5 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Jhalawar News.निशा दुनिया छोड़ गई, लेकिन नहीं दे पाई रौशनी

Jhalawar News कानूनी अड़चन के कारण निशा का नहीं हुआ नेत्रदान, जिला कलक्टर का दखल भी नहीं आया काम

2 min read
Google source verification
Jhalawar News.निशा दुनिया छोड़ गई, लेकिन नहीं दे पाई रौशनी

Jhalawar News.निशा दुनिया छोड़ गई, लेकिन नहीं दे पाई रौशनी

झालावाड़ .झालरापाटन. Jhalawar News नेत्रदान करने व करवाने के लिए अब लोग जागरूक हो रहे हैं, लेकिन झालरापाटन की 25 वर्षीय निशा का नेत्रदान ऐसी कानूनी पेचिदगी में फं सा की जिला कलक्टर के दखल के बाद भी नेत्रदान नहीं हो सका। दरअसल झालरापाटन की 20 वर्षीय Nisha Eye Donation निशा ने अपने पिता के घर सालरियां गांव में आत्महत्या कर ली थी। निशा के पति ने शादी के कुछ समय बाद ही उसे छोड़ दिया था। जिसके बाद से ही वह अपने पिता के घर रह रही थी। झालावाड़ के अस्पताल में निशा के शव का पोस्टमार्टम से पहले निशा के पिता व भाइयों ने निशा का नेत्र दान करवाने की इच्छा जाहिर की, ताकि कानूनी अड़चन के कारण नेत्रदान नहीं हो सका।
प्रक्रिया में उलझ गए
निशा का कानूनी रूप से उसका तलाक भी नहीं हुआ था। ऐसे में उसके पति व ससुराल वालों की नेत्रदान ने सहमति जरूरी थी। लेकिन निशा की मौत के बाद भी उसका पति व ससुराल वाले उसे देखने अस्पताल नहीं पहुंचे और ना ही पोस्टमार्टम की कार्यवाही के समय मौजूद रहे। मामला Jhalawar District Collector Dr. Bharti Dixit झालावाड़ के जिला कलक्टर भारती दीक्षित तक पहुंच गया और उनके दखल के बाद नेत्रदान की प्रक्रिया शुरू हुई, लेकिन तब तक निशा की मौत को 8 घंटे गुजर गए थे, ऐसे में मेडिकल टीम ने निशा के कॉर्निया को लेने से यह कहकर इंकार कर दिया ।
. नेत्रदान अच्छी बात है और नेत्रदान हो यह हम भी चाहते थे, लेकिन कानूनी तौर पर उसके पति व ससुराल वालों का मौजूद होना जरूरी था। राजेंद्र कुमार मीणा कार्यपालक मजिस्ट्रेट झालरापाटन
. जब निशा के पिता ने नेत्रदान के लिए कहा था, उसी समय हो जाता तो अच्छा था लेकिन सारी प्रक्रिया में समय गुजर गया। निशा की मौत को 8 घंटे से ऊपर हो गए थे ऐसी सूरत में निशा का कार्निया किसी अन्य के काम नहीं आ सकता था। महेंद्र यादव नेत्रदान तकनीकी सहायक एसआरजी हॉस्पिटल झालावाड़