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जिला अस्पताल के ओपीडी का समय बदला, 9 बजे पहुंचे डॉक्टर

अब 7 घंटे देंगे सेवा, जिला अस्पताल के बाहर सूचना चस्पा की गई

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जिला अस्पताल के ओपीडी का समय बदला, 9 बजे पहुंचे डॉक्टर

झाबुआ. शासन के आदेश के बाद सोमवार से जिला अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए व्यवस्था में तब्दीली कर दी गई। अस्पताल में आउटडोर डिपार्टमेंट यानी ओपीडी अब सुबह 9 से शाम 4 बजे तक खुली रही। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को इसकी जानकारी नहीं थी इसलिए डॉक्टरों के पहुंचने से पहले ही वे सुबह 8 बजे से ही कतार में लग गए।

दरअसल अभी तक ओपीडी का समय दो हिस्सों में बंटा था। सुबह 8 से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 से 6 बजे तक डॉक्टर मरीजों का इलाज करते थे। जबकि दोपहर 1 से शाम 5 और शाम 6 से सुबह 8 बजे तक इमरजेंसी ड्यूटी रहती थी। नए आदेश के बाद अब ओपीडी में डॉक्टरों को 7 घंटे मरीजों का इलाज करना होगा। वहीं 17 घंटे इमरजेंसी में वे मरीजों को देख सकेंगे। केवल दोपहर डेढ़ से सवा 2 बजे तक पौन घंटे के लिए डॉक्टरों को लंच ब्रेक मिलेगा।

ग्रामीणों को मिलेगा फायदा-
पूर्व में सुबह 8 से दोपहर 1 बजे तक और शाम 5 से 6 बजे तक ओपीडी का कुल समय 6 घंटे हुआ करता था। इसके बीच दोपहर 1 से शाम 5 बजे और शाम 6 से सरकारी डॉक्टर्स आराम से प्राइवेट प्रैक्टिस करते थे। शासन ने दूरदराज के गांवों से आने वाले मरीजों की समस्या को देखते हुए ओपीडी के समय में बदलाव का आदेश शनिवार को जारी किया था। जिसे सोमवार से लागू कर दिया गया।
लगातार दो छुट्टी तो दूसरे दिन खुली रहेगी ओपीडी-
नए आदेश के मुताबिक यदि सप्ताह में लगातार दो दिन छुट्टी आती है तो अवकाश के दूसरे दिन ओपीडी सुबह 9 से 11 बजे तक लगेगी। असपताल में लगातार दो दिन नियमित ओपीडी बंद नहीं रहेगी। इसके साथ ही डॉक्टर वार्ड राउंड के दौरान यह तय करेंगे कि ओपीडी का काम किसी भी हाल में प्रभावित नहीं हो।

टेक्निशियन को सुबह 8 बजे पहुंचना होगा-
लैब में टेक्निशियन सुबह 8 बजे से उपस्थित रहेंगे। सुबह 11 बजे तक लिए गए सैंपल की रिपोर्ट उसी दिन दोपहर 1 बजे तक देनी होगी। सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक लिए गए सैंपल की रिपोर्ट उसी दिन दोपहर 3 बजे तक दी जाएगी।
जिला अस्पताल के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में एक-एक इमरजेंसी डॉक्टर की ड्यूटी-
200 बिस्तरीय जिला अस्पताल की इमरजेंसी ड्यूटी में तीनों ही पाली में 1-1 डॉक्टर्सकी ड्यूटी रहेगी। वहीं सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर 1-1 डॉक्टर इमरजेंसी ड्यूटी करेंगे। इससे मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सकेगा। खासकर गांव से आने वाले मरीजों को।