1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

झालावाड़

Jal Jeevan Mission : ग्रामीणों ने बनाया अपना खुद का जल जीवन मिशन प्रोजेक्ट, पूरे गांव में बिछा है पाइप लाइनों का जाल

झालावाड़ जिले के आकोदिया गांव का मामला : एक कुई से ले रखे सौ से ज्यादा कनेक्शन

Google source verification

झालावाड़ जिले के आकोदिया गांव के लोगों ने खुद के दम किया जलसंकट का समाधान

सुनेल (झालावाड़). राज्य सरकार जहां जनता को पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर कई जतन कर रही है, वहीं दूसरी ओर भीषण गर्मी में प्यास बुझाने के लिए ग्रामीणों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। सुनेल क्षेत्र के कई गांवों में पेयजल संकट है लेकिन क्षेत्र का आकोदिया गांव हालात ज्यादा खराब है। आजादी के 75 वर्ष बाद भी पेयजल समस्या के लिए यहां जूझना पड़ रहा है। लगभग 2200 की आबादी वाले इस गांव में समस्या उस समय और बढ़ गई जब हैण्डपंप जवाब देने लगे। इसके बाद लोगों ने सरकारी कुई से पानी लेना शुरू कर कर दिया। अभी वर्तमान में इस कुई से लगभग 100 लोगों ने कनेक्शन ले रखे हैं। यहां लोगों ने छतों के ऊपर व विद्युत लाइनों के सहारे पाइप लगा रखे हैं। जिससे पाइपों का जाल बिछा हुआ हैै।

पाइपों पर हजारों रुपए खर्च कुई से कनेक्शन के लिए लोगों ने करीब पांच सौ से सात सौ फीट तक पाइप लाइन बिछा रखी है। इस पाइप की कीमत करीब एक हजार रुपए प्रति फीट है।

ये भी पढ़ें : अदा शर्मा की ‘द केरल स्टोरी’ का नया रिकॉर्ड, इस मामले में बनी पहली फिल्म

हादसे की भी आशंका

आकोदिया में कुई से कनेक्शन के लिए लोगों ने विद्युत पोलों से होकर पाइप निकाल रखे हैं। ऐसे में हमेशा हादसे की आंशका बनी रहती है। गांव के सुमन बाई, टीना बाई, संतोष बाई, फूलबाई, धापूबाई, यशोदा, बबली, कन्हैयालाल, रामपाल गुर्जर, कृपाल गुर्जर, ईश्वर गुर्जर और श्याम गुर्जर सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि जिन लोगों के इस कुई से कनेक्शन नहीं है उनको पीने का पानी करीब आधा किलोमीटर दूर से लाना पड़ रहा है।

ये भी पढ़ें : ब्रेक क्या फेल हुए जान पर बन आई, गनीमत रही समय पर कूद गए

अधिकांश हैण्डपंप खराब

आकोदिया में अभी वर्तमान में मात्र एक हैण्डपम्प चालू है लेकिन उसका भी पानी पीने योग्य नहीं है। गांव में गागरीन सिंचाई परियोजना के पाइंट लगे हुए हैं लेकिन बंद पड़े हैं।

आकोदिया गांव में पेयजल संकट की समस्या के बारे में अभी संबंधित कर्मचारियों को हल करने के निर्देश देता हूं।

जितेन्द्र कुमार, सहायक अभियंता पिड़ावा