
- लेप्स होने का डर
झालावाड़.जिले के राशन डीलरों के अब सिर्फ गेहूं के कमीशन के भरोसे परिवार नहीं पल पा रहे हैं। प्रत्येक राशन डीलर को हर माह पन्द्रह हजार रुपए देने के वादे से भी सरकार ने हाथ खींच लिए है। हालत यह है कि जुलाई के बाद राशन डीलरों को गेहूं का कमीशन भी नहीं मिला। 10 करोड़ से ज्यादा का कमीशन बकाया है। वहीं प्रदेशभर की बात करें तो ये राशि 43 करोड़ से अधिक पहुंच रही है। गेहूं कमीशन के भरोसे अब राशन डीलरों की पार नहीं पड़ रही। लंबे समय से इनको अतिरिक्त व्यवस्थाए संसाधन के जरिए कमाई बढ़ाने की बात चलती रही है। लेकिन, यह सिर्फ बातों तक ही सीमित रह गई। जो मामूली कमीशन मिलता है। वह भी समय पर नहीं मिलता। जून के बाद राशन डीलरों को कमीशन नहीं मिला है।
झालावाड़ जिले में करीब 10 करोड़ 50 लाख रूपए का कमीशन बकाया है। जबकि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से एक आदेश जारी कर 31 जनवरी 2025 तक सभी राशन डीलरों को पूरा कमीशन देने की बात कही गई थी। लेकिन अभी तक कमीशन नहीं मिला है। ऐसे में अगर राशि लेप्स हो जाती है। तो फिर से राशन डीलरों को कमीशन के लिए लंबा इंतजार करना होगा। अगस्त में इस मुद्दे पर राशन डीलरों का लंबा आंदोलन चला। राशन डीलरों ने धरना-प्रदर्शन कर कई दिन तक उपभोक्ताओं को गेहूं तक नहीं दिया। उच्च स्तरीय बातचीत के बाद सरकारी आश्वासन तो मिला पर वह लागू अब तक नहीं हो पाया। राशन डीलरों की मांगों को लेकर हाई लेवल समिति का गठन किया गया था। समिति को एक माह में राज्य सरकार को रिपोर्ट सौंपनी थी। जिसकी पहली बैठक 21 अगस्त को खाद्य विभाग में अतिरिक्त खाद्य आयुक्त के नेतृत्व में हुई थी पर अब तक कोई नतीजा सामने नहीं आया। राशन डीलर संघ के साथ उच्च स्तरीय बैठक में गेहूं पर एक प्रतिशत छीजत देने, दस रुपए पोस मशीन कटौती बंद करने, पंद्रह हजार रुपए राशन डीलरों को प्रतिमाह देने का वादा किया गया था। सरकार नेे सिर्फ जून माह का बकाया कमीशन देकर सभी वादों से फिलहाल हाथ खींच लिया लगता है।
- झालावाड़़ जिले में करीब 2 लाख 78 हजार परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के तहत चयनित हैं। इन परिवारों में सदस्यों की संख्या 10 लाख 34 हजार है। इनके लिए प्रति माह सरकार करीब 52 एमटी गेहूं का आवंटन राशन डीलरों को करती है। प्रत्येक सदस्य को हर माह पांच किलो गेहूं दिया जाता है। जिलेभर में करीब 630 राशन डीलर हैं और इतनी ही दुकानें हैं। यह सब डीलर सिर्फ गेहूं के कमीशन से ही परिवार का पेट पालने का असफल प्रयास कर रहे हैं।
-जिले में कुल राशन दुकानें-630
- जिले में कुल परिवार 2 लाख 78 हजार
- जिले में खाद्य सुरक्षा लाभार्थी सदस्य -10 लाख से अधिक
-जिले में राशन डीलरों का कमीशन जो बकाया -10 करोड़ 50 लाख
राशन डीलर को एक क्विंटल गेहूं पर करीब सवा सौ रुपए कमीशन मिलता है। दस से बारह हजार रुपए कमीशन में दुकान का किराया, तोल में फर्क व छीजत,पोस मशीन का चार्ज,मजदूर का भुगतान भी शामिल है। ऐसे में राशन डीलरों को घर चलाना इन दिनों मुश्किल हो रहा है।
सूत्रों की माने तो पिछले दिनों फिर सरकारी स्तर पर राशन डीलरों को अतिरिक्त कमाई का झांसा दिया गया। सरकारी स्तर पर रसद विभाग के अधिकारियों से कई बार ऐसे प्रस्ताव मांगे कि राशन की दुकानों की अतिरिक्त आय कैसे हो। प्रस्ताव भेजने के बाद भी कुछ नहीं हो पाया। सरकार ने राशन डीलरों को हर माह 15 हजार रुपए देने का वादा किया था, वो देना तो दूरए जो कमीशन बन रहा है वो भी समय पर नहीं मिल रहा है।
केन्द्र व राज्य की डबल इंजन की सरकार में सरकारी अनजा बांटने वाले राशन डीलर गत सात माह से आर्थिक परेशानी झेलते हुए सामग्री का वितरण कर रहे हैं। विभाग के पास पर्याप्त बजट होने के बाद भी कमीशन नहीं दिया जा रहा है। डीलरों को 31 जनवरी तक पूरा कमीशन देने के आदेश थे, लेकिन अभी तक कमीशन का एक रूपया भी नहीं मिला।
राशन डीलरों का कमीशन लेप्स होने वाली कोई बात नहीं है। नया पोर्टल बना है, उसकी वजह से समय लग रहा है। उस पर एक-एक चीज देखी जा रही है। यहां से ट्रेजरी से बिल पास होकर जयपुर गए हुए है। जल्द कमीशन दिया जाएगा।
Published on:
03 Feb 2025 11:43 am
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