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भाभी के अंतिम संस्कार से पहले देवर ने निभाया अपना फर्ज

MP News: खनिज अधिकारी ने निभाया कर्तव्य, भाभी के अंतिम संस्कार को जाते वक्त बीच रास्ते रोका डंपर। छूट गई अंतिम विदाई...।

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MP News भाभी के अंतिम संस्कार से पहले देवर ने निभाया अपना फर्ज ( source: patrika)

MP News: कहते हैं, असली कसौटी वही होती है जब इंसान को दिल और कर्तव्य में से एक चुनना पड़े। एमपी के झाबुआ जिले के खनिज अधिकारी जुवानसिंह भिड़े ने इस परीक्षा में ‘फर्ज’ को चुना और इसी फैसले ने उन्हें अपनी भाभी के अंतिम दर्शन से दूर कर दिया।

करीब जाकर देखा तो मामला कुछ और ही था

घटना है शुक्रवार दोपहर की जब वे अपने गृह ग्राम भोलवाट जा रहे थे, जहां उनकी भाभी का अंतिम संस्कार होना था। रास्ते में ग्राम ढेकलबड़ी के पास एक दुर्घटनाग्रस्त डंपर दिखा, जिसने आरोग्य केंद्र की दीवार तोड़ दी थी और पास के यूकेलिप्टस के पेड़ से जा टकराया था। पहली नजर में हादसा लगा, लेकिन करीब जाकर देखा तो मामला कुछ और ही था, डंपर से अवैध रेत हटाकर सबूत मिटाने की कोशिश चल रही थी।

रुके कदम, शुरू हुई कार्रवाई

स्थिति समझते ही खनिज अधिकारी ने तुरंत अपनी गाड़ी रुकवाई। वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी और टीम को मौके पर बुलवाया। पंचनामा तैयार हुआ, जेसीबी और क्रेन से डंपर हटवाया गया। पुलिस को मामले की पूरी सूचना दी गई। पूरा घटनाक्रम निपटाते-निपटाते शाम के 4 बज गए। जब तक वे गांव पहुंचे तब तक अंतिम संस्कार हो चुका था।

फिर सामने आया वही रेत माफिया

जांच में पता चला कि डंपर राणापुर के कुख्यात रेत कारोबारी शांतिलाल बसेर का है, जो पहले भी कई बार कार्रवाई के घेरे में आ चुका है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ब्रेक फेल होने पर चालक और क्लीनर कूद गए, जबकि डंपर बेकाबू होकर आरोग्य केंद्र की दीवार तोड़ता हुआ पेड़ से टकरा गया। गनीमत रही कि कोई ग्रामीण इसकी चपेट में नहीं आया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।

खबर के प्रमुख बिंदू

  • फर्ज की राह चुनी…भाभी की अंतिम विदाई छूट गई
  • भाभी के अंतिम संस्कार को जाते वक्त बीच रास्ते रोका डंपर
  • खनिज अधिकारी ने निभाया कर्तव्य-रेत माफिया पर फिर कसा शिकंजा

‘भावनाओं से ऊपर कर्तव्य’- अधिकारी का संदेश

खनिज अधिकारी जुवानसिंह भिड़े ने कहा कि भाभी का निधन उनके लिए गहरा आघात था और वे अंतिम दर्शन के लिए ही जा रहे थे, लेकिन जब रास्ते में अवैध रेत परिवहन और सरकारी संपत्ति को नुकसान होता देखा, तो रुकना जरूरी हो गया। उन्होंने साफ कहा, एक लोकसेवक के लिए कर्तव्य ही पहली प्राथमिकता है।