झाबुआ. जिले के 195 प्राथमिक स्कूलों की हालत जर्जर है, कई विद्यालयों में बच्चे बरामदे में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं, तो कुछ स्थानों पर जर्जर भवन में जान जोखिम में डालकर बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। एक विद्यालय को पंचायत भवन में शिफ्ट कर दिया गया है।
स्कूलों की हालत में सुधार के उद्देश्य से जिला स्तर के अधिकारियों ने राज्य सरकार को एक पत्र लिखा है, पत्र में 195 स्कूलों की जर्जर हालत का हवाला देकर उनकी मरम्मत के लिए आर्थिक सहायता मांगी गई है। डीपीसी ओर बीआरसी की माने तो प्रशासन इन स्कूलों की मरम्मत के लिए फंड का इंतजार कर रहा है। वहीं वर्तमान में प्राप्त कोंटी जेंसी राशि का 31 मार्च से पहले उपयोग करने और स्कूल प्रमुखों को इस राशि से जरूरी मरम्मत कार्यों को पूरा करने कहा जा रहा है।
केस 1 – प्राथमिक विद्यालय सात बिल्ली प्राथमिक विद्यालय सात बिल्ली में 99 बच्चे अध्यन करते हैं। यहां विद्यालय पूरी तरह जर्जर हो गया है। छत से सरिए बाहर झांक रहे है, प्लास्टर उखड़ा है, खिड़की दरवाजे उखड़ गए हैं। हैंड वाश यूनिट में पानी नहीं आता। ग्राउंड नहीं है। 10 सालों से विद्यालय कि रंगाई पुताई तक नहीं हुई। स्कूल के बाहर सूचना देता बोर्ड भी नहीं है। इससे पहले यहां अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति थी उन्हें कंटीजेंसी राशि निकालने का अधिकार ही नहीं था, इसलिए स्कूल की हालत एकदम खंडहर में बदल गई। वहीं विद्यालय के शिक्षक का कहना है कि कोरोना काल से ही कंटीजेंसी राशि नहीं मिली, इस साल मिली कंटीजेंसी राशि का उपयोग शाला कि मरम्मत के लिए किया जाएगा।
केस 2 – प्राथमिक शाला डूंगरी पाड़ा आठ माह पहले थांदला ब्लॉक की प्राथमिक शाला डूंगरीपाड़ा में बालिका के सिर पर छज्जा गिर गया था। थांदला ब्लॉक में सबसे ज्यादा जर्जर विद्यालय है। इसको देखते हुए दो दिन पहले यहां संचालित स्कूल को पंचायत भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। इससे पंचायत के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
केस 3 – बच्चों को बरामदे में बैठाया जा रहा है
प्राथमिक विद्यालय मछलईमाता की जर्जर हालत के कारण बच्चो को विद्यालय के बरामदे में बैठकर शिक्षा दी जा रही है। शाला की छत पर उपले (कंडे) रखे हैं। शौचालय में बदबू ओर गंदगी का साम्राज्य है, हालत खराब की वहां खड़े रहना भी मुश्किल हो रहा है। पानी पीने के लिए एक हैडपंप है। यहां ट््यूबवेल लगाया गया था। इसमें न तो मोटर लगी हुई है न ही प्राथमिक शाला में लाइट की व्यवस्थाएं हैं। बच्चों के साथ वहां पढ़ाने वाले टीचरों को भी खतरा है। टीचरों का कहना है कि इस भवन की मरम्मत के लिए कई आवेदन दे चुके हैं। आगे से मरम्मत के लिए आवंटन नहीं आया।
तीन साल से नहीं मिली कंटीजेंसीज &पिछले तीन साल से कंटीजेंसीज राशि नहीं मिली थी, इस साल राशि प्राप्त हुई है। इससे विद्यालय कि मरम्मत कि जाएगी। हैंड वाश यूनिट के पाइप वाहनों के कारण क्षतिग्रस्त हो गए थे, इन्हें भी दुरुस्त करेंगे।
केशव बुंदेला, शिक्षक, प्राइमरी स्कूल सात बिल्ली
राज्य स्तर पर प्रस्ताव भेजा है
&हमने 195 विद्यालयों की सूची बनाई है। राज्य स्तर पर प्रपोजल भेजा है। जहां कंटीन्जेंसीज राशि नहीं मिलने की शिकायत है वहां शिक्षकों से संबंधित कुछ समस्या रही होगी।
शरद गुप्ता , बीआरसी , झाबुआ
जर्जर स्कूल को पंचायत भवन में शिफ्ट किया
&डूंगरी पाड़ा स्कूल अवलोकन करने पहुंचे थे, दो दिन पहले ही वहां से स्कूल पंचायत भवन में शिफ्ट किया है। मछलई माता और सात बिल्ली स्कूलों का दौरा करेंगे, स्थिति सुधरने का प्रयास करेंगे। रालू ङ्क्षसह ङ्क्षसगार, डीपीसी, सर्व शिक्षा अभियान, झाबुआ।