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खतरे में नौनिहालों की जान: जिले में 13 स्कूल जर्जर, 80 मांग रहे मरम्मत

जिले में पिछले साल की तरह इस साल भी बच्चों को जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है

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झालावाड़.जिले में पिछले साल की तरह इस साल भी बच्चों को जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है। पिछले साल की गलतियों से न अधिकारियों ने कोई सबक लिया न जनप्रतिनिधियों ने। शिक्षा पर सरकार करोड़ों रुपए खर्च करती है पर आज भी स्कूलों में सुविधाए नहीं पहुंच पाई है। शिक्षण सत्र के साथ ही झालावाड़ जिले में जोरदार बारिश का दौर जारी है। ऐसे में कहीं कोई हादसा नहीं हो जाए। ऐसे में शिक्षा विभाग को सजग होकर काम करने की जरुरत है। जिले में 80 स्कूल ऐसे है जो लंबे समय से मरम्मत मांग रहे हैं। लेकिन उनमें बजट के अभाव में कोई काम नहीं हो पाया है। वहीं 13 स्कूल ऐसे है जो जर्जर अवस्था में है, उन्हे गिराकर नए भवन बनाने की सख्त जरुरत है। ताकि जिले के विद्यार्थियों को सुगम जगह पढ़ाई की सुविधा मिल सके।

विभाग के पास मरम्मत के लिए फंड नहीं-

नया शिक्षण सत्र शुरू हो गया है। लेकिन गत साल की तरह इस साल भी जिले के लगभग 80 स्कूलों की जर्जर छतों के नीचे पढऩे वाले बच्चों की कॉपी किताबों पर बारिश का पानी गिरेगा। बीते साल से इन छतों की मरम्मत के लिए भेजे प्रस्तावों पर ध्यान नहीं दिया गया है। जिसके कारण इस साल भी पढऩे वाले बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। अभी कई स्कूलों में पानी भर रहा है तो छतों से पानी टपक रहा है।

शिक्षा विभाग ने भेजी स्कूलों की सूची-

जिले के 80 से स्कूल भवन मरम्मत मांग रहे है। जिसमें से आधे ऐसे है जो छत व अन्य काम मांग रहे हैं। तो कई स्कूल ऐसे हैं जिसका भवन कंडम हो गया है। ऐसे स्कूलों की मरम्मत नितांत जरुरी है। जिले के 40 स्कूल तो ऐसे हैं जहां बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। इन स्कूलों की छत ही कमजोर है। बारिश के दिनों में छत से पानी रिसता है। सीपेज के कारण पानी कक्षा में गिरता है। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों की सूची मरम्मत के लिए सरकार को भेजी है। लेकिन अभी तक बजट नहीं आने से छात्रों को बारिश में परेशानी उठानी होगी। खतरे में पढ़ाई की मजबूरी- कई स्कूलों में जर्जर छत व दीवारें होने से छात्रों को खतरे के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने की मजबूरी है, कई जगह दीवारें भी दरकने लगी। स्कूलों की मरम्मत की मांग संबंधित ग्राम के ग्रामीण व शाला प्रबंधन समिति भी कर चुकी है। इनकी मांगो पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। समय पर बजट आएं तो इन स्कूलों के हालत सुधरे।

सबसे ज्यादा खराब स्कूल अकलेरा ब्लॉक में-

जिले में सबसे ज्यादा जर्जर स्कूल भवन जिले के अकलेरा ब्लॉक में है। इस ब्लॉक के आधा दर्जन से ज्यादा स्कूल ऐसे है जिसका भवन जर्जर है या फिर स्कूल भवन मरम्मत मांग रहा है। इनकी जानकारी पिछले साल दी गई थी, लेकिन सरकार ने अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया। जबकि कई स्कूल तो 1980 से लेकर 90 के बीच में बने हुए है। ऐसे में समय रहते इनकी मरम्मत

फैक्ट फाइल-

जिले में मरम्मत योग्य स्कूल-80

- जिले में भवनविहीन स्कूल-2

- जिले में जर्जर स्कूल-13

जिले के जर्जर स्कूल

ब्लॉक स्कूल

भवानीमंडी जीपीएस शोभाजी का खेड़ा

अकलेरा जीपीएस डोरियाखेड़ी

डग जीपीएस लूनाखेड़ा

बकानी जीपीएस दिन्याखेड़ी

बकानी जीपीएस रघुनाथपुरा

बकानी जीपीएस गणेशपुरा

अकलेरा जीपीएस पटाड़ी

खानपुर जीपीएस लूकट

बकानी जीयूपीएस आमझर कला

खानपुर जीयूपीएस रूपाहेड़ा

मनोहरथाना जीपीएस मोतीपुरा सोरती

मनोहरथाना जीपीएस धामाहेड़ा

मनोहरथाना जीपीएस पिपलिया जागीर

बजट मांग रखा-

जिले में मरम्मत योग्य व जर्जर स्कूलों की सूची बनाकर विभाग को बजट के लिए भेज रखी है। जैसे ही शिक्षा परिषद से बजट आएगा उनकी मरम्मत करवाई जाएगी। जो भवन बिलकुल ही जर्जर है उनमें बच्चों को नहीं बिठाया जा रहा है, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है

सीताराम मीणा, एपीसी, समसा, झालावाड़।