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जौनपुर में उधार की किताबों से चल रही नौनिहालों की पढ़ाई

बिन किताब कैसे हो पढ़ाई, खत्म हुई जुलाई।
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जौनपुर

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Mohd Rafatuddin Faridi

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Updated: 1 Aug 2018, 4:32 PM IST

Dooba

डूबा

जौनपुर. ज़िले के अधिकतर सरकारी स्कूलों में इस सत्र की किताबें नहीं पहुंची हैं। जुलाई बीत चुकी है लेकिन वहां के छात्र बिना किताबों के ही कक्षाओं में ऊंघते रहते हैं। जिला प्रशासन की तरफ से भले ही परिषदीय विद्यालयों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था की बात की जाती रही हो लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ भी नज़र नाहन आता। बच्चे अपने वरिष्ठ सह पाठियों से उनकी पुरानी किताबें उधार मांग कर पढ़ाई कर रहे हैं।

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प्रशासन द्वारा समय पर शिक्षण सत्र शुरू होने का दावा किया जा रहा है लेकिन जुलाई बीतने को है अभी तक काफी संख्या में छात्रों के हाथों में किताब नहीं पहुंची है। ऐसे में परिषदीय विद्यालयों में बेहतर शिक्षा देने का दावा खोखला नजर आ रहा है। इसमें सबसे खराब स्थिति केराकत व मछलीशहर के सरकारी स्कूलों की देखी जा सकती है।

केराकत क्षेत्र में भी अधिकांश विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची है। बच्चों को बुनियादी शिक्षा देने वाले परिषदीय विद्यालयों में सरकार भले ही बेहतर शिक्षा देने का ढिढोरा पीट रही हो, लेकिन हकीकत में ठीक इसका उल्टा नजर आ रहा है। देखा जाए तो जुलाई माह समाप्त हो गया है लेकिन अभी तक कक्षा सात को छोड़कर किसी भी कक्षा की पुस्तकें सरकार ने उपलब्ध नहीं कराई हैं।

शिक्षकों का कहना है कि सिर्फ कक्षा सात के बच्चों को पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। कक्षा एक, दो, तीन, चार, पांच, छह, आठ के कक्षाओं की पुस्तकें न आने से किसी तरह बच्चों को पुरानी किताबों से ही पढ़ाया जा रहा है। गांव में जो बच्चे अगली कक्षा में चले गए हैं उनकी किताबों को उधार लेकर भी कुछ बच्चे स्कूल आते हैं। फिर उ के इर्द गिर्द कई बच्चों को बैठा कर एक ही किताब से पढ़ाई कराई जाती है।
By Javed ahmad