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राजस्थान में यहां काले सोने से लहलहाएंगे खेत, 33 हजार 380 आरी के पट्टे जारी

इस बार अफीम नीति 2022-23 में केन्द्र सरकार ने अफीम उत्पादक किसानों को सीपीएस पद्धति से पट्टों का वितरण करने की सिफारिश की है। इसके चलते जिले में लंबे समय से जिन किसानों के अफीम पट्टे बंद थे, उनके भी पुन: चालू होने की उम्मीद जगी है।

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झालावाड़/पत्रिका न्यूज नेटवर्क. इस बार अफीम नीति 2022-23 में केन्द्र सरकार ने अफीम उत्पादक किसानों को सीपीएस पद्धति से पट्टों का वितरण करने की सिफारिश की है। इसके चलते जिले में लंबे समय से जिन किसानों के अफीम पट्टे बंद थे, उनके भी पुन: चालू होने की उम्मीद जगी है। जिले में अभी पट्टा वितरण का काम जारी है। जिले में इस बार करीब 2400 से अधिक किसानों को पट्टा जारी किया जाएगा। नई नीति में केन्द्र सरकार ने किसानों को कई तरह की राहत दी है। जिले में इस बार कुल करीब 31 हजार 380 आरी के पट्टे जारी किए गए है।



ये किया बदलाव
केन्द्र सरकार द्वार नई नीति में कई तरह के बदलाव किए हैं। जिसमें गत वर्ष 4.2 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर से अधिक मार्फिन देने वाले किसानों को नियमित रुप से लाइसेंस जारी किया जाएगा, जबकि सीपीएस पद्धति से खेती करने वाले को 3 से 4.2 किलोग्राम तक प्रति हैक्टेयर मार्फिन की न्यूनतम औसत देने वालों को लाइसेंस जारी किया जाएगा। वहीं नई नीति में ये भी बदलाव किया गया है कि 1998 में से 5 साल का औसत देखा जाता था, अब 4 साल का औसत देखकर लाइसेंस जारी किया जा रहा है।

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जिनकी घटिया, उन्हें भी मौका
पूर्व में जिन किसानों की अफीम घटिया थी, उन्हें भी इस बार मौका दिया जा रहा है। पूर्व में 9 फीसदी अफीम घटिया होने पर लाइसेंस जारी नहीं किया जाता था, वहीं अब उसे घटा कर 6 फीसदी कर दिया गया है।


12 तहसीलों में इतने जारी होंगे लाइसेंस
जिले में 12 तहसीलों में चीरे वाले 1490 तथा सीपीएस पद्धति के 968 लाइसेंस जारी किए जाएंगे। जिसमें अभी तक चीरे वाले 1490 तथा सीपीएस वाले 523 पट्टे जारी कर दिए गए हैं।


जांच रहे पात्रता
इन दिनों जिला मुख्यालय पर डिप्टीजी मंदिर के पास नारकोटिक्स विभाग शिविर लगाकर पट्टे जारी कर रहा है, जो अंतिम चरण में है, एक दो दिन और शिविर चलेगा। जिले में सभी किसानों को इस बार 10 आरी के पट्टे जारी किए गए है। लाइसेंस वितरण के लिए कोटा से भी अतिरिक्त अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जो अफीम उत्पादक किसानों के खसरा नंबर, पुराना रेकॉर्ड आदि देखकर पात्रता की जांच कर रहे हैं, इसके बाद किसान बुवाई करेंगे तो विभाग सीमाज्ञान करेगा। उसके बाद ही तय सीमा में किसान बुवाई करेंगे।

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350 हो गए मुखिया
जिले में दो वर्ष पहले जहां 305 मुखिया थे, वहीं गांवों में नए पट्टे जारी होने से मुखियाओं की संख्या भी बढ़ गई है। जिले में अब 350 मुखिया हो गए हैं। जिन्हें विभाग द्वारा तय कमीशन दिया जाता है।


सीपीएस पद्धति में सीधे डोडे से अफीम निकालते हैं, इस प्रक्रिया से अफीम में मार्फिन, कोडिन, फास्टेट और अन्य रसायन की गुुणवत्ता बहुत अच्छी रहती है। आस्ट्रेलिया समेत कई देशों में सीपीएस पद्धति से अफीम की खेती की जा रही है, कई देशों की दवा कंपनियां आस्ट्रेलिया से अफीम और उससे निकलने वाले रसायन मंगवा रही है। इसी पद्धति से आने वाले समय में भारत में अफीम की खेती करने के लिए प्रयोग करना शुरू कर दिया है।



क्या है अफीम की सीपीएस पद्धति
पहले छह आरी का पट्टा था, इस बार 10 आरी का पट्टा मिलेगा। इस बार चीरा नहीं लगेगा। डोडे तुड़वा कर सीधे सरकार ले लेगी। क्या भाव लेंगे ये तो सरकार ही जाने।
लक्ष्मीनारायण, अफीम उत्पादन किसान, गादिया

खसरा नंबर नहीं मिल रहा है। इससे अभी पट्टा जारी नहीं हुआ है। सूची में नाम है, मिलने की पूरी उम्मीद है। पांच साल पहले बुवाई की थी।
बालसिंह, अफीम उत्पादक किसान गेलाना

किसानों को अफीम पट्टा जारी करने का करीब पूरा हो चुका है। 12 ही तहसीलों में करीब 2400 से अधिक लाइसेंस दिए गए हैं। इस बार सीपीएस पद्धति से काफी पट्टे जारी किए गए हैं। इस बार सभी पट्टे 10 आरी के जारी किए गए हैं।
एपी चौधरी, जिला अफीम अधिकारी, झालावाड़।