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अदालती आदेश की अवहेलना पर सख्ती, लखनऊ सदर तहसीलदार का वेतन रोकने का आदेश

जौनपुर की एक अदालत ने अदालती आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ सदर तहसीलदार के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। सड़क दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के न्यायाधीश मनोज कुमार अग्रवाल ने तहसीलदार का वेतन रोकने का आदेश दिया है...

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Court orders

फाइल फोटो

जौनपुर की एक कोर्ट ने अदालत के आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लेते हुए लखनऊ सदर तहसीलदार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की है। सड़क दुर्घटना दावा अधिकरण के न्यायाधीश मनोज कुमार अग्रवाल ने तहसीलदार का वेतन रोकने का आदेश दिया है। इस संबंध में कोर्ट ने लखनऊ के जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई करने और की गई कार्रवाई से कोर्ट को अवगत कराने का आदेश दिया है।

सड़क हादसे से जुड़ा है मामला

दरअसल, सड़क हादसे में मारे गए एक ठेकेदार के परिजनों को मुआवजा नहीं मिला था। उसी को लेकर कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। इससे पहले अदालत ने बीमा कंपनी को क्षतिपूर्ति राशि देने का आदेश जारी किया था, लेकिन उसके बाद भी जारी राजस्व वसूली प्रमाण पत्र पर प्रशासन के स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। आरोप लगे हैं कि तहसीलदार ने कोर्ट के निर्देशों के बावजूद मामले में लापरवाही बरती। इस लापरवाही के कारण परिवार को न्याय मिलने में देरी हुई।

सड़क हादसे में हुई थी कॉन्ट्रैक्टर की मौत

जानकारी के मुताबिक, महाराजगंज थाना क्षेत्र के कोल्हआ गांव के रहने वाले हरिश्चंद्र निषाद की 20 अक्टूबर 2022 को एक ट्रैक्टर से हुई सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बताया जा रहा है कि हरिश्चंद्र गुजरात में लेबर कांट्रेक्टर के रूप में काम करते थे। हरिश्चंद्र ही ऐसे शख्स थे जो अपने परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्यों में शामिल थे। उनकी दुर्घटना में मौत होने के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है और परिवार ने बताया कि भरण पोषण करना भी मुश्किल हो गया है।

हरिश्चंद्र की मौत के बाद उनकी पत्नी निशा और उनके बच्चों ने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट में ट्रैक्टर मालिक, चालक और बीमा कंपनी के खिलाफ क्षतिपूर्ति का दावा वाली याचिका दायर की थी। इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई के दौरान साक्ष्य और गवाहों के आधार पर ट्रैक्टर चालक को दोषी माना। इसके बाद 25 जुलाई 2025 को अदालत ने इंश्योरेंस कंपनी को 2 महीने के भीतर 63.60 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश जारी किया।

हालांकि, तय समय सीमा के भीतर भुगतान न होने पर अदालत ने वसूली के लिए आरसी जारी की, लेकिन इस पर भी अमल नहीं हो सका। तहसील स्तर पर कार्रवाई न होने से नाराज अदालत ने इसे आदेश की अवमानना मानते हुए कड़ा कदम उठाया। लखनऊ के जिलाधिकारी को अदालत ने निर्देश को कड़ाई से पालन करवाने का आदेश दिया है।

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