
36 वन रक्षकों के भरोसे एक लाख 18 हजार हैक्टेयर वन भूमि
झालावाड़. जिले में वन माफियाओं के हौसले इस कदर बुलंद है कि वे वन वनकर्मियों के साथ मारपीट करने से भी गुरेज नहीं करते। राजनीतिक रसूखात के चलते इन लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से जिले में ऐसी वारदातों में तेजी से इजाफा हो रहा है। वर्ष 2022 में कई वन कर्मियों के साथ वन माफियाओं ने मारपीट की कई वारदातों को अंजाम दिया, लेकिन इनमें से सिर्फ दो-तीन प्रकरण ही पुलिस थानों में दर्ज कराए गए। वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने के दौरान पुरुष ही नहीं महिलाएं व बच्चे भी वन कर्मियों पर पथराव करने में पीछे नहीं रहते। कई बार तो ऐसे भी हालात बन जाते हैं जब वन कर्मियों को जान बचाकर भागना पड़ता है। हालांकि अधिकांश अतिक्रमणों में क्षेत्र में पदस्थ वन कर्मचारियों की परोक्ष व अपरोक्ष भूमिका भी सामने आती राहती है। इस खेल में लेन-देन के आरोप भी लगते रहते हैं। वन अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की कमी से मारपीट जैसी घटनाएं होती हैं।
यूं समझे वन विभाग की चौकसी -
झालावाड़ जिले में करीब 1.18 हैक्टेयर वन भूमि है और यहां वन रक्षकों के 120 पद सृजित है। इनमें 84 रिक्त होने से 36 वनरक्षकों पर वनों की सुरक्षा का जिम्मा है। इनकी मदद के लिए 40 होमगार्ड भी लगाए हुए हैं। ऐसे में वन रक्षकों की कुल संख्या 76 हो जाती है। इन 76 कर्मचारियों पर लगभग 8 लाख से अधिक बीघा वन भूमि की सुरक्षा का दारोदार है। एक कर्मचारी के हिस्से में 10 हजार से अधिक वन भूमि की सुरक्षा का दायित्व होने से वनों की सुरक्षा का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।
इन रेंज में हुई वन कर्मियों से मारपीट-
जिले में असनावर, अकलेरा व झालावाड़ रेंज में मारपीट की घटनाए वन कर्मियों के साथ हो चुकी है। बेरागढ़ में गत वर्ष जंगल में अवैध खनन के दौरान एक ट्रैक्टर पकडऩे पर ट्रैक्टर को छुड़ाने के लिए चार-पांच महिलाएं व पुरुषों ने वन कर्मियों पर हमला कर दिया था। हालांकि बाद में ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया है।ट्रैक्टर अभी वन विभगा के दफ्तर में सड़ रहा है।दो साल पहले झालावाड़ रेंज में भी अवैध खनन रोकने के दौरानवन कर्मियों पर हमला किया गया था।बाद में टै्रक्टर जब्त कर लिया गया। पत्थरबाजी व विरोध के बाद समझाइश- कई मामले ऐसे भी सामने आते हैं जब वन भूमि से अतिक्रमण हटाने जाने वाले भरी भरकम लवाजमे पर वहां अवैध कब्जा काश्त करने वाले परिवार सामूहिक हमला करते हैं। हालात तनावपूर्ण बनने के बाद पुलिस व प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी मौके पर पहुंचते हैं तथा दोनों पक्षों की समझाइश कर मामले को ठंडा कर देते है, लेकिन वन भूमि से कब्जा नहीं हटता।गत वर्ष रूपपुरा बालदिया में दो पक्षों में अवैध अतिक्रमण को लेकर झगड़ा हो चुका है।
पुलिस का लेना पड़ता है सहयोग-
कई अतिक्रमी वन कर्मियों पर हमला कर देते हैं। ऐसे में कई बार अतिक्रमण हटाने के लिए पुलिस का सहयोग लिया जाता है। अभी तो कोई मामला सामने नहीं आया है, कहीं ऐसा मामला होता है तो पुलिस में शिकायत करते हैं। हमारे पास स्टाफ की कमी तो है। वी चेतन प्रकाश, उप वन संरक्षक,झालावाड़।
Published on:
08 Oct 2023 09:20 pm
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