर्वोत्तम माना गया है। धार्मिक दृष्टि से जेठ की महत्ता अलग ही है, जिसमें गर्मी अपनी चरम पर होती है और इस समय जल दान का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि गरीबों व ब्राह्मणों को दान पुण्य करने से आम दिनों में किए जाने वाले दान से कई गुणा अधिक फल की प्राप्ति होगी। वहीं जेठ माह के दो बार होने के कारण त्योहार सामन्य दिनों के बजाए आगे-पीछे पड़ रहे हैं।
पुरुषोत्तम माह के दौरान भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना, तीर्थयात्रा व दान-पुण्य को विशेष महत्व दिया जाता है। सालों बाद जेठ माह दो बार पडऩे का संयोग बन रहा है, इसलिए हिन्दू धर्मावलंबियों के लिए जेठ का खास महत्व है। दो महीने तक जेठ पडऩे से पिछले साल 2017 की तुलना में इस बार त्योहारों में 15 से 25 दिन तक का अंतर आ रहा है।
जेठ शुरू होने के पूर्व कुछ त्योहार 15 दिन पूर्व पड़ेंगे वहीं जेठ खत्म होने के बाद के त्योहार 15 दिन बाद पड़ रहे हैं। वर्ष 2018 में 1 मई से जेठ माह शुरू होगा जो 28 जून तक चलेगा। जेठ शुरू होने के 15 दिनों बाद 16 मई से लेकर 13 जून तक लगभग एक माह पुरुषोत्तम मास मनाया जाएगा। इस दौरान भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्त्रनाम, श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना अति पुण्यदायी माना गया है। गरीबों व ब्राह्मणों को दान पुण्य करने से आम दिनों में किए जाने वाले दान से कई गुणा अधिक फल की प्राप्ति होगी। 14 जून से 28 जून तक पुन: साधारण जेठ माह मनाया जाएगा।
हर तीन साल बाद पुरुषोत्तम मास
अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार साल के 12 माह और तारीख निश्चित है, लेकिन हिन्दू पंचाग के अनुसार तीन साल में एक बार ऐसा संयोग बनता है, जब कोई एक महीना साल में दो बार पड़ता है। इसके चलते उस साल 12 के बजाय 13 महीने होते हैं। तिथियों के घटने-बढऩे से यह स्थिति बनती है।
लुनार व सोलर पद्धति का अंतर
ज्योतिषी डॉ. अनिल तिवारी के अनुसार हिन्दू पंचांग लुनार पद्धति से और अंग्रेजी कैलेण्डर सोलर पद्धति से बनाया जाता है। लुनार पद्धति के कैलेण्डर का चलन गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश में ज्यादा है, यह माह कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष के अनुसार चलता है। लुनार पद्धति के कैलेण्डर में एक माह 29 अथवा 29.5 दिन का होता है। इसके विपरीत सोलर पद्धति के अनुसार कोई महीना 30 और कोई महीना 31 दिन का होता है। इस तरह देखा जाए तो लुनार कैलेण्डर में एक साल में 354 दिन पड़ते हैं और सोलर कलेण्डर में 365 दिन पड़ते हैं।
तीन साल में 33 दिन का अंतर
अंग्रेजी कैलेण्डर में तारीख निर्धारत होने और हिन्दू कैलेण्डर में तिथियों में घट-बढ़ होने से एक साल में 11 दिनों का अंतर आता है। इस तरह तीन साल में लगभग 33 दिनों का अंतर आ जाता है। यही कारण है कि हिन्दू पंचांग के अनुसार तीन साल में एक बार कोई न कोई महीना दो बार पड़ता है। इस अधिमास महीने का लोगों को विशेष इंतजार रहता है, जिसमें वे पूरी श्रद्धा भाव से पूजा पाठ करते हैं और पुण्य लाभ लेते हैं।
Published on:
02 Jan 2018 08:29 pm
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