
नपा जिसे कचरा समझती रही, गुजरात के लोग बेच रहे ३ हजार रु. प्रति क्विंटल
झाबुआ. तंगहाली का रोना रो रही नगरपालिका अपनी ही लाखों रुपए की संपदा को सालों से बर्बाद करती आई है। कहते हैं की हीरे की कीमत जोहरी ही बेहतर जानता है, इसे चरितार्थ कर गुजरात के लोग नपा के इस हीरे को ले गए। यह मामला है शहर के तीनों तालाबों की, जिनके ऊपर नपा लाखों रुपए हर साल खर्च करती है। तालाबों में अपने आप उगी कमल की खेती को उजाड़कर उसे साफ करती रही है। इस खेती को उजाडऩे के लिए भी हजारों रुपए हर साल खर्च किए जाते हैं। वहीं गुजरात के लोग यहां आकर इन कमलों को अपने राज्य में एक क्विंटल कमल की जड़ों को तीन हजार में बेच रहे हैं। गंभीर बात ये भी है कि नपा को पता ही नहीं है कि जिसे वह तालाब की गंदगी समझ रही थी वह अनाज से भी महंगी कीमत मंडी में है। बहादुर सागर तालाब में इन दिनों दाहोद जिले के लोगों का जमावड़ा है । यह लोग 15 दिनों से लगातार यहां से कमल की जड़ें काट कर ले जा रहे हैं । स्थानीय लोग कमल की जड़ों को मुराड़े कहते हैं। गुजरात में इसे कमल ककड़ी के नाम से जाना जाता है। 15 से 20 दिन पहले 5 से 10 लोग एक दो थैली में मुराड़े ले जा रहे थे, लेकिन कोई विरोध नहीं होता देख अब यहां पर 80 से 90 व्यक्ति प्रतिदिन पहुंच रहे हैं। इनका बाजार मूल्य 40 रुपए किलो एवं मंडी भाव तीन हजार रुपए प्रति क्विंटल है। यहां से रोजाना लगभग 400 से 500 क्विंटल मुराड़े निकाल कर लेजा रहे हैं।
तालाबों का सौंदर्यीकरण इन मुराड़ों से ही हो जाए
अगर नगर पालिका इस कार्य को टेंडर के माध्यम से करती तो लाखों रुपयों का राजस्व प्राप्त किया जा सकता था। 1 क्विंटल के तीन हजार रुपए के हिसाब से हजारों क्विंटल कमल ककड़ी तालाब से निकाली जा चुकी है। इसके अलावा अभी हजारों क्विंटल मुराड़े तालाब में मौजूद है। जिसको अगर मंडी में बेचा जाए तो तालाबों का सौंदर्यीकरण इन मुराड़ों से ही हो जाए।
40 से 50 मोटरसाइकिल से आते हैं मुराड़े लेने
बहादुर सागर तालाब के सामने मुक्तिधाम और होस्टल के पीछे 40 से 50 बाइक खड़ी कर के गुजरात से आए लोग तालाब में उतर जाते हैं। आधे लोग अंबे माता मंदिर के पास छतरी चौक पर रुक कर वहां से मुराड़े निकालने का काम कर रहे हैं। कहीं तो पूरा परिवार इस काम में लगा है। 5 साल के छोटे बच्चे भी परिवार की मदद करते दिखाई देते हैं। सुबह 11 से दोपहर 3 बजे तक अपना काम खत्म करके यह मोटरसाइकिल से वापस चले जाते हैं। पूरे तालाब में गुजरात से आए लोग बेरोकटोक अवैध रूप से कमल ककड़ी गुजरात ले जा रहे हैं। वहां पर मंडी में बेचकर अच्छा मुनाफा हो रहा है। नगरपालिका की उपेक्षा के चलते इसका फायदा दूसरे राज्यों के लोग उठा रहे हैं।
Published on:
05 Jul 2018 01:05 am
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