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राजस्थान से मुंबई ले जाकर बेचते थे नाबालिग लड़कियां, मानव तस्करी गैंग के 5 आरोपी गिरफ्तार, बताई पूरी प्लानिंग

Interstate Human Trafficking Racket Busted: राजस्थान के झालावाड़ में मानव तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 10 लड़कियों को मुक्त कराया, जिनमें 7 नाबालिग हैं, जबकि गिरोह के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
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झालावाड़

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Akshita Deora

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Updated: 5 Jun 2026, 12:48 PM IST

Human Trafficking Gang

गिरफ्तार आरोपियों की फोटो: पत्रिका

Rajasthan Crime News: झालावाड़ पुलिस ने मानव तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश करते हुए 10 लड़कियों को सुरक्षित मुक्त कराया है। इनमें 7 लड़कियां नाबालिग पाई हैं। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है और एक आरोपी को डिटेन कर लिया। आरोपियों ने पूरी प्लानिंग बताई की नेटवर्क किस तरह 3 स्तर पर काम करता था। ये गिरोह झालावाड़, बूंदी, टोंक, ग्वालियर और मुंबई तक फैला हुआ था तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को झांसा देकर खरीद-फरोख्त और देह व्यापार के दलदल में धकेल रहा था।

लड़कियों को मुंबई ले जाकर एजेंटों को बेच देते थे

पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले प्रकाशित एक समाचार में मानव तस्करी के तार झालावाड़ से जुड़े होने की जानकारी सामने आई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महिला अनुसंधान सेल श्योराजमल मीणा के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की गई। टीम ने गोपनीय जांच शुरू की और जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जानकारी जुटाई।

आरोपियों ने बताया कि स्थानीय दलाल आर्थिक तंगी और कर्ज में डूबे परिवारों को बेहतर भविष्य और रोजगार का झांसा देकर उनकी बेटियों को अपने साथ ले जाते थे। बाद में उन्हें मुंबई और अन्य महानगरों में सक्रिय एजेंटों को बेच दिया जाता था।

नाबलिग लड़कियों के फर्जी दस्तावेज बनाकर बदलते थे पहचान

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह नाबालिग लड़कियों के आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों में हेरफेर कर उनकी उम्र बढ़ाकर उन्हें बालिग दर्शाता था। इसके बाद उन्हें डांस बार और देह व्यापार के नेटवर्क में धकेल दिया जाता था। इतना ही नहीं लड़कियों की पहचान और पते तक बदल दिए जाते थे ताकि भविष्य में उनकी पहचान साबित न हो सके।

मुंबई पुलिस के इनपुट से मिली बड़ी सफलता

दो जून को मुंबई पुलिस की एक टीम कुछ लड़कियों को पुनर्वास के लिए राजस्थान लेकर आई थी। इसी दौरान सूचना मिली कि गिरोह के एजेंट इन लड़कियों को दोबारा अपने कब्जे में लेने की कोशिश कर रहे हैं। झालावाड़ पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मुंबई पुलिस के साथ समन्वय स्थापित किया। जांच में दो ऐसी लड़कियां मिलीं जो रिकॉर्ड में बालिग दिखाई गई थीं लेकिन वास्तव में नाबालिग थीं। इससे फर्जी दस्तावेजों के खेल का खुलासा हुआ।

तीन स्तर पर काम करता था पूरा नेटवर्क

पुलिस के अनुसार रैकेट तीन स्तरों पर संचालित होता था। पहले स्तर पर राजस्थान के स्थानीय एजेंट गरीब परिवारों को तलाशते थे। दूसरे स्तर पर बिचौलिए परिवारों से संपर्क कर आर्थिक लालच देकर लड़कियों को अपने साथ ले जाते थे। तीसरे स्तर पर महानगरों में सक्रिय बड़े एजेंट और डांस बार संचालक इन लड़कियों को अनैतिक गतिविधियों में धकेल देते थे।

‘मौत पर ही कर्ज माफ’ जैसी अमानवीय शर्त

जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों ने पुलिस को भी झकझोर दिया। सौदे से जुड़े कागजातों में यह शर्त दर्ज मिली कि केवल लड़की की आत्महत्या अथवा मृत्यु की स्थिति में ही परिवार पर चढ़ा कर्ज माफ माना जाएगा। इससे गिरोह की क्रूरता और शोषण की भयावह तस्वीर सामने आई है।

कई राज्यों में छापेमारी, लगातार जारी है कार्रवाई

विशेष जांच दल ने मुंबई, बूंदी और टोंक में अलग-अलग टीमों के माध्यम से कार्रवाई कर कुल 10 लड़कियों को मुक्त कराया। पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी को डिटेन किया गया है। मामले में मुंबई से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस का कहना है कि यह अभियान मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता है और नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने के लिए जांच लगातार जारी रहेगी।

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