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बेकसुर ने दो साल दस माह की सजा काटी, अब जांच अधिकारी पर गिरेजी गाज

-प्रकरण में गैर जिम्मेदाराना तरीके से जांच मानी, अदालत ने डीजीपी को भेजी निर्णय कॉपी
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Innocent person sentenced to two years and ten months, now the investigating officer is under attack

बेकसुर ने दो साल दस माह की सजा काटी, अब जांच अधिकारी पर गिरेजी गाज

झालावाड़। विशिष्ट न्यायाधीश [पॉक्सो-क्रम 2] ब्रिजेश पंवार ने दुष्कर्म के एक मामले में अनुसंधान अधिकारी द्वारा गैर जिम्मेदाराना तरीके से अनुसंधान माना। उन्होंने इस मामले में आरोपी को बरी कर दिया। उन्होंने अनुसंधान अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के लिए निर्णय की प्रति पुलिस महानिदेशक को भेजी है। इस मामले में अभियुक्त दिनेश गुर्जर दो साल दस माह तक न्यायिक हिरासत में रहा।
अभियुक्त के अधिवक्ता गौरव मोमियां व कुलदीप गुर्जर ने बताया कि पीडि़ता ने रिपोर्ट दी थी कि भूख लगने पर फल लेने गई थी। वहां उसे दिनेश गुर्जर, उसकी पत्नी व मां मिले। उन्होंने उसे प्रसाद खिलाया, जिसे खाने के बाद वह बेहोश हो गई। दिनेश ने अंता में एक मकान में ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया। पुलिस ने मामला दर्जकर न्यायालय में आरोप पत्र पेश किए। इस मामले में न्यायालय ने अनुसंधान अधिकारी तत्कालीन पुलिस उप अधीक्षक गोपाल लाल मीणा द्वारा अनुसंधान सही तरीके से होना नहीं माना। न्यायालय में सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के मध्य संम्पत्ति विवाद होना सामने आया। चिकित्सकीय साक्ष्य में भी दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई। पीडि़ता के नाबालिग होने का साक्ष्य पेश नहीं किया गया। जिस गाड़ी में पीडि़ता को अंता लेकर जाना बताया, वह भी पुलिस ने जब्त नहीं की गई।
न्यायालय ने आरोपी दिनेश को बरी करते हुए निर्णय में टिप्पणी करते हुए कहा कि अनुसंधान अधिकारी ने प्रकरण में निष्पक्ष अनुसंधान नहीं किया है। इस मामले में आरोप पत्र पेश किए जाने का आदेश पुलिस अधीक्षक झालावाड़ ने दिया, लेकिन ऐसा प्रकट होता है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने ऐसे संवेदनशील मामले के अभिलेख को अवलोकन नहीं किया और औपचारिक कार्यवाही की।