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15 रुपए किलो बिक रहा 1 रुपए किलो का चावल, गरीबों के चावल से कमा रहे लोग

1 रुपए किलो के चावल की जमकर कालाबाजारी हो रही है, छोटे व्यापारी इस चावल को 15 रुपए किलो तक में खरीदकर थोक व्यापारियों को बेच रहे हैं.

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धामनोद/गुजरी. गरीबों को मिलने वाले नि:शुल्क और 1 रुपए किलो के चावल की जमकर कालाबाजारी हो रही है, छोटे व्यापारी इस चावल को 15 रुपए किलो तक में खरीदकर थोक व्यापारियों को बेच रहे हैं, वहीं बड़े व्यापारी इसे अच्छे चावल में मिक्स करवाकर मोटा मुनाफा कमा रहे हैं, इससे जहां एक और गरीबों को राशन नहीं मिल पाता है, वहीं दूसरी और जिन्हें मिल रहा है वे रुपए के लालच में छोटी व्यापारियों को बेच देते हैं।

सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली योजना के तहत गरीबों को बांटा जाने वाला नि:शुल्क चावल कुछ मुनाफाखोरों के लिए मोटी कमाई का जरिया बन चुका है। सांठ-गांठकर दलाल इसे खरीद रहे हैं और 14 से 15 रुपए किलो में लेकर थोक कारोबारियों को इसे बेचा जा रहा है। गौरतलब है कि आसपास के परी क्षेत्र में कुछ फुटकर व्यापारी राशन दुकानों में गरीबों को मिलने वाला चावल ओने-पौने दामों पर खरीद कर शहरों में खपा रहे हैं। बताया जाता है कि धामनोद सहित गुजरी के कुछ व्यापारी इस गोरखधंधे में लिप्त हो चुके हैं जो यह शासकीय राशन अपने गोडाउन में उतारकर ट्रकों से बाहर भेज रहे हैं।

शासन की सब्सिडी राशि का दुरुपयोग हो ही रहा है, साथ-साथ क्षेत्र में कालाबाजारी भी बढ़ रही है। बताया जाता है कि 15 से 16 रुपए तक के भाव में बड़े व्यापारी फुटकर व्यापारी से चावल खरीद कर अपने परिसर में उतार रहे हैं और वहां से ट्रकों से माल अन्य जगह पर भेजा जा रहा है। यह सब बेरोकटोक हो रहा है।

चावल खरीदी बिक्री के लिए नहीं आताधामनोद मंडी में चावल की खरीदी और बिक्री नहीं की जाती क्योंकि यहां के किसानों द्वारा क्षेत्र में धान की खेती कहीं से कहीं तक नहीं की जाती है। ऐसी स्थिति में चावल बड़ी मात्रा में भंडारण के लिए कैसे पहुंच रहा है। पर्याप्त जांच पड़ताल के अभाव में कुछ कालाबाजारी करने वाले व्यापारी इस धंधे में लिप्त हो चुके हैं। धामनोद मंडी परी क्षेत्र प्रमुख रूप से कपास, सोयाबीन, मक्का, गेहूं, डालर ,चना एवं अन्य जिंसों की खरीदी का केंद्र है। यहां मंडी में कभी भी चावल की खरीदी बिक्री नहीं की गई है। ऐसे में चावल गोडाउन तक कैसे पहुंच रहा है।

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ग्रामीण क्षेत्रों से वाहन आते हैं, सीधे गोडाउन में उतर जाता

नाम न छापने की शर्त पर एक अनाज कारोबारी ने बताया कि क्षेत्र में ग्रामीण क्षेत्र से बड़ी संख्या में चावल विक्रय के लिए आता है। यह प्रतिदिन हो रहा है जो व्यापारी इसे खरीद रहे हैं वह शासन के दिए जा रहे उपक्रम के विरोध में कार्य कर रहे हैं। साथ-साथ बड़ी संख्या में राजस्व के साथ खिलवाड़ भी कर रहे हैं। कुछ ऐसे व्यापारी है जो बेहिसाब शासन के चावल को खरीद कर लाखों रुपए की कमाई कर रहे हैं जिन पर आज तक न तो पुलिस की नजर पड़ी नहीं खाद्य विभाग की ।