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बच्चे को थी दुर्लभ बीमार एपिस्पेडियाज, डॉक्टरों के कमाल ने दे दी नई जिंदगी

इस तरह की बीमारी पूरे हाडौती में पहली सफल सर्जरी रही हैं। छोटे बच्चों की लंबे समय तक सर्जरी रखना चुनौती पूर्ण रहता है।

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यूरोलॉजी विभाग के डॉ.विशाल नैनीवाल ने बताया कि यह सर्जरी 5-6 घंटे की होती है। इस जन्मजात बीमारी में ऑपरेशन कठिन रहता है। ऑपरेशन में पूरा लिंग काला पढ़ सकता है। अगर खून की नली एवं नसों में परेशानी आ जाए तो आगे भी परेशानी हो सकती है। नैनीवाल ने बताया कि इसमें बच्चे के पूरे लिंग को अंदर से खोलकर सही ऊपर नीचे हो रही पेशाब वाली नसों को सहीं कर पेशाब का रास्ता बनाया गय। ये बीमारी 117000 में से सिर्फ एक में पाई जाती है।

मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने जिले के एक 9 वर्षीय बालक में पाई गई एपिस्पेडियाज नामक एक जन्मजात जटिल बीमारी का सफल ऑपरेशन किया। इसमें मरीज का पेशाब निकालने का रास्ता बनाया गया। जिसमें लिंग के ऊपर नसों को जोड़कर रास्ता बनाया गया। इस ऑपरेशन को करने में 5-6 घंटे का समय लगा।

इसमें मरीज के पेशाब का रास्ता लिंग के छोर पर न होकर लिंग के किसी भी भाग में मिल जाता है, इस कारण पेशाब की धार साधारण रूप से ना बनकर बिखर रही थी। पेशाब की धार शरीर पर गिरती रहती है, शरीर गीला होता रहता है एवं लिंग में मौजूद पेशाब के रास्ते में भी इंफेक्शन का चांस बढ़ जाता है। साथ ही लिंग के ऊपर मौजूद हड्डी के जोड़ में भी गैप रहता है।

डॉ.विशाल कुमार ने बताया कि इस बीमारी को एपिस्पेडियाज कहा जाता है। यह एक जन्म दोष बीमारी है, जो की जन्म से पाई जाती है इसका उपचार एपिस्पेडियाज रिपेयर नामक सर्जरी द्वारा किया जाता है।

5-6 घंटे का समय लगा

यूरोलॉजी विभाग के डॉ.विशाल नैनीवाल ने बताया कि यह सर्जरी 5-6 घंटे की होती है। इस जन्मजात बीमारी में ऑपरेशन कठिन रहता है। ऑपरेशन में पूरा लिंग काला पढ़ सकता है। अगर खून की नली एवं नसों में परेशानी आ जाए तो आगे भी परेशानी हो सकती है। नैनीवाल ने बताया कि इसमें बच्चे के पूरे लिंग को अंदर से खोलकर सही ऊपर नीचे हो रही पेशाब वाली नसों को सहीं कर पेशाब का रास्ता बनाया गय। ये बीमारी 117000 में से सिर्फ एक में पाई जाती है।

इसलिए चुनौती पूर्ण रहता

यूरिन का कंट्रोल नहीं रहने पर इंफेक्शन एवं यूरिनइनकांटीनेंस जैसी समस्या रहती है। एनेस्थीसिया विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ.राजन नंदा ने बताया कि इस तरह की बीमारी पूरे हाडौती में पहली सफल सर्जरी रही हैं। छोटे बच्चों की लंबे समय तक सर्जरी रखना चुनौती पूर्ण रहता है। सर्जरी के बाद 7 दिन में ही मरिज को छुट्टी दे दी गई है। सर्जरी के दौरान पेशाब की थैली एवं पेशाब की नली को आकार दिया जाता गया। अभी बालक स्वस्थ है एवं मरीज की पेशाब की धार शरीर पर ना गिर के जमीन पर गिर रही है।अब मरीज बिना किसी परेशानी के पेशाब कर पता है। मरीज को बार-बार इन्फेक्शन नहीं होता है एवं पेशाब की थैली में ठहर जाता है,जिसके कारण मरीज का कपड़ा गिला नहीं होता एवं अब बालक रोजाना अपने विद्यालय जा सकेगा। ऑपरेशन किए 10 दिन हो गए है।

इन्होंने किया ऑपरेशन

इस बीमारी का सफल ऑपरेशन यूरोलॉजी विभाग डॉ. विशाल कुमार नैनीवाल एवं उनकी टीम द्वारा, निश्चचेतना विभाग के तालमेल से किया गया। टीम डॉ चमन नागर, डॉ आनंद ऋषि, एनेस्थीसिया के डॉ. राजन नंदा, डॉ.सुधीर, डॉ धर्मेंद्र डॉ. ब्रेंडा व अन्य स्टाफ कन्हैया, रोहित, दिलीप, चित्रा, कमल आदि का सहयोग रहा।