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सन 1875 में बने प्रदेश के दूसरे रोमन एक्वाडक्ट को अब पर्यटन स्थल बनाने की कवायद

यह राजस्थान का दूसरा रोमन एक्वाडक्ट है, इसके अलावा अलवर में है जो वर्ष 1845 में बनाया गया था।

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Jhalawar news : गांवड़ी तालाब में बने प्राचीन रोमन एक्वाडक्ट के दिन फिरने की उम्मीद जगी है। प्राचीन समय में जलापूर्ति के बनाए गया यह एक्वाडक्ट अतिक्रमण की चपेट में आने से मटियामेट होने की कगार पर है लेकिन अब इसको लेकर प्रशासन हरकत में आया है और इसको बचाने की मुहिम शुरू की है।

गांवड़ी तालाब में बने प्राचीन रोमन एक्वाडक्ट के दिन फिरने की उम्मीद जगी है। प्राचीन समय में जलापूर्ति के बनाए गया यह एक्वाडक्ट अतिक्रमण की चपेट में आने से मटियामेट होने की कगार पर है लेकिन अब इसको लेकर प्रशासन हरकत में आया है और इसको बचाने की मुहिम शुरू की है।

जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ के निर्देश पर शनिवार को जिला प्रशासन का दस्ता मौके पर पहुंचा और रोमन एक्वाडक्ट की सफाई शुरू करवाई। मौके पर मौजूद झालावाड़ उपखंड अधिकारी अभिषेक चारण और झालरापाटन तहसीलदार नरेंद्र कुमार ने जिला कलक्टर के निर्देशों के बाद स्थिति का जायजा लिया और वहां के अतिक्रमण को हटाने के भी निर्देश दिए।

एसडीएम अभिषेक चारण ने बताया कि यह रोमन एक्वाडक्ट बड़ी ही सुंदर और ऐतिहासिक संरचना है इसको अतिक्रमण मुक्त करवा कर इसका सौंदर्य करण भी करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस पूरे ढांचे को आने वाले कुछ ही दिनों में पूरी तरह से निखार दिया जाएगा और यह झालावाड़ का एक बहुत ही सुंदर पर्यटन स्थल बनेगा।

यह है इतिहास

यह रोमन एक्वाडक्ट वर्ष 1875 में तत्कालीन शासक पृथ्वी सिंह द्वारा बनाया गया था। यह पूरा एक्वाडक्ट लगभग 1 किलोमीटर लंबा है और 70 मेहराबों पर टिका हुआ है। यह राजस्थान का दूसरा रोमन एक्वाडक्ट है, इसके अलावा अलवर में है जो वर्ष 1845 में बनाया गया था।

रोमन एक्वाडक्ट की सफाई शुरू करवाई गई है, इसका स्वरूप को निखारने के प्रस्ताव बनाए गए हैं, यहां फूलदार पौधों से इसको सजाया जाएगा तथा जहां टूटा है उसकी मरम्मत करवा कर इसको विकसित करेंगे।

अभिषेक चारण, उपखंड अधिकारी, झालावाड़

देखने में आया है कि कई स्थानों पर लोगों ने इस एक्वाडक्ट पर अतिक्रमण कर लिए हैं तथा रास्ते निकाल लिए हैं, उन सभी अतिक्रमणों को हटाने की कार्रवाई की जाएगी।

नरेंद्र मीणा, तहसीलदार झालरापाटन