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गोधरा कांड के बाद मध्यप्रदेश में 10 वर्षों तक आराम कर रहा था आरोपी, कोर्ट ने दिया ये फैसला

गोधरा कांड के बाद मध्यप्रदेश में आराम कर रहा था आरोपी, कोर्ट ने दिया ये फैसला

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झाबुआ

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Manish Geete

Aug 27, 2018

godhra

गोधरा कांड के बाद मध्यप्रदेश में 10 वर्षों तक आराम कर रहा था आरोपी, कोर्ट ने दिया ये फैसला

अहमदाबाद/झाबुआ। गोधरा रेलवे स्टेशन का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। क्योंकि 27 फरवरी 2002 को इसी स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बे में 59 कारसेवकों को जिंदा जलाने की घटना हुई थी। इसी घटना के प्रमुख आरोपियों को विशेष अदालत ने सजा का ऐलान कर दिया। एक आरोपी को झाबुआ से पकड़ा था, उसे बरी कर दिया गया।

गोधरा में ट्रेन में कारसेवकों को जिंदा जलाने की घटना के बाद पूरे प्रदेश में फैले साम्प्रदायिक दंगों में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे, जबकि सैकड़ों लोग घायल हो गए थे।

इस कांड का आरोपी हुसैन सुलेमान मोहन को 23 जुलाई 2015 को मध्यप्रदेश के झाबुआ के विवेकानंद कालोनी स्थित घर से गिरफ्तार किया गया था। हुसैन झाबुआ में दस सालों तक आटो चला कर गुजारा कर रहा था। पुलिस ने हुसैन को झाबुआ से गिरफ्तार किया था।। उसने अपने जरूरी दस्तावेज भी यहीं से बनवाए थे। इनके आधार पर आराम की जिंदगी बिता रहा था।

इसी घटना के आरोपियों को अमहदाबाद की विशेष जांच दल की अदालत ने फारुक मोहम्मद भाणा और इमरान ऊर्फ शेरू अहमद बटुक घांची को उम्र कैद की सजा सुनाई है। वहीं तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया। बरी होने वालों में हुसैन सुलेमान मोहन, कासम इब्राहिम इस्माइल भामेरी, फारुक हाफिज मोहममद धंतिया शामिल हैं।

अहमदाबाद के साबरमती सेंट्रल जेल परिसर स्थित विशेष अदालत ने भाना और शेरू को आपराधिक षड्यंत्र का दोषी पाया है। साबिर अब्दुल गनी पातलिया की ट्रायल के दौरान 20 अगस्त 2017 को मौत हो गई थी।

झाबुआ में बस गया था हुसैन
-हुसैन को पुलिस अगस्त 2015 में झाबुआ भी लेकर आए थी। वो गोधरा कांड के बाद झाबुआ में रहकर आटो रिक्शा भी चलाता था। उसने यहीं से अपने सभी दस्तावेज भी बना लिए थे। जिस कारण वो आराम की जिंदगी जी रहा था। झाबुआ में रहते हुए ही उसने शादी भी की थी।

यह था मामला
गुजरात के गोधरा रेलवे स्टेशन पर 27 मार्च 2002 को साबरमती एक्सप्रेस ट्रेन के 6 डिब्बे में आग लगा दी गई थी। इस घटना में अयोध्या से लौट रहे 59 कारसेवकों को जिंदा जला दिया गया था। इस घटना के बाद राज्य भर में सांप्रदायिक दंगे फैले थे, जिसमें एक हजार से अधिक लोग मारे गए थे।
-2011 में विशेष अदालत ने 11 दोषियों को फांसी और 20 दोषियों को उम्र कैद की सजा सुनाई थी। जबकि 63 लोगों को बरी कर दिया था।