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रंग ला रही मेहंदी, अब तक रेकार्ड भाव में 9100 रुपए प्रति क्विंटल बिकी

कुछ दिन बाद पत्तों में वापस फुटन आ जाती है। इससे दूसरी फसल फरवरी व मार्च में आ जाती है।

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व्यापारी बालकिशन गुप्ता ने बताया कि मेहंदी के भाव आसमान पर है। भाव बढऩे से मेहंदी की बंम्पर आवक हो रही है। किसानों को इतने भाव इससे पहले कभी नहीं मिले। भाव अच्छे मिलने से किसानों के चेहरे पर खुशी देखने को मिल रही है। मंडी में सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश के 7 जिलों से मेहंदी की ज्यादा आवक हो रही है।

देश की दो प्रम़ुख मेहंदी पत्ता मंडियां सोजत व भवानीमंडी है। सोजत में मेहंदी की फसल खराब हो गई। ऐसे में भवानीमंडी की मेहंदी के भाव आसमान पर पहुंच गए हैं। हालांकि भवानीमंडी के मेहंदी पत्ते तुलनात्मक रूप से हल्के हैं, लेकिन मांग बढ़ जाने से भावों में बढ़ोतरी हुई। भाव अब तक के रेकॉर्ड स्तर 9100 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैंं। इसकी खास बात यह है कि यह फसल बिना मेहनत की है।

किसान खेत की मेड़ पर सुरक्षा के लिहाज से इसके पौधे लगाते हैं और उन्हीं पौधों से कमाई भी हो जाती है। व्यापारी बालकिशन गुप्ता ने बताया कि मेहंदी के भाव आसमान पर है। भाव बढऩे से मेहंदी की बंम्पर आवक हो रही है। किसानों को इतने भाव इससे पहले कभी नहीं मिले। भाव अच्छे मिलने से किसानों के चेहरे पर खुशी देखने को मिल रही है। मंडी में सबसे ज्यादा मध्यप्रदेश के 7 जिलों से मेहंदी की ज्यादा आवक हो रही है।

व्यापारी गोविन्द मेड़वताल, प्रदीप जैन तथा अंकुश गुप्ता ने बताया कि सोजत में मेहनत कर बगीचे लगाकर खेती की जाती है जबकि भवानीमंडी व आसपास गांवों में खेत की सुरक्षा के लिए बागर के रूप में इसे लगाया जाता है, जो यह स्वयं उग जाती है।

व्यापारी विजय पोरवाल ने बताया कि भाव एक तरह से सोने के भाव कथीर बिकने के समान है। कृषि मंडी में सभी प्रमुख जिंसों में यह सबसे तेज बिकी है। मेहंदी की रोजाना की 250 से 300 बोरों की आवक हो रही है।

350 किमी दूर से आवक

भवानीमंडी नगर की अ श्रेणी कृषि उपज मंडी में मध्यप्रदेश के मंदसौर, आगर, उज्जैन, शाजापुर, नीमच, राजगढ़, भोपाल व इन्दौर के आस-पास निमाड़ क्षेत्र के किसान इन दिनों मेहंदी पत्ते लेकर पहुंच रहे हैं। किसानाें ने बताया कि वे वर्षों से यहां आ रहे हैं।

15 दिन में फसल तैयार हो जाती है

सुलिया चौकी गांव के किसान ओंकार सिंह गुर्जर व घनश्याम गुर्जर ने बताया कि मेढ़ पर उगी हुई मेहंदी की ढगाल तो तोड़कर एक तिरपाल में रख कर धूप में सुखाया जाता है। 10 से 15 दिन में पत्ता सुख कर तैयार हो जाता है। इस फसल को तैयार करने में किसान को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती है। कुछ दिन बाद पत्तों में वापस फुटन आ जाती है। इससे दूसरी फसल फरवरी व मार्च में आ जाती है।