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Jhalawar: घूस मामले में फरार हितेश लग्जरी लाइफ जीने का शौकीन, 2 महीने पहले ही GST इंस्पेक्टर से नारकोटिक्स विभाग में ली थी ज्वाइनिंग

Inspector Hitesh Kumar: झालावाड़ के भवानी मंडी में नारकोटिक्स इंस्पेक्टर हितेश कुमार रिश्वत मामले में फरार है। 2 माह पहले ही हितेश ने जीएसटी विभाग छोड़कर नारकोटिक्स ज्वाइन किया था और किसानों और व्यापारियों से रिश्वत मांगने के आरोप लगे हैं।

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हितेश कुमार की फोटो: पत्रिका

Narcotics Department Bribe Case: भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) कोटा की स्पेशल यूनिट की कार्रवाई के बाद नारकोटिक्स विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। भवानीमंडी में पदस्थ नारकोटिक्स इंस्पेक्टर हितेश कुमार रिश्वत प्रकरण में फंसने के बाद से फरार चल रहा है। एसीबी ने उसके सहयोगी दलाल अकरम हुसैन को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था। जहां से उसे जेल भेज दिया गया।

एसीबी के एडिशनल एसपी मुकुल शर्माने बताया कि फरार इंस्पेक्टर की तलाश में बुधवार को भवानीमंडी, झालावाड़ और आसपास के इलाकों में छापेमारी की गई। इसके अलावा टीम ने हितेश कुमार के भवानी मंडी स्थित किराए के मकान की तलाशी भी ली लेकिन वहां से कोई बड़ी राशि या संदिग्ध दस्तावेज नहीं मिले।

2 महीने पहले ही ली थी ज्वाइनिंग

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि हितेश कुमार ने महज 2 माह पहले ही जीएसटी विभाग में इंस्पेक्टर के पद से इस्तीफा देकर नारकोटिक्स विभाग में ज्वाइनिंग ली थी। नए विभाग में आने के बाद उसने बेहद कम समय में रिश्वत के लिए लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया। एसीबी सूत्रों के अनुसार हितेश लग्जरी लाइफ जीने का शौकीन था और उसने भवानीमंडी में एक बड़ा मकान किराए पर लिया हुआ था। वह महंगी कारों से घूमता था और क्षेत्र में खुद को ‘‘सख्त अधिकारी’’ के रूप में पेश करता था।

किसानों और व्यापारियों को धमकाता था

स्थानीय सूत्रों का कहना है कि इंस्पेक्टर हितेश और उसका दलाल अकरम मिलकर किसानों और व्यापारियों को जांच या कार्रवाई के नाम पर डराते-धमकाते थे। एक किसान ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इंस्पेक्टर ज्वाइन करने के तुरंत बाद से ही लोगों को सीबीएन ऑफिस में बुलाकर बिना कारण घंटों बैठाए रखता था और बाद में दलाल के जरिए रिश्वत की मांग की जाती थी। क्षेत्र के कई लोग इससे परेशान थे लेकिन कोई भी सीधे शिकायत करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया।

टीम गठित कर सात दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश

इधर मामले के खुलासे के बाद नारकोटिक्स विभाग में भी आंतरिक जांच शुरू हो गई है। उपायुक्त नरेश बुंदेल ने बताया कि एसीबी की कार्रवाई से पहले इंस्पेक्टर हितेश ने कई लोगों को बिना किसी वैध कारण के हिरासत में रखा हुआ था। इस संबंध में विभाग ने भवानी मंडी अधीक्षक और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है।

जांच कमेटी सात दिन में अपनी रिपोर्ट नारकोटिक्स मुख्यालय को सौंपेगी। रिपोर्ट में दोषी पाए जाने वाले अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि फरार इंस्पेक्टर हितेश के खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। हालांकि अभी तक एसीबी की ओर से नारकोटिक्स विभाग को औपचारिक पत्र नहीं मिला है।

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