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झालावाड़

garlic farming in india : लहसुन का भरपूर उत्पादन, किसानों के चेहरे पर खुशियां

झालावाड़ जिले में लहसुन की बंपर पैदावार

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रकबा इस साल आधा ही लेकिन भाव 20 से 70 रुपए किलो तक
रटलाई. झालावाड़ जिले के रटलाई क्षेत्र में इस वर्ष लहसुन के दाम 20 रुपए से 70 रुपए किलो तक चल रहे हैं। अच्छे भावों से किसान लहसुन को गाडिय़ों में भरकर मण्डी तक ले जा रहे हैं। जहां पर अच्छे दाम मिलने से गदगद हैं। वहीं क्षेत्र में इस वर्ष 12 ग्राम पंचायतों के कुल 8579 में से लहसुन का रकबा मात्र 1650 हैक्टेयर ही है, जो पिछले सालों की अपेक्षा आधे से भी कम है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में किसानों के लिए मसाला फसलों में सबसे प्रिय फसल लहसुन ही है। क्षेत्र के किसान खेतों में खाने का अनाज कम लहसुन अधिक बोते हैं। नकदी फसल एवं कम रकबे में अधिक आमदनी देने के कारण किसानों का रूझान दिनों दिन लहसुन की तरफ बढ़ा है। वर्ष 2021 एवं 2022 में यहीं हाल हुआ। उस समय भाव नहीं मिलने पर किसानों ने लहसुन पशुओं को खिलाया या फिर कचरें में फैंक दिया था। वर्ष 2023 में कम बुवाई एवं आयात नहीं होने कारण इसका भाव वर्तमान समय में कोटा मण्डी एवं मध्यप्रदेश की नीमच मण्डी में 80 रुपए किलो बिक रहा है।


पिछले वर्ष 3 से 10 रुपए किलो तक बिका
पिछले साल लहसुन की फसल के दामों में भारी गिरावट के चलते इसके दाम 3 से 10 रुपए किलो तक थे। जिससे किसानों को बुवाई से लेकर मण्डी तक का खर्चा ही नहीं निकला था। इससे आहत होकर कई किसानों ने मवेशियों को खिलाया तो किसी ने कचरे में डाल दिया। क्षेत्र के कई गांवों में इस प्रकार से मवेशियों डाला गया। किसानों ने सरकार से बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत लहसुन खरीदे की मांग पूरे साल भर की थी, लेकिन केन्द्र राज्य सरकार की खिंचतान में मामला अटका रहा। जिसका खमियाजा किसानों को भुगतना पड़ा।


किसान हो रहे मालामाल
क्षेत्र के किसान पिछले कई सालों से लहसुन की पैदावार कर रहे हैं। जिससे कई किसानों ने इसको ही आमदनी का जरिया बना लिया है। क्षेत्र के कई किसान पिछले 10 सालों से अधिक समय से इसकी खेती से अमीर बने है। बालकिशन शर्मा ने बताया ने बताया कि लहसुन की बुवाई प्रतिवर्ष करने वाला किसान फायदे में रहता है। सालभर बिकने के साथ ही नकद फसल है। यह फसल कई किसानों को अमीर बना रही है। कुछ वर्ष ही भाव कम मिला, लेकिन अधिकांश समय इसका भाव अच्छा ही रहता है। जिससे किसान मालामाल हुए हैं।


मंडियों में 3 प्रकार से बिकता
क्षेत्र के कमलपुरा निवासी किसान सुजानसिंह लोधा ने बताया कि किसान घरों पर ही लहसुन की कटाई के बाद ग्रेडिंग करते हैं। जिसमें सबसे छोटा, मिडियम एवं बड़ी साईज को निकालते हैं। कई किसान बड़े छलने में छानकर गेडिंग भी करते हैं। किसानों ने बताया कि कार्टन में पैकिंग लहसुन के दाम बढिय़ा मिलते हैं। जिससे कई किसान कार्टन में पैंक करने के बाद ही मण्डी में बेचते हैं। लाल्याखेड़ी निवासी विष्णुप्रसाद पाटीदार ने बताया कि इस समय भाव 20 से 100 रुपए किलो तक बिक रहा है, लेकिन किसानों के खेतों में औसत पैदावार कम ही रही है। इस वर्ष लहसुन के दाम बढिय़ा मिल रहे हैं।