
हरिसिंह गुर्जर/झालावाड़। राजस्थान में सबसे अधिक बारिश होने वाले झालावाड़ जिले में भीषण बारिश या मौसम में बदलाव की जानकारी जिलेवासियों को समय से मिले, इसके लिए राजकीय पॉलिटेक्निक में मौसम केन्द्र जयपुर द्वारा आर्ब्जवेटरी केन्द्र खोलना तय हुआ था। बाकायदा इसके लिए मौसम विभाग व राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के बीच एमओयू साइन हुआ था, लेकिन पांच साल बाद भी इस केन्द्र की स्थापना नहीं होने से जिलेवासियों को समय पर सटीक जानकारी नहीं मिल पा रही है। अधिकारियों की उदासीनता के चलते सरकार ने सूचनाएं संकलित करने वाले सिस्टम के लिए अभी तक बजट जारी नहीं किया है।
मौसम का पूर्वानुमान और आकलन का कोई साधन नहीं
इससे जिले के लोगों को भारी बारिश व सूखे, तेज हवा, नमी तथा भीषण गर्मी आदि की सूचनाएं नहीं मिल पा रही है। वहीं जिले में सिंचाई विभाग के पास भी मौसम का पूर्वानुमान और आकलन का कोई साधन नहीं है। बारिश के आंकड़ों के लिए भी वह जलाशयों पर लगे गेज पर ही निर्भर है। उनमें से भी कई बांध से सही जानकारी नहीं मिल पाती है, ऐसे में जिले की जनता इधर-उधर से सुनकर या ऑनलाइन आधी-अधूरी जानकारी से ही काम चला रही है।
पांच साल पहले हुआ था एमओयू
जिला मुख्यालय पर राजकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में मौसम विभाग के अधिकारियों व प्राचार्य के बीच पांच साल पहले एमओयू साइन हुए थे, लेकिन अभी तक कुछ पाइप व लॉग बुक ही आई है, इसके आगे काम नहीं बढ़ा है। ये स्टेशन मौसम की जानकारी देने वाला आधुनिक स्टेशन बनना था, लेकिन ये अभी तक आकार नहीं ले सका। इस संबंध में पूना व मौसम विभाग के प्रधान कार्यालय दिल्ली भी कई बार पत्र भेजे गए है, लेकिन इस ओर किसी का ध्यान नहीं होने से जिले में इस केन्द्र की स्थापना अभी तक नहीं हो सकी। पॉलिटेक्निक कॉलेज व मौसम विभाग के निदेशक के बीच एमओयू 28 जून 2017 को हुआ था, लेकिन सरकारी अधिकारियों की उदासीनता के चलते अभी तक इस दिशा में कोई काम नहीं हुआ है। ऐसे में जिले में सर्वाधिक बारिश होने के बाद भी जिले का सही डाटा नहीं मिल पाता है।
यहां लगना था यंत्र
जिले में मौसम विभाग जयपुर द्वारा केन्द्र की स्थापना जिले के पॉलिटेक्निक महाविद्यालय में की जानी थी। यहां वैधशाला 10 गुणा 7 के क्षेत्र में बनाई जानी थी। जिसमें विज्ञान व भूगोल की जानकारी रखने वाले एक-एक व्यक्ति की नियुक्ति भी की जानी है। केन्द्र के लिए पूना से आने वाले स्टीवेशन स्टीम, रेन गेज, एनोमोमीटर, विंड स्पीड मापने का यंत्र, आर्द्रता मापने के लिए हाइड्रोमीटर आदि पूना से अभी तक नहीं आए है। इसके चलते केन्द्र स्थापित नहीं हो सका।
ये कहना है जिले के किसानों का
जिले में मौसम केन्द्र खुलना चाहिए, जिससे जिले के किसानों को जिले के तापमान, बारिश व तेज सर्दी-गर्मी आदि की जानकारी समय-समय पर किसानों को मिल सके।
गोविन्द प्रसाद पाटीदार प्रगतिशील किसान, बकानी खेड़ा।
जिले में मौसम केन्द्र खुलना चाहिए ताकि किसानों को जिले में बारिश पूर्व अुनमान व तेज सर्दी व गर्मी की जानकारी होने से समय पर फसलों को बचा सके। इसके लिए पांच साल पहले एमओयू हुआ था, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। सरकार को जल्द केन्द्र को चालू करना चाहिए।
राधेश्याम गुर्जर,प्रांत युवा प्रमुख, भारतीय किसान संघ।
हां ये बात सही है। झालावाड़ में सबस ज्यादा बारिश होती है। झालावाड़ में हम ऑटोमेटिक वेदर स्टेशन खोलने का प्लान कर रहे हैं। पूर्व में जो ऑर्ब्जवेटरी स्टेशन के लिए एमओयू हुआ था। उसके लिए कुछ उपकरण पूना से आए हैं। इसके बारे में पता करते हैं अभी क्या स्थिति है, क्यों स्थापित नहीं हो पाई।
राधेश्याम शर्मा, निदेशक, मौसम विभाग,जयपुर।
जिले में जोरदार बारिश, कंट्रोल रुम बंद
जिले में इन दिनों अभी तक जोरदार बारिश हो रही है, लेकिन प्रशासन ने 15 सितंबर से कंट्रोल रुम ही बंद कर दिया है। ऐसे में किस तहसील में कितनी बारिश हुई है, इसकी जानकारी भी नहीं मिल पा रही है।
केवल बारिश नापता है विभाग
जिले में मौसम की सटीक जानकारी देने वाला कोई अधिकृत अधिकारी नहीं है। जिले में सिंचाई विभाग साल में चार महीने सिर्फ बारिश ही मापता है। जिले में 15 जून से 30 सितंबर तक मानसून का दौर माना जाता है। इस दौरान ही जिले में होने वाली बारिश और जलाशयों में पानी की आवक का विभाग प्रतिदिन का रेकॉर्ड तैयार करता है। इसके लिए भी वो जलाशयों पर लगे गेज पर ही निर्भर है। कई बार जलाशयों के वास्तवित गेज और बारिश की सूचनाओं में फर्क भी मिलता है। जिले में कहीं भी वर्षामापी यंत्र लगेे हुए नहीं है, ऐसे में इस मौसम केन्द्र की भी जिले में खासी जरुरत महसूस हो रही है।
Published on:
13 Oct 2022 02:59 pm
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