
जांजगीर-चांपा. अकतलरा ब्लॉक का परसाही बाना गांव। यहां जय विश्वेश्वरी महिला समिति का डंका बजता है। क्या मजाल कि गांव का कोई शख्स महिलाओं की बिना अनुमति बगैर नशाखोरी कर दे। जब पूरा गांव सो जाता है तब गांव की महिलाएं अपना घर-द्वार छोड़ हाथ में लाठी लेकर सिर में सफेद टोपी पहन सुरक्षा की कमान थामे गांव का भ्रमण करती हैं। इस दौरान कोई नशा करते मिल जाए तो समझो उसकी खैर नहीं। गांव में सुरक्षा की कमान महिलाएं आज से नहीं बल्कि बीते एक डेढ़ सालों से थामी हुई हैं।
गांव में एक समय था जब गांव के 10 फीसदी लोग नशे के आगोश में समा गया था। गांव की गलियों में अवैध शराब की नदी बहती थी। प्रत्येक घर के लोगों को शराब की लत थी। शराब की वजह से गांव में आपराधिक घटनाएं बढ़ रही थी। शाम ढलने के बाद लोगों का घर से निकला मुश्किल हो जाता था। गांव की दुर्दशा को देखते हुए महिलाओं को आगे आना पड़ा।
महिलाएं एकजुट हुईं और जय विश्वेश्वरी महिला समिति का गठन किया। समिति में सभी वर्ग व समाज की महिलाओं को शामिल किया गया। समिति का अध्यक्ष ननकी नोनी को बनाया गया। भगवती साहू उपाध्यक्ष तो चारोबाई पटेल को कोषाध्यक्ष और अमरीका कंवर को सचिव बनाया गया। समिति की महिलाएं एकजुट होकर गांव में सुरक्षा की कमान संभाली हुई है।
इस तरह करतीं हैं सुरक्षा
समिति की अध्यक्ष ननकी नोनी ने बताया कि गांव में बदमाश युवकों पर नकेल कसने के लिए समिति का गठन किया गया है। समिति की महिलाएं शाम ढलते ही हाथ में लाठी लेकर सुरक्षा की जिम्मेदारी लिए निकलतीं हैं और ऐसे लोगों को सबक सिखाया जाता है जो गांव में बदमाशी करते देखे जाते हैं। उन्हें पकड़कर उसके अभिभावकों को सौंपा जाता है। सबक नशा करने वालों को नहीं बल्कि उसके अभिभावकों को सिखाया जाता है। पहले कई लोग शराब पीकर हुडदंग करते थे। जिन्हें सबक सिखाया गया। अब ऐसे लोग ढूंढने पर भी नहीं मिलते।
...तो 5 हजार का जुर्माना
गांव की चारो बाई पटेल ने बताया कि गांव में यदि कोई शराब के नशे में मिलता है और हमारे द्वारा उसे पकड़ा जाता है। गांव में सभा होती है और उसे जुर्माना बतौर पांच हजार का अर्थदंड दिया जाता है। ऐसे कई मामले सामने आ गए। जिन्हें पांच हजार जुर्माना किया जा चुका है। जुर्माने से बचने के लिए गांव में कोई नशा नहीं करता। समिति की गतिविधि को देखते हुए गांव में कोई नशे से बचता है।
होली में दिवाली सा माहौल
गांव में महिलाओं की इस कदर दहशत है कि कोई होली त्योहार के दिन भी नशा करने जुर्रत नहीं करता। गांव में होली के दिन आपस में भाई चारे की भावना सहसा ही झलकती है। गांव में शराब की एक बूंद भी नजर नहीं आती। होली में दिवाली सा माहौल रहता है। गांव में चौतरफा शांति का माहौल रहता है।
Published on:
10 Apr 2018 09:22 pm
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