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Ayodhya : अयोध्या में रामलला की मूर्ति स्थापना में अर्पित होगा 500 नदियों का जल, कौन करेगा जानें

Ayodhya अयोध्या में रामलला की मूर्ति स्थापना की पूजा में 500 नदियों और पांच महासागरों के जल से भगवान का अभिषेक होगा। यह ट्रस्ट नहीं एक आम आदमी का संकल्प है।

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अयोध्या में रामलला की मूर्ति स्थापना में अर्पित करेंगे 500 नदियों का जल, कौन हैं जानें

अयोध्या में रामलला की मूर्ति स्थापना में अर्पित करेंगे 500 नदियों का जल, कौन हैं जानें

अयोध्या में रामलला की मूर्ति स्थापना की पूजा में 500 नदियों और पांच महासागरों के जल से भगवान का अभिषेक होगा। यह ट्रस्ट नहीं एक आम आदमी का संकल्प है। राधेश्याम पांडेय (72 वर्ष) अपने संकल्प को पूरा करने के लिए जुटे हुए हैं। अब तक चार माह 12 दिन में मोटरसाइकिल से 5,200 किमी की यात्रा कर 250 नदियों व तीन समुद्रों का जल एकत्र कर चुके हैं। किसी भी बात की परवाह किए वे अपने संकल्प को पूरा करने के लिए तन, मन, धन से लगे हैं। राधेश्याम ने मंदिर निर्माण की भूमि पूजन में 151 नदियों, तीन समुद्रों और 24 कुओं का पावन जल संग्रह कर अर्पित किया था।

संकल्प पूरा करने के करीब

राधेश्याम पांडेय मुंगरा बादशाहपुर क्षेत्र के सरायचौहान में रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक हैं। जब उन्होंने राम मंदिर निर्माण की सूचना मिली तो उन्होंने यह संकल्प लिया था। राधेश्याम दो जुलाई को घर लौटे हैं। 20 फरवरी से अपनी यात्रा शुरू की थी। इस यात्रा में इन्होंने बिहार की कोसी नदी, बंगाल की इच्छामति, आंध्र प्रदेश की गोदावरी और कृष्णा, राजस्थान की लूनी, तमिलनाडु की कावेरी महाराष्ट्र की वाशिष्टि, गुजरात की ङ्क्षसधु नदी, अ²श्य सरस्वती, धनहिरैण्या व धन कपिला के संगम, दमन की दमणगंगा, गोमती नदी सहित 250 नदियों, तीन समुद्रों हिंद महासागर, अरब सागर व बंगाल की खाड़ी का जल संग्रह कर लिया है। यही नहीं रामेश्वरम मंदिर के निकट 22 कुओं का भी जल संग्रह किया है।

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सिर्फ रात में भोजन

राधेश्याम पांडेय बताते हैं कि, वह मोटरसाइकिल के जरिए अपनी संकल्प यात्रा पूरी कर रहे हैं। अपनी किसी तरीके से गुजार लेते हैं। झोले में हमेशा 100 किशमिश, एक दर्जन केला और थोड़ा सा गुड़ व सत्तू रखते हैं। सिर्फ रात में भोजन करते हैं। नहीं मिला तो फलाहार पर रात बिताते हैं।

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भगवान का पुन: हो भव्य राज्याभिषेक

राधेश्याम पांडेय ने बताया कि, 12 साल पहले सेवानिवृत्त हो गए थे। तीर्थ स्थलों का भ्रमण, खोज व अध्ययन ही उद्देश्य है। उनका मानना है कि 14 वर्ष वनवास के बाद लौटे भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक नदियों एवं समुद्रों के जल से हुआ था। भगवान श्रीराम अपने जन्म स्थल पर 500 से अधिक वर्षों के बाद लौट रहे हैं तो पुन: भव्य राज्याभिषेक होना चाहिए। उसी कार्यक्रम के लिए नदियों व समुद्रों का जल संग्रह कर रहे हैं।