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मौत के मार्ग से कम नहीं बलौदा-हरदीबाजार मार्ग

कोलवाशरी की भीमकाय वाहनों के चलते छोटे वाहनों के चलने तक के लिए जगह नहीं

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कोलवाशरी की भीमकाय वाहनों के चलते छोटे वाहनों के चलने तक के लिए जगह नहीं

कोलवाशरी की भीमकाय वाहनों के चलते छोटे वाहनों के चलने तक के लिए जगह नहीं

बलौदा. बलौदा -हरदीबाजार मार्ग किसी मौत के मार्ग से कम नहीं है। इस मार्ग में भारी वाहनों का काफिला इतनी अधिक बढ़ गई है कि छोटे वाहन चालकों को एक पल भी चलना मुश्किल हो जाता है। बलौदा से हरदी बाजार की दूरी तकरीबन २३ किलोमीटर है जहां छोटे वाहन चालकों को चलने के लिए एक इंच भी जगह नहीं मिलता।

यही वजह है कि पिछले पांच साल के भीतर दो दर्जन लोग सड़क पर ही भीमकाय वाहनों के काल के गाल में समा गए हैं। प्रशासन के लोग जनसुनवाई की औपचारिकता पूरी कर लेते हैं।

चौथे साल एक कोलवाशरी खुल जाता है और ऐसे कोलवाशरी में दिन भर कोयला ढोने भीमकाय वाहन फर्राटे मारते हैं और सड़क पर चल रहे लोग चींटी की तरह रौंदे जाते हैं। बाद में ऐसे लोग जब अपनी आवाज प्रशासन के सामने बुलंद करते हैं तब उन्हें शासन की ओर से मिलने वाली २५ हजार मुआवजा देकर मुंह बंद कर दिया जाता है।


बलौदा क्षेत्र में हर साल एक कोलवाशरी को हरी झंडी मिल रही है। इस रूट में भीमकाय वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जिसके चलते बलौदा हरदीबाजार मार्ग धूल व कोयले से पटा रहता है। इस मार्ग में कोयले से लदी इतनी वाहनें चलती है कि आम आदमी यानी छोटे वाहन चालकों को तनिक भी जगह मिलता। आए दिन इन भारी वाहनों की चपेट में आकर लोग काल कवलित हो रहे हैं।

बीते पांच साल के आंकड़ों में गौर करतें तो ६० लोगों की मौत इस रूट की सड़कों के बीच हो चुकी है। बड़ी बात यह है कि ऐसे भीमकाय वाहनों के चलते सड़क पर हमेशा धूल का गुबार छाया रहता है। धूल के गुबार के कारण लोगों के स्वांस संबंधित बीमारी भी हो रही है। इस रूट में आवागमन करने वालों को जान हथेली पर रख चलना पड़ता है। ऐसे वाहन नगर के बीच होते गुजरती है। जिससे आए दिन दुर्घटना होती है। नो एंट्री के दौरान नगरवासियों को कुछ राहत मिलती है। जैसे ही नो एंट्री का समय सीमा खत्म होता है नगर के लोगों का भारी भरकम वाहनों को देखकर रूह कांप उठता है।

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60 लोगों की जा चुकी है जान
बीते पांच साल में बलौदा क्षेत्र की सड़कों में ६० लोगों की मौत हो चुकी है। जिसमें ९० फीसदी हादसे ऐसे वाहनों की चपेट में आने से हुई है। इतनी ही नहीं लगभग ४५० सड़क हादसे में ५०० लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और वे मौत के मुंह से वापस हुए हैं। यह आंकड़े बलौदा थाना का रिकार्ड बयां कर रहा है। हर साल की तहर वर्ष २०१७ में भी ९० सड़क हादसे हो चुके हैं। जिसमें ६० लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और १५ लोगों की मौत हो चुकी है।


यह है डेंजर जोन
बलौदा क्षेत्र के जिन सड़कों में लोगों की जान जा रही है उसमें जावलपुर, बछौद, हरदी जर्वे, सरईश्रींगार, पंतोरा, चारपारा, देवांगन पेट्रोल पंप, खिसोरा, डोंगरी, भिलाई, गुरूघासीदास चौंक बलौदा, मवेशी बाजार बलौदा, बूची हरदी, नगपुरा सहित एक दर्जन स्थान डेंजर जोन निर्धारित किए गए हैं। इन स्थानों में पिछले पांच साल के भीतर दर्जनों लोगों की मौत हुई है। समय रहते इन स्थानों में सुरक्षा के उपाय नहीं किए गए तो मौतों का सिलसिला जारी रहेगा।


-पुलिस द्वारा सड़क हादसे से बचने आए दिन मोटरव्हीकल एक्ट के तहत लोगों को जागरूक किया जाता है। भारी वाहनों की रफ्तार में लगाम लगाने भी प्रयास किए जाते हैं। इसके बाद भी हादसे हो रहे हैं।
-देवांस सिंह राठौर थाना प्रभारी बलौदा